जूते पर "ठाकुर" हिरासत में बुलन्दशहर का मुस्लिम दुकानदार

यूपी के बुलंदशहर में जूते के सोल पर ठाकुर लिखकर बेचा जा रहा था, मुस्लिम दुकानदार और जूता बनाने वाली कंपनी पर केस दर्ज हुआ
जूते पर "ठाकुर" हिरासत में बुलन्दशहर का मुस्लिम दुकानदार
यूपी के बुलंदशहर में जूते के सोल पर ठाकुर लिखकर बेचा जा रहा थाGoogle Image

अभी हाल में ही उत्तर प्रदेश के परिवहन आयुक्त द्वारा एक नोटिफिकेशन जारी किया गया था जिसमें यह निर्देश जारी किए गए थे कि कोई भी व्यक्ति अपने वाहनों पर जातिसूचक शब्द नही अंकित करा पायेगा। इस मसले पर काफी हो हल्ला हुआ लेकिन उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर से एक अजीबोगरीब मामला सामने आया है जहाँ पर "ठाकुर" नाम लिखे जूते पर बवाल हो गया। इस मामले में पुलिस ने गिरफ्तारी भी की और बाद में रिहाई भी हुई।

लगा बदनाम करने का आरोप:

मामले की असल जड़ कुछ इस प्रकार है, बुलंदशहर के कथौली कस्बे में नासिर नाम के एक जूता विक्रेता की दुकान है जिसपर वह जूते बेचते है लेकिन बीते दिन नासिर की दुकान पर बिकते हुए जूते को लेकर बवाल खड़ा हो गया। दरअसल स्थानीय बजरंग दल की इकाई ने नासिर पर "ठाकुर" समाज को अपमानित करने को लेकर स्थानीय पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई। शिकायत में शिकायतकर्ताओं ने यह आपत्ति जताई कि नासिर की दुकान में जिन जूतों को बेचा जा रहा है उनके सोल (तलवे) पर ठाकुर लिखा हुआ है। इस लिहाज से नासिर हिन्दू समुदाय के वर्ग को चिन्हित करके बेइज्जत करना चाहता है। मामले को लेकर विवाद इतना बढ़ गया कि पुलिस को मौके पर आकर शांति भंग इत्यादि की धाराओं के तहत नासिर को गिरफ्तार करना पड़ा।

नासिर ने दी सफाई:

इस मामले पर नासिर ने बेहद संजीदगी से पुलिस के सामने बयान दिए। अलबत्ता नासिर ने यह बताया कि वह महज विक्रेता है वह किसी उत्पाद का निर्माता नही है। यह सच है कि सोल के नीचे ठाकुर गुदा (लिखा) हुआ है लेकिन यह अंकन न तो उसके द्वारा किया गया है ना ही कराया गया है। इस मामले पर नासिर के तर्कों के मद्देनजर पुलिस ने नासिर को रिहा कर दिया है। ज्ञात हो कि शिकायत और आरोपों के आधार पर नासिर के ऊपर भारतीय दंड संहिता की धारा 153 A (विभिन्न समूहों के मध्य घृणा प्रसारित करना, या ऐसी भावनाओं को बढ़ाने का प्रयास करना)

३२३ ( जानबूझकर चोट पहुँचाने का प्रयास करना), 504 (शांति भंग करने हेतु अपमान करना) जैसी धाराओं को दर्ज किया गया था।

निर्माता का भी पक्ष आया सामने:

दरअसल इस मामले पर उक्त फुटवियर कंपनी के मालिक नरेंद्र त्रिलोकनी ने विभिन्न मीडिया हाउसेज को दिए गए बयान में बताया कि यह उनकी कंपनी का उत्पाद है और लंबे वक्त से चलन में है। इसका यह मतलब कभी भी नही है कि वह किसी का अपमान करना चाहते है अथवा अपमान किया है। दरअसल यह नाम उनके पितामह (दादाजी) ठाकुरदास त्रिलोकनी के नाम पर है। इस मामले पर बेवजह विवाद खडा किया जा रहा है। इसे समाप्त किया जाना चाहिए

त्रिलोकनी ने नाम बदलने की बात पर कहा कि यह कोई नया नाम नही है यह एक बेहद पुराना उत्पाद है जो लंबे वक्त से चला आ रहा है। हमारे उत्पाद ऑनलाइन शॉपिंग साइट पर भी उपलब्ध है, हमारे द्वारा प्रतिमाह करीब 11 हजार से भी ज्यादा जूते बनाये जा रहे है। मामले पर अधिक जनाकारी देते हुए त्रिलोकनी ने बताया कि हमारे पास अभी तक किसी पुलिस अधिकारी द्वारा संपर्क नही किया गया है और अगर भविष्य में ऐसा होता है तो उसके लिए हमारी लीगल टीम तैयार है।

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उदय बुलेटिन
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