हमीरपुर पुलिस का ये चेहरा देखकर आपको पुलिस से नफरत हो जाएगी, आखिर प्रोफेशनल फोर्स इतनी क्रूर कैसे हो सकती है?

उत्तर प्रदेश के हमीरपुर जिले की पुलिस इन दिनों हाई जोश में नजर आ रही है। बीते दिनों में आने वाले दो मामलों में हमीरपुर पुलिस ने अपना स्याह चेहरा दुनिया को दिखाया है और न सुधरने की ठान ली है।
हमीरपुर पुलिस का ये चेहरा देखकर आपको पुलिस से नफरत हो जाएगी, आखिर प्रोफेशनल फोर्स इतनी क्रूर कैसे हो सकती है?
हमीरपुर सदर कोतवाल श्याम प्रताप पटेलUday Bulletin

महिला को बूटों से कुचला:

ताजा मामला एक वायरल वीडियो से जुड़ा हुआ है जो हमीरपुर जिले की सदर कोतवाली का बताया जा रहा है। जहां पर वायरल वीडियो में सदर कोतवाल श्याम प्रताप पटेल एक अधेड़ महिला से कुछ इंट्रोगेशन करते हुए नजर आ रहे है।

और महिला द्वारा जवाब दिए जाने पर साहब का गुस्सा सातवें आसमान पर जा पहुँचता है और कोतवाल साहब महिला के कमर के नीचे लात मारते हुए नजर आते है।

उसी मारपीट के दौरान नेपथ्य में महिला का "अरे दैया" जैसा चीत्कारना सुनाई देता है और महिला आसपास खड़े लोगो से जान बचाने की गुहार लगाते हुए नजर आती है।

हालांकि वीडियो के वायरल होने के बाद भी हमीरपुर पुलिस के द्वारा इस मामले पर न तो कोई बयान जारी किया गया है ना ही सफाई पेश की गई है। बल्कि महकमे में इस खबर को दबाने की कोशिश की जा रही है।

जानकारों के मुताबिक पुलिस अधिकारी कोतवाल महोदय को क्षेत्र के किसी बड़े नेता का संरक्षण भी प्राप्त है। जिसकी वजह से जिले में कोई उनके खिलाफ बोलने को तैयार नही है।

मौदहा कोतवाली में बीएसएफ कर्मी को कूट दिया:

उसी हमीरपुर जिले में बीते दिनों एक और घटना काफी चर्चा का विषय बनी रही। लेकिन दबाव पड़ने पर मामले को रफा-दफा करने की कोशिश की गयी। दरअसल जिले की मौदहा कोतवाली में बीते दिन एसआई गुलाब सिंह द्वारा एक बीएसएफ कर्मी के साथ मारपीट का वीडियो वायरल हुआ।

जिसमें दरोगा साहब अपनी हनक दिखाते हुए अर्ध सैनिक बल के सिपाही पर अपना पुलिसिया जुर्म करते हुए नजर आए। दरअसल मामला दो पक्षो के विवाद को लेकर था।

जिसमे आरोपों के अनुसार एसआई गुलाब सिंह दूसरे पक्ष से पैसे लेकर बीएसएफ कर्मी से बदतमीजी पर उतारू हो गए और इस कृत्य का विरोध करने पर गुलाब सिंह ने नियम विरुद्ध प्रणाली अपनायी।

एसपी ने माना दोषी है एसआई:

मामले के तूल पकड़ते ही मामले की जांच कराने की बात कही और वीडियो की असल पड़ताल के बाद पुलिस अधीक्षक ने एसआई गुलाब सिंह को भी दोषी माना और एसआई को सस्पेंड कर दिया गया।

साहब थानों में जाकर फरियादियों से अच्छा व्यवहार करने की नसीहत दे रहे है और उनके मातहत लोगो पर लाठी जूते बरसा रहे है।

लेकिन असल सवाल यह भी है कि क्या सिर्फ सस्पेंड करने से अपराध का दंड मिल जाता है ?

जिस महिला के ऊपर कोतवाल साहब ने अपने जूते बरसाए वह जायज कैसे है ?

संविधान, सीआरपीसी और आरपीसी के किस पन्ने में किसी महिला के साथ ऐसे व्यवहार को जायज बताया गया है? मामले को लेकर क्षेत्र में आक्रोश फैल रहा है। लोगों ने आरोप लगाए कि पुलिस स्थानीय लेवल पर वर्तमान सरकार की छीछालेदर करने पर तुली है।

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उदय बुलेटिन
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