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Savitribai Phule सावित्रीबाई ज्योतिराव फुले
Savitribai Phule सावित्रीबाई ज्योतिराव फुले
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सावित्रीबाई फुले जयंती विशेष: देश की पहली महिला शिक्षिका, समाज सेविका जिनके नाम पर बना है पुणे विश्वविद्यालय 

Savitribai Phule सावित्रीबाई ज्योतिराव फुले भारत की प्रथम महिला शिक्षिका, समाज सुधारिका एवं मराठी कवयित्री थीं। उन्हें आधुनिक मराठी काव्य की अग्रदूत माना जाता है।

AKANKSHA MISHRA

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भारत की पहली महिला शिक्षिका सावित्रीबाई ज्योतिराव फुले का जन्म 3 जनवरी 1831 को महाराष्ट्र में सतारा जिले के नायगांव में हुआ था। सावित्रीबाई फुले (Savitribai Phule) भारत की प्रथम महिला शिक्षिका, समाज सुधारिका एवं मराठी कवयित्री थीं। उन्होंने भारत में पहली बालिका विद्यालय की पहली प्रिंसिपल और पहले किसान स्कूल की संस्थापक होने का गौरव प्राप्त हुआ। उन्होंने महिलाओं को शिक्षित करने और उनके अधिकारों की लड़ाई में अहम भूमिरा निभाई थी। उन्हें आधुनिक मराठी काव्य की अग्रदूत माना जाता है। 1852 में उन्होंने अछूत बालिकाओं के लिए एक विद्यालय की स्थापना की।

सावित्रीबाई फुले देश की पहली कन्या विद्यालय की स्थापिका

1848 में पुणे में अपने पति महात्मा फुले (Jyotirao Phule) के साथ मिलकर विभिन्न जातियों की नौ छात्राओं के साथ उन्होंने एक विद्यालय की स्थापना की। एक वर्ष में सावित्रीबाई (Savitribai Phule) और महात्मा फुले (Jyotirao Phule) पाँच नये विद्यालय खोलने में सफल हुए। तत्कालीन सरकार ने इन्हे सम्मानित भी किया। एक महिला प्रिंसिपल के लिये सन् 1848 में बालिका विद्यालय चलाना कितना मुश्किल रहा होगा, इसकी कल्पना शायद आज भी नहीं की जा सकती। लड़कियों की शिक्षा पर उस समय सामाजिक पाबंदी थी। सावित्रीबाई फुले उस दौर में न सिर्फ खुद पढ़ीं, बल्कि दूसरी लड़कियों के पढ़ने का भी बंदोबस्त किया, वह भी पुणे (Pune) जैसे शहर में।

महानायिका सावित्रीबाई फूले

सावित्रीबाई फूले (Savitribai Phule) पूरे देश के लिए महानायिका से काम नहीं हैं। उन्होंने हर बिरादरी और धर्म के लिये काम किया था । जब सावित्रीबाई फूले (Savitribai Phule) लड़कियों को पढ़ाने के लिए जाती थीं तो रास्ते में लोग उन पर गंदगी, कीचड़, गोबर, विष्ठा तक फैंका करते थे। सावित्रीबाई एक साड़ी अपने थैले में लेकर चलती थीं और स्कूल पहुँच कर गंदी कर दी गई साड़ी बदल लेती थीं। अपने पथ पर चलते रहने की प्रेरणा सावित्रीबाई फूले ने बहुत अच्छे से दुनिया से सामने दिया और मिशाल कायम किया।

लोगों की सेवा करते-करते दुनिया को कहा था अलविदा

10 मार्च 1897 को प्लेग के कारण सावित्रीबाई फुले का निधन हो गया। सावित्रीबाई फुले ने अपने गोद लिए हुए बेटे यशवंतराव के साथ मिल कर अस्पताल खोला था। इस अस्पताल में प्लेग महामारी के दौरान वे लोगों की सेवा करते थी। एक प्लेग के छूत से प्रभावित बच्चे की सेवा करने के कारण सावित्रीबाई फुले को भी छूत लग गया और प्लेग से ही उनकी मृत्यु हुई।

सावित्रीबाई फुले पुणे विद्यापीठ (Savitribai Phule Pune University)

सावित्रीबाई फुले पुणे विद्यापीठ (Savitribai Phule Pune University) का पूराना नाम पुणे विद्यापीठ हुआ करता था। 19वीं सदी की महान समाज सुधारक सावित्रीबाई फुले के नाम पर पुणे विद्यापीठ का नाम बदल कर सावित्रीबाई फुले पुणे विद्यापीठ (Savitribai Phule Pune University) रखा गया। सावित्रीबाई फुले के द्वारा महिला शिक्षा के प्रति जागरूकता, महिलाओं के सशक्तीकरण और उनकी सेवा भावना के योगदान के लिए उन्हें यह श्रद्धांजलि दी गई।