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saint murdered in maharashtra|Uday Bulletin 
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जाहिलपन की पराकाष्ठा, अफवाह फैलाकर साधुओं को मार दिया। 

“नेपथ्य में “मार शोएब मार” की आवाजें आपको विचलित कर सकती है” 

Shivjeet Tiwari

Shivjeet Tiwari

कई बार आपको समाज मे होती कुछ घटनाओं से घुटन होती है तो कुछ से चुभन, लेकिन ये घटना इन सबसे ऊपर उठकर आपको उल्टी करने पर मजबूर करती है, लाचार साधुओं को मरते देखकर आपका दिल टूट जाता है।

क्या ये मॉब लिंचिंग थी ?:

देखिए हम गहराई में जाये बिना सिर्फ एक कयास लगाते है कि आखिर मॉब लिंचिंग के पैमाने क्या होते है, कुछ निहत्थे लोगों पर लाठी डंडों की बारिस करता हुआ उन्मादियों का एक समूह, यही न? लेकिन वक्त के बाद मॉब लिंचिंग केवल कुछ लोगों की जागीर बन जाती है। मीडिया की एक विशेष धारा भी इसमें कोई खास मिर्च मसाला न होने की बात समझकर इसे छोड़ देता है। लेकिन जहर आखिर जहर होता है वह अपना काम करता है फिर चाहे पीने वाला किसी जाति धर्म और समुदाय से हो।

क्या है मामला :

मामला सीधे तौर पर उन्माद फैलाकर हत्या करने से जुड़ा हुआ है, अगर वाकये को गौर से देखे तो इस मामले में पुलिस प्रशासन की एक अजीब सी मिली भगत दिखाई देती है। दरअसल पंच दशनाम जूना अखाड़ा ने मुख्यमंत्री को लिखे एक पत्र में इस घटना का विवरण दिया है कि 16 अप्रैल 2020 को अखाड़े के ही दो संत कल्पवृक्ष गिरी उम्र लगभग 70 वर्ष, और सुशील गिरी उम्र लगभग 35 वर्ष के आसपास एक कार चालक नीलेश के साथ अपने गुरु महंत रामगिरि की मृत्यु होने के बाद अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए मुम्बई से गुजरात के लिए निकले थे।

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saint murdered in maharashtra Social Media

अखाड़े और प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार पालघर जिले ( महाराष्ट्र) के थाना कासा क्षेत्र के अंतर्गत गांव गढ़ चिंचले में पहले से उपस्थित करीब 200 लोगों ने कार को रोककर घेर लिया और बाहर निकल कर सभी लोगो की पिटाई की, वहां पर सभी लोगो ने दोनो संतो और कार चालक पर चोर और डाकू होने का आरोप लगाया।

पुलिस आयी और फिर हुआ नंगनाच :

दरअसल लॉक डाउन होने के कारण पुलिस ने तत्काल मौके पर पहुँच कर तीनो लोगों ( दोनो संत और चालक ) को अपनी हिरासत में ले लिया उसके बाद ही भीड़ ने पुलिस की मौजूदगी में दोनो संत और कार चालक को लाठी डंडों, चाकुओं से पीट-पिट कर मार डाला, सबसे अजीब बात तो यह रही कि मौके पर खड़ी पुलिस बस सभी लोगों को मरता देखती रही, लोगों द्वारा बनाये गए वीडियो को शोसल मीडिया में आने के बाद पता चलता है कि तीनों लोगों की जान बचाने के लिए पुलिस कोशिश भी करती हुई नजर नहीं आई, बल्कि पुलिस उस वक्त खुद के लिए बचाव के मुद्रा में नजर आती है, जूना अखाड़ा ने भी पुलिसकर्मियों पर हत्या में सहयोग करने का आरोप लगाया है।

पालघर में कोई 1 या 2 पुलिस वाले नहीं थे जैसा कुछ विडीओ में लग रहा है ..पूरी पुलिस फ़ौज के होते हुए ये लंचिंग हुई है। यह...

Posted by Dr. Sambit Patra on Sunday, April 19, 2020

सोशल मीडिया और सरकार के दावे :

सोशल मीडिया में इस मामले से जुड़े तमाम वीडियो और चित्र वायरल हो रहे है जिसमें एक वीडियो में भारी भीड़ के द्वारा संतो को पीटते हुए दिखाया जाता है, वीडियो के पूरे घटनाक्रम में भारी शोर शराबा सुनाई देता है, लगभग अंत मे एक आवाज नेपथ्य में सुनाई देती है जिसमे "मार शोएब मार" या फिर भाग शोएब भाग"जैसा वाक्य सुनाई देता है, सोशल मीडिया में इस हत्या के पीछे समुदाय विशेष का होना बताया जा रहा है।

वहीँ इस मामले पर वर्तमान में महाराष्ट्र की सत्ता पर काबिज एनसीपी - शिवसेना- कांग्रेस (अघाड़ी सरकार) के अनुसार मामले पर एफआईआर दर्ज करके करीब 110 लोगों को हिरासत में ले लिया गया है, खुद सरकार में एनसीपी की तरफ से सरकार के गृहमंत्री अनिल देशमुख ने अपने ट्विटर पर इस बारे में जानकारी देते हुए बताया कि इस मामले की उच्चस्तरीय जांच कराई जाएगी, हालांकि अब इसे चाहे राजनैतिक विवशता कहे या फिर कुछ और खुद महाराष्ट्र के गृहमंत्री का यह कहना कि इसमे दोनो पक्ष अलग धर्मीय नहीं है, ये सरकार की मजबूरी को दर्शाता है।

लोगों मे गुस्सा पनप रहा है:

महाराष्ट्र के पालघर में हुए इस मामले को लेकर महाराष्ट्र सरकार की उदासीनता और लचर व्यवस्था को लेकर पूरे देश मे अखाड़ा पर आस्था रखने वाले लोगों का गुस्सा बढ़ रहा है खुद अखाड़े ने मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे को पत्र लिखकर इस बारे में चेतावनी जारी की है कि अगर सही दोषियों को ख़ोजकर इसकी सजा नहीं मिलती तो मामला बिगड़ सकता है।

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उदय बुलेटिन
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