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अमित शाह ने ‘D’ कॉलम पर क्यों दिया इतना जोर , NPR से क्या है इसका सम्बन्ध

NPR को लेकर देशभर के लोगों में जो मतभेद बना हुआ है उसे क्लीयर करना अब बेहद जरूरी है।

Puja Kumari

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शाहीन बाग़, चाँद बाग़ आदि जगहों पर महीनों तक चले विरोध प्रदर्शन और दंगों की वजह CAA, NRC, NPR को ही माना जा रहा है। इसे देख कर ऐसा लग रहा है कि या तो सरकार जबरन देशवाशियों पर इसे थोप रही या फिर जनता ही इसे समझने की कोशिश नहीं कर रही। आखिर कहीं पर तो कोई कमी है जिसका अभी तक सम्पूर्ण समाधान नहीं निकाला जा सका है।

हालाँकि बीच बीच में सरकार की तरफ से लगातार इन सभी एक्ट और नियमों को लेकर साफ़ किया जा रहा है की NRC, NPR होने से किसी भी नागरिक की नागरिकता नहीं जाएगी फिर चाहे वो किसी भी धर्म या समुदाय का हो।

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अभी हाल ही में अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भारत दौरे पर आये थे मगर उसी दौरान NRC, NPR के विरोध और समर्थन को लेकर राजधानी दिल्ली में ऐसी हिंसा उठी की पूरा देश दहल गया था। इस विरोध प्रदर्शन में करोड़ो की संपत्ति का नुकसान हुआ सो हुआ साथ ही साथ कुछ लोगों की जान भी चली गयी। 12 मार्च को सदन में दिल्ली हिंसा पर चर्चा के दौरान गृहमंत्री अमित शाह ने विपक्ष पर आरोप भी लगाया की वो जनता को बरगला रहे। उन्हें चाहिए की NRC, NPR की बारीकियों को आमजन को समझाएं और उन्हें बताएं की जिस बात के लिए उन्हें भड़काया जा रहा और वो आये दिन विरोध और प्रदर्शन आदि कर रहे वो ना करें।

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किसी के नाम के आगे "D" नहीं लिखा जाएगा

गृहमंत्री अमित शाह ने NPR पर बयान देते हुए कहा की भारतवर्ष का गृहमंत्री होने के नाते मैं खुद इस बात का यकीन दिलाता हूँ कि NPR की प्रक्रिया के दौरान किसी भी नागरिक से कोई दस्तावेज नहीं माँगा जायेगा। यदि किसी परिस्थिति में उनसे कागजात मांगे जाने पर वो उपलब्ध नहीं करा पाते हैं तो उस स्थिति में बिना सोचे-समझे उनके नाम के सामने 'D' नहीं लिखा जायेगा।

आखिर क्या है ये "D"

गृहमंत्री ने अपनी तरफ से सदन में साफ़ साफ़ शब्दों में विपक्ष और देश की जनता को भरोसा तो दिला दिया मगर बावजूद इसके लोगों के मन में लगातार एक सवाल अभी भी आ रहा की आखिर ये "D" है क्या? जिसका जिक्र बार-बार गृह मंत्री कर तो रहे मगर इसके बारे में कुछ नही बताया। तो आपको बता दें कि 'D' माने Doubtful, यानी की Doubtful citizen इस बात को आप इस तरह से समझ लीजिये की NPR की प्रक्रिया के दौरान यदि कोई भी नागरिक पूछे गए सवालों का सही सही जवाब नहीं दे पाता है या फिर उसपर किसी तरह की शंका होती है तो उस स्थिति में उसके लिए ‘डाउटफुल’ यानी 'D' श्रेणी का इस्तेमाल किया जाना है।

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NPR यानी की नेशनल पॉपुलेशन रजिस्टर जिसका सीधा-सीधा अर्थ ये है की इसके जरिये देश के नागरिकों की जनसँख्या के साथ साथ उनके अन्य कई विवरण का ब्यौरा लिया जायेगा। ऐसा करने से देश की वर्त्तमान स्थिति का सही सही अनुमान लगाया जा सकेगा और उसी अनुसार लोगों को अलग अलग श्रेणी में रखते हुए देश के विकास को बढ़ाते हुए नीतियों को लाया जायेगा।

फिलहाल तो आपको ये बता दें कि NPR की प्रक्रिया दो चरणों में पूरी की जाएगी, पहला चरण 1 अप्रैल 2020 से 30 सितम्बर 2020 तक तथा दुसरा चरण 9 फरवरी 2021 से 28 फ़रवरी 2021 तक चलेगा जिस दौरान देश के नागरिकों के घर जा-जाकर आंकड़े इक्कठे किये जायेंगे।

हालाँकि इतनी सफाई देने और सरकार द्वारा बार बार समझाने के बाद भी ऐसा लगता है की NPR को लेकर देश में स्थिति साफ़ नहीं हो पायी है और नागरिकों में अभी भी कई तरह के मिथक बने हुए है।

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उदय बुलेटिन
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