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उपेंद्र कुशवाहा ने दिया इस्तीफा
उपेंद्र कुशवाहा ने दिया इस्तीफा|IANS
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मोदी सरकार से नाराज केंद्रीय मंत्री और आरएलएसपी नेता उपेंद्र कुशवाहा ने दिया इस्तीफा

उपेंद्र कुशवाहा संसद सत्र शुरू होने के एक दिन पहले सोमवार को अपने फैसले की घोषणा के लिए दोपहर दो बजे एक संवाददाता सम्मेलन आयोजित करेंगे।

AKANKSHA MISHRA

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नई दिल्ली: केंद्रीय मानव संसाधन विकास राज्य मंत्री व राष्ट्रीय लोक समता पार्टी (आरएलएसपी) के प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा भारतीय जनता पार्टी (BJP) से नाराज चल रहे हैं। सुत्रों की माने तो उपेंद्र कुशवाहा BJP द्वारा किये गए टिकट बटवारें से खुश नहीं है। इसलिए सोमवार को केंद्रीय मंत्रिमंडल से उनका इस्तीफा लगभग तय माना जा रहा है। भाजपा सूत्रों ने यह जानकारी दी।

सूत्रों ने कहा कि आरएलएसपी प्रमुख कुशवाहा का 2019 के लोकसभा चुनाव में बिहार में सीटों के बटवांरे को लेकर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) से मतभेद चल रहा है। ऐसी अटकलें भी हैं कि कुछ हफ्तों बाद वह राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) से भी इस्फीदा दें देंगे और संसद के शीतकालीन सत्र शुरू होने से एक दिन पहले सोमवार को उन्होंने भाजपा के नेतृत्व वाले राजग (NDA) का साथ छोड़ दिया है।

इससे पहले दिन में मंत्री ने मीडिया से कहा कि वह राजग की संसद भवन परिसर में आयोजित होने वाली शाम चार बजे की बैठक में हिस्सा नहीं लेंगे। उन्होंने संवाददाताओं से कहा, "मैं राजग की बैठक में भाग नहीं लूंगा।"

बिहार में भाजपा व जनता दल (यू) के 17-17 सीटों पर चुनाव लड़ने की भगवा पार्टी के घोषणा के बाद से उपेंद्र कुशवाहा भाजपा के खिलाफ हो गए हैं। सीटों के बंटवारे की घोषणा के बाद से कुशवाहा बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के की मुखर आलोचक हो गए हैं।

दरअसल रालोसपा नेता उपेंद्र कुशवाहा 2019 में होने वाले लोकसभा चुनाव के टिकट बटवारें से नाराज है। रालोसपा को 2019 में होने वाले लोकसभा चुनाव में दों से ज्यादा सीटें नहीं मिलने से वे नाराज है। बीजेपी गठबंधन छोड़ने के बाद कुशवाहा विपक्षी पार्टी राजद और कांग्रेस से हाथ मिला सकती है। आपको बता दें कि, बिहार में लोकसभा सीटों की संख्या 40 है।

राम मंदिर मुद्दे को लेकर उन्होंने बीजेपी पर तीखा हमला किया। उन्होंने कहा कि बीजेपी हर चुनाव से पहले राम मंदिर मुद्दा जरूर उठाती है , बीजेपी का मकसद जनता का ध्यान भटकना है और जरुरी मुद्दे से भागना है। कुशवाहा ने कहा देश संविधान से चलता है और हमारा संविधान धर्मनिरपेक्ष है। अगर हिन्दू मंदिर बनाना चाहते है तो सही तरिके से बनाये। राजनितिक पार्टियां मंदिर मस्जिद नहीं बनाती है।