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राइट टू इनफार्मेशन
राइट टू इनफार्मेशन|Source- Google
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RTI Day: मोदी सरकार के कार्यकाल में क्या है भारत का वैश्विक रैंक, जानें 

कांग्रेस की गठबंधन वाली सरकार ने वर्ष 2005, 12 अक्टूबर को ‘राइट टू इनफार्मेशन’ (RIT Act) लागू किया था, तब से अब तक जाने क्या कुछ बदला गया है। 

AKANKSHA MISHRA

AKANKSHA MISHRA

Summary

कांग्रेस की गठबंधन वाली सरकार ने वर्ष 2005, 12 अक्टूबर को ‘राइट टू इनफार्मेशन’ (RIT Act) लागू किया था, उस समय भारत वैश्विक स्तर पर दूसरे नंबर पर था, लेकिन बीजेपी की पूर्ण बहुमत वाली मोदी सरकार के कार्यकाल के दौरान भारत की वैश्विक रैंककिंग छठें नंबर पर खिसक गई है।

नई दिल्ली : दुनिया के मुख्य 123 देशों में RIT कानून है, भारत में इस कानून को (Right Of Information) 'सूचना का अधिकार' के नाम से जानते हैं , वहीं विश्व के कई अन्य देशों में इसे 'राइट टू नो' (Right To Know) के रूप में जानते हैं। ट्रांस्परेन्सी इंटरनेशनल इंडिया ने भारत में 12 अक्टूबर RTI Day के खास मौके पर भारत की अंतरराष्ट्रीय रैंकिंग जारी कि है , जिसमें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की गिरती रैंकिंग का जिक्र है। जिस वर्ष RIT कानून लागु किया गया था, उस समय अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की रैंकिंग दूसरे नंबर पर थी, जो पिछले साल गिरकर पांचवे नंबर पर आ गई थी, और इस वर्ष यह एक पायदान नीचे गिरते हुए छठें नंबर पर आ गई है। ताजुब की बात ये है, जिन देशों को भारत से ऊपर स्थान मिला है , उनमें ज्यादातर देशों में RTI कानून भारत के बाद लागू किये गए थे।

2018 - वैश्विक स्तर पर जारी रैंकिंग
2018 - वैश्विक स्तर पर जारी रैंकिंग
source - global right to information rating

देश में भ्रष्टाचार, पारदर्शिता, नागरिक व सरकार के कामकाज में पारदर्शिता जैसे मसलों की निगरानी के लिए RTI कानून बनाया गया था , लेकिन RTI Act के पालन को लेकर जो रिपोर्ट सामने आई है वो चौकाने वाली है।

किन देशों से पीछे हैं हम

ग्लोबल स्तर पर 'राइट टू नो' के तहत अफगानिस्तान देश को पहले स्थान पर जगह मिली है , अफगानिस्तान ने 150 में से 139 नंबर के साथ मैक्सिको को पिछले छोड़ते हुए पहले स्थान पर जगह बना ली है। अफगानिस्तान में RTI Act 2014 में लागू किया गया था। भारत से 9 साल बाद , जिसके बावजूद अपनी कानूनन लापरवाहियों और खामियों के चलते भारत पीछे रह गया। मनमोहन सरकार के दौरान वर्ष 2011 में भारत 130 अंकों के साथ दूसरे स्थान पर था, जबकि सर्बिया पहले स्थान पर था। 2012 में भी भारत नंबर 2 पर हे बना रहा , मगर 2014 में भारत की रैंकिंग गिरकर 128 अंकों के साथ तीसरे स्थान पर आ गई ,2016 में भारत चौथे स्थान पर रहा , जबकि मैक्सिको पहले स्थान पर था , वहीं 2017 में भारत पांचवें स्थान पर आ गया , जबकि भारत के 11 वर्षों के बाद RTI कानून बनाने वाला देश श्रीलंका तीसरे स्थान पर है।

 2005 - वैश्विक स्तर पर जारी रैंकिंग
2005 - वैश्विक स्तर पर जारी रैंकिंग
source - global right to information rating

RTI Act के कमजोर होने का कारण :-

  • राजनितिक स्तर पर सूचना आयोग को मजबूत बनाने के लिए कोई प्रयास नहीं किया गया।
  • मानव संसाधन की कमी
  • राज्य सूचना आयोग में ऑफिस का आभाव
  • पदों की रिक्ति
  • अप्रभवि मैनेजमेंट सिस्टम
  • राज्य स्तर पर असमान RTI कानून
  • उच्च पदाधीकारियों की कमी

किस मात्रक पर होती है ग्लोबल रैंकिंग -

  • कानून का प्रचार
  • अपील की प्रक्रिया
  • आवेदन के सहज नियम
  • सुचना आयोग का दायरा
  • संस्था को छूट
  • सरकार द्वारा संरक्षण, मजबूती और मंजूरी
  • सूचना देने की अवधी