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कोरोना वायरस के लिए किलर साबित होगा रेमडेसिविर ? इबोला में भी हुआ था इसका प्रयोग

दुनियाभर में कोरोना से तबाही का क्रम जारी है और ऐसे में वैज्ञानिकों को रेमडेसिविर दवा के परिक्षण के परिणाम ने एक बहुत बड़ी उम्मीद जगा दी है, शायद अब कोरोना का कहर थम ही जायेगा

Puja Kumari

Puja Kumari

कोरोना के इलाज पर हर किसी की नजरें टिकी हुई है, सभी को बस इसी बात का इन्तजार है कि कब किसी देश का कोई वैज्ञानिक इस बात की सुचना देगा की कोरोना वायरस की दवा बना ली गई है। जिसके बाद इस महामारी से दुनिया को निजात मिल जाएगी जिसने अभी तक 2 लाख से ज्यादा लोगों की जिंदगी छीन ली है और 33 लाख से भी ज्यादा लोग इससे संक्रमित हैं।

सबसे ज्यादा प्रभवित देश तो अमेरिका है जहाँ पर 65 हजार से ज्यादा लोग अपनी जान गँवा चुके है और 11 लाख से अधिक लोग संक्रमित हैं। हालाँकि अच्छी बात ये है कि अमेरिका में अभी तक डेढ लाख के क़रीब लोग इस महामारी से ठीक हो कर अपने घर भी जा चुके हैं।

रेमडेसिविर : भयावह होते आंकड़ों के बीच दुनिया को दिखी उम्मीद की किरण

आंकड़े लगातार बदलते ही जा रहे है और ये सिर्फ बढ़ ही रहे हैं न घट रहे और ना ही थम रहे। मगर इसी बीच एक अच्छी खबर सुनने में आ रही है, वो खबर कोरोना के इलाज से सम्बंधित है। जी हाँ, इन दिनों एक दवा रेमडेसिविर की काफी चर्चा हो रही और बताया जा रहा है कि यह दवा कोरोना मरीजों के इलाज में बहुत ही प्रभावी तरीके से काम कर रही।

अभी तक अमेरिका में इस दवा का तक़रीबन एक हजार से ज्यादा कोरोना मरीजों पर परिक्षण किया जा चुका हो और इसके परिणाम बेहद ही सकारात्मक आये हैं। जानकारी के अनुसार बताया जा रहा है कि अमेरिकी सरकार के शीर्ष के संक्रामक रोग विशेषज्ञ डॉ एंथनी फौसी ने कोरोना वायरस से जंग में रेमडेसिविर ड्रग के क्लिनिकल ट्रायल के जो परिणाम आये हैं वो बेहद ही आशाजनक है।

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इस दवा के सकारात्मक परिणामों को देखते हुए अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रंप काफी उत्साहित हैं इस दवा को बनाने की प्रक्रिया को और गति देने निर्देश जारी किया है ताकि इसके इस्तेमाल से अन्य संक्रमित लोगों का उपचार किया जा सके।

इस दवा के इस्तेमाल से कोरोना मरीज केवल 11 दिनों में ही स्वस्थ्य हो गए जबकि जिन-जिन मरीजों को प्लेसिबो वैक्सीन दी जा रही थी उनकी रिकवरी रेट 15 दिन थी। ऐसे में यह कहना गलत नहीं होगा कि यह दवा निश्चित रूप से ही कोरोना के इलाज में एक जादुई असर दिखा रही है और दुनिया के लिए एक नयी उम्मीद भी जगा दी है।

इबोला पर रही नाकाम मगर कोरोना मरीजों के आ रही काम

फिलहाल भारत अभी गिलिएड कंपनी द्वारा निर्मित रेमडेसिविर दवा के परिणामों पर बारीकी से अध्ययन कर रहा है। ऐसा नहीं हैं कि रेमडेसिविर वैक्सीन का इस्तेमाल पहली बार किया जा रहा है, इससे पहले भी इस ड्रग का इस्तेमाल इबोला वायरस के मरीजों पर किया जा चुका है जो कि नाकाम रहा।

हालाँकि कोरोना के मरीजों पर इसका सकारात्मक असर दिख रहा है और इसके प्रयोग से इस वायरस की उस प्रक्रिया को रोक पाने में सफल होता दिख रहा जिसकी वजह से वायरस एक के बाद एक अपनी सैकड़ो कॉपी बनाते जाते है और मानव शरीर के प्रतिरक्षा प्रणाली पर हावी हो जाते हैं।

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इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च के निदेशक के अनुसार रेमडेसिविर ड्रग वह दवा है जो इस्तेमाल से कोरोना वायरस के परिवर्तन पर कार्य करती है और इसके इसी सकारात्मक परिणामों की वजह से वैज्ञानिक कोरोना के इलाज की दृष्टि से इसे बेहद अहम मान रहे हैं। हालाँकि चीन में इस दवा का पहले ही ट्रायल किया जा चुका है जिसके यह बात सामने आई कि यह दवा कोरोना के गंभीर मरीजों पर बेअसर है, नतीजन इसका आगे इस्तेमाल नही किया गया।

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