शादी के लिए किया गया धर्म परिवर्तन कानूनी नही: इलाहाबाद हाईकोर्ट

शादी के लिए धर्म परिवर्तन करने वालों को इलाहाबाद कोर्ट की नसीहत
शादी के लिए किया गया धर्म परिवर्तन कानूनी नही: इलाहाबाद हाईकोर्ट
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वैसे तो संविधान ने भारत के प्रत्येक व्यक्ति को अपनी मर्जी और आस्था के बल पर धर्म को चुनने और उसका अनुसरण करने का अधिकार दिया है, लेकिन लंबे वक्त से धार्मिक अनुसरण का उपयोग निजी लाभ और कानूनी प्रकरणों से बचाव और सुरक्षा के लिए किया जाता रहा है, हालांकि इन मामलों को लेकर हाईकोर्ट जैसी न्यायिक संस्था ने ऐसे मामलों पर अपनी नजर टेढ़ी कर ली है, हाईकोर्ट ने बताया कि बिना आस्था और उस धर्म को जाने बिना केवल निजी लालच के लिए किसी धर्म को स्वीकार करना कानूनी नहीं होगा।

शादी के लिए धर्म परिवर्तन:

भारत मे इस वक्त चल रहे प्रेम विवाहों के मद्देनजर लोगों की चिंताए बढ़ी हुई है दरअसल इसके पीछे-पीछे एक और चीज बेहद कॉमन तरीके से लगातार हो रही है धर्मपरिवर्तन, दरअसल विवाह को कानूनी मान्यता और नियम क़ायदों से खेलने के लिए धर्म को बदल-बदलकर खेल खेला जा रहा है, इसको लेकर हाईकोर्ट ने सख्त टिप्पणी की है।

मामला यह है कि इलाहाबाद हाईकोर्ट में एक नवविवाहित जोड़े ने अपील की, इस अपील में यह निवेदन किया गया था कि लड़की के पिता उनके वैवाहिक जीवन मे अपनी दखलंदाजी कर रहे है, उनके रक्षण हेतु हाईकोर्ट यह निर्देश जारी करे कि लड़की के पिता न सिर्फ उनसे दूर रहे बल्कि उनके धार्मिक जीवन में हस्तक्षेप न करें।

हाईकोर्ट ने कहा न बाबा न:

हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति एमसी त्रिपाठी ने एक मामले (प्रियांसी उर्फ समरीन) दरअसल समरीन धर्म परिवर्तन के बाद बदला गया नाम है, को हाईकोर्ट ने सुनवाई करते हुए कहा कि मात्र शादी के लिए किया गया धर्म परिवर्तन कानूनी रूप से वैध नहीं माना जा सकता, इस मामले में हाईकोर्ट ने एक पुराने लेकिन अपनी तरह के बेहद चर्चित मामले " नूर जहाँ केस" का हवाला देते हुए बताया कि निजी मामलों में बेवजह कानूनी लाभ पाने हेतु धर्म परिवर्तन सही नही माना जायेगा।

क्या है नूर जहाँ मामला:

नूर जहां मामला प्रेम विवाह और धर्म परिवर्तन से जुड़ा हुआ था जहाँ पर एक प्रेमी जोड़े जिन्होंने अपने मुस्लिम प्रेमी के इशारे पर हिन्दू प्रेमिका ने इस्लाम को स्वीकार करके कोर्ट से सुरक्षा की मांग की थी, हालाँकि हाईकोर्ट ने बिना आस्था रखे हुए केवल शादी के लिए स्वीकारे गए धर्म को नाजायज करार दिया था, हाईकोर्ट ने अपने निर्णय में कहा था कि जब आपको उक्त इस्लाम की शिक्षाओं के बारे में कोई जानकारी नही है, आस्था नहीं है और केवल निजी सुख के लिए धर्म परिवर्तित करने की घटना चकित करती है, हाईकोर्ट का एक तर्क यह था कि अगर यह मामला हो जाता है तो इसके बाद प्रदेश में ऐसे विवाहों और धर्म परिवर्तन की भरमार होगी और सभी लोग पुलिस सुरक्षा की मांग करेंगे जो जायज नही है।

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उदय बुलेटिन
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