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बीएचयू में मुस्लिम प्रवक्ता के चयन पर बवाल, असल कहानी ये है

बीएचयू प्रसाशन की गलती और छात्रों को मोहरा बनाया जा रहा।

Shivjeet Tiwari

Shivjeet Tiwari

Summary

भारत मे जेएनयू के फीस मामले के अलावा अगर कोई चीज चर्चा में है तो वह है बनारस के बीएचयू में संस्कृत विभाग में फिरोज खान का चयन, मामला इतना गरमा गया है कि छात्र बड़े-बड़े आंदोलन करने पर आमादा है, दोनो पक्षो के अपने-अपने मामले है जिनको लेकर सब आमने-सामने है।

दरअसल अब यह मामला शिक्षा तक नही बचा है लोगों के अनुसार यह मामला अब धार्मिक हो गया है, बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के संस्कृत विभाग में एक मुस्लिम प्रवक्ता फिरोज खान की नियुक्ति की गई है जिसको लेकर बवाल मचा हुआ है, अब सारा दारोमदार विवि प्रशाशन पर है और प्रसाशन बहुत बड़ी दुविधा में है जिसका कोई निराकरण आता नही दिख रहा है।

संस्कृत से जुड़ा हुआ है परिवार, पिता गाते है भजन :

फिरोज खान के पिता स्थानीय स्तर पर बेहद उम्दा भजन गायकों में जाने जाते हैं, आसपास के इलाके में उनका बड़ा सम्मान है वह खुद मंदिरों में जाकर राधा रानी, श्रीराम, भगवान कृष्ण, और भोलेनाथ के भजन बेहद तन्मयता से साथ गाते हुए नजर आते है, भजन गायकी के साथ-साथ रमजान खान हारमोनियम पर भी अच्छी पकड़ रखते है, जिसके ऊपर तमाम बुद्धिजीवी वर्ग अपनी बात रखते नजर आते है।

वीडियो देखें:

लेकिन आखिरी सवाल , इतना बवाल क्यों है ?

बात किसी मुस्लिम के संस्कृत पढ़ाने को लेकर तो बिल्कुल नहीं है, हालाँकि इस बात को मीडिया संस्थानों और अन्य बुद्धिजीवी वर्ग द्वारा प्रस्तुत किया गया है वह पूरी तरह विद्यार्थियों को एक विलेन समुदाय की तरह प्रस्तुत कर रहा है जबकि असल गलती तो प्रशासन की जिसको वह सहिष्णुता की आड़ लेकर छुपाना चाह रहा है।

अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में कार्यरत संस्कृत विभाग के विभागध्यक्ष प्रो मोहम्मद शरीफ, विश्वविद्यालय के चयनकर्ताओं पर ही उंगली उठाते नजर आते है, उन्होंने बताया कि बनारस विश्वविद्यालय प्रसाशन ने चयन के समय ही गलती कर दी है और विवि के मैनुअल को ध्यान से नही पढ़ा, हालाँकि उन्होंने बताया कि फिरोज खान की नियुक्ति बेहद सही हुई है लेकिन उन्होंने विश्वविद्यालय के पुरातन मूल्यों पर नजर नही डाली, अगर ऐसा होता हो उन्हें संस्कृत विभाग में लगा शिलालेख नजर आता है क्योंकि वहां लिखे शिलालेख में यह विशेष रूप से वर्णित है कि विवि में कर्मकांड केवल हिन्दू ही पढ़ाने के योग्य होगा, तथा जिसे कर्मकांड कराने का अनुभव व ज्ञान हो (कुलमिलाकर बवाल मुस्लिम शिक्षक के संस्कृत पढ़ाने को लेकर नही है , मामला मुस्लिम शिक्षक के द्वारा कर्मकांड कराने को लेकर है)।

प्रो शरीफ ने बताया कि ए एम यू में वर्तमान समय मे नौ शिक्षक है , जिसमे से केवल 2 मुस्लिम शिक्षक है, अन्य सात जिनके जिम्मे कर्मकांड इत्यादि पढ़ाना है वो सभी गैरमुस्लिम है।

गौरतलब हो बीएचयू के संस्कृत विभाग में उपलब्ध शिलापट्ट पर यह विशेष रूप से अंकित है कि संस्कृत कर्मकांड जिसमे पूजा, यज्ञ, मंत्रोजाप, आवाहन, विसर्जन की धार्मिक क्रियाएं होती है वह केवल हिन्दू धर्म का व्यक्ति ही पढ़ा सकेगा, ए एमयू के प्रो शरीफ ने अपने वक्तव्य में यह कहा कि मेरा निजी मंतव्य है कि कर्मकांड पढ़ाने का अधिकार केवल हिन्दुओं का है, वैसे भी मुस्लिमों में मूर्ति पूजा, और अन्य धार्मिक कार्यो का निषेध माना गया है।