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5 घंटे चली सुनवाई के बाद केंद्र सरकार ने माना फ्रांस ने राफेल सौदे का समर्थन करने की कोई ‘स्वायत्त गारंटी’ नहीं दी- SC 

प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई ने कहा, ‘‘हमें यह निर्णय लेना होगा कि क्या कीमतों के तथ्यों को सार्वजनिक किया जाना चाहिए या नहीं।’’

AKANKSHA MISHRA

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नई दिल्ली : सर्वोच्च न्यायालय ने बुधवार को अदालत की निगरानी में फ्रांस की कंपनी दसॉ एविएशन के साथ राफेल लड़ाकू जेट विमान सौदे की जांच की मांग वाली चार याचिकाओं पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया। उच्चतम न्यायालय ने बुधवार को कहा कि राफेल लड़ाकू विमानों की कीमतों पर उसी स्थिति में चर्चा हो सकती है जब इस सौदे के तथ्यों को सार्वजनिक दायरे में आने दिया जाये।

प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई, न्यायमूर्ति संजय किशन कौल और न्यायमूर्ति के एम जोसेफ की पीठ ने फ्रांस से 36 राफेल विमान खरीदने के सौदे की न्यायालय की निगरानी में जांच के लिये दायर याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान यह टिप्पणी की।

चीफ जस्टिस ऑफ़ इंडिया रंजन गोगोई, न्यायमूर्ति संजय किशन कौल और न्यायमूर्ति के. एम. जोसेफ की पीठ ने कहा, "कीमत पर चर्चा तभी होगी जब हम फैसला करेंगे।" महान्यायवादी ने राफेल सौदे की न्यायिक समीक्षा का भी विरोध किया। उन्होंने कहा कि अगर हथियार और विमान की कीमतें सार्वजनिक की जाएंगी तो दुश्मनों को राफेल विमान में लगे हथियारों का पता चल जाएगा।

पीठ ने कहा कि वह वायु सेना की जरूरतों से संबंधित मसले पर सुनवाई कर रही है और वह इस संबंध में रक्षा मंत्रालय के किसी अधिकारी की जगह वायु सेना के अधिकारी को सुनना चाहती है।
प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई ने कहा, ‘‘हमें यह निर्णय लेना होगा कि क्या कीमतों के तथ्यों को सार्वजनिक किया जाना चाहिए या नहीं।’’

पीठ ने अटार्नी जनरल के के वेणुगोपाल से कहा कि तथ्यों को सार्वजनिक किये बगैर इसकी कीमतों पर किसी भी तरह की बहस का सवाल नहीं है। हालांकि, पीठ ने अटार्नी जनरल को स्पष्ट किया कि यदि वह महसूस करेगी कि ये तथ्य सार्वजनिक होने चाहिए, तभी इनकी कीमतों पर बहस के बारे में विचार किया जायेगा।

पीठ ने कहा, ‘‘हम वायु सेना की जरूरतों पर विचार कर रहे हैं और हम राफेल विमान के बारे में वायु सेना के किसी अधिकारी से जानना चाहेंगे। हम इस मुद्दे पर रक्षा मंत्रालय के अधिकारी को नहीं बल्कि वायु सेना के अधिकारी को सुनना चाहते हैं।’’

अटार्नी जनरल ने कहा के. के. वेणुगोपाल, ‘‘मैंने खुद भी इसका अवलोकन नहीं करने का निर्णय किया क्योंकि इसके लीक होने की स्थिति में मेरा कार्यालय इसके लिये जिम्मेदार होगा।’’ उन्होंने कहा कि यह विषय विशेषज्ञों के लिये है और, ‘‘हम लगातार कह रहे हैं कि इन विमानों की पूरी कीमत के बारे में संसद को भी नहीं बताया गया है।’’ 2016 की विनिमय दर के आधार पर सिर्फ लड़ाकू विमान की कीमत 670 करोड़ थी और 'पूरी तरह से सुसज्जित' विमान की कीमत और हथियार सार्वजनिक की जाएंगी तो दुश्मनों को राफेल विमान में लगे हथियारों का पता चल जाएगा।

सुनवाई के दौरान वकील प्रशांत भूषण, पूर्व केंद्रीय मंत्री अरुण शौरी ने 126 विमानों की खरीद (18 उड़ान की स्थिति में और 108 एचएएल द्वारा विनिर्माण) की प्रक्रिया को निरस्त कर 36 जेट विमान पूरी तरह तैयार दशा में खरीदने और एचएएल को ऑफसेट साझेदार के रूप में हटाने की प्रक्रिया को लेकर सवाल किए। याचिकाएं प्रशांत भूषण, अरुण शौरी और पूर्व वित्तमंत्री यशवंत सिन्हा व अन्य द्वारा दायर की गई हैं।