उदय बुलेटिन
www.udaybulletin.com
बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह
बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह|IANS
टॉप न्यूज़

बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह न कहा, सुप्रीम कोर्ट के फैसले ने खोली राहुल की पोल, झूठ की राजनीति करने वालों के मुंह पर तमाचा

प्रशांत भूषण, अरुण शौरी, पूर्व वित्त मंत्री यशवंत सिन्हा, वकील एम.एल.शर्मा, विनीत दांडा और संजय सिंह द्वारा दायर याचिकाओं में अदालत की निगरानी में जांच की मांग की गई थी।

AKANKSHA MISHRA

AKANKSHA MISHRA

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट द्वारा राफेल सौदे पर आये फैसले के बाद भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष अमित शाह ने कांग्रेस पर पलटवार करते हुए कहा है कि राफेल सौदे पर उच्चतम न्यायालय के फैसले से कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के सरकार के खिलाफ दुष्प्रचार अभियान का पर्दाफाश हो गया है।

सुप्रीम कोर्ट का जजमेंट झूठ की राजनीति करने वालों के मुंह पर तमाचा है। श्री अमित ने कहा कि 'मैं सुप्रीम कोर्ट के फैसले का स्वागत करता हूं। सुप्रीम कोर्ट का फैसले से सच की जीत हुई। आजादी के बाद एक कोरे झूठ के आधार पर देश की जनता को गुमराह किया गया। यह प्रयास देश की सबसे पुरानी पार्टी ने किया। कांग्रेस अध्यक्ष ने अपने व पार्टी के फायदे के लिए झूठ की एक नई राजनीति की शुरुआत की।

बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने कहा कि 'सूरज के ऊपर कितना भी कीचड या कितना भी मिटटी उछाल लें वो स्वयं पे ही गिरती है। आगे से राहुल गांधी ऐसे बचकाने आरोप से बचें। अमित शाह ने कहा कि कांग्रेस पार्टी जब-जब सत्ता में रहती है तब तब घोटाले करती है। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी बताएं कि आखिर उनके आरोपों के आधार क्या था? आखिर आपने देश की सुरक्षा को खतरे में क्यों डाला? आखिर आपने किसकी सूचना के आधार पर आरोप लगाए? राफेल खरीद के सम्बन्ध में देश की जनता को गुमराह करने और सेना के बीच में सन्देश पैदा करने के लिए राहुल गांधी को देश की जनता से मांफी मांगनी चाहिए। राहुल गांधी देश की जनता को जवाब दें कि वो किस आधार पर देश की जनता को गुमराह कर रहें थे?

आपको बता दें कि सर्वोच्च न्यायालय ने राफेल विमान सौदा मामले में अदालत की निगरानी में जांच संबंधी याचिकाओं को खारिज करते हुए कहा कि इस सौदे की प्रक्रिया में कुछ भी संदेहजनक नहीं है। अदालत ने कहा कि विमानों की कीमत और राफेल विनिर्माण कंपनी दसॉ द्वारा ऑफसेट साझेदार चुनने की उनकी पसंद पर सवाल करना अदालत का काम नहीं है और पीठ को इस मामले में कुछ भी संदेहजनक नहीं लगा।

अदालत में दायर इन चारों याचिकाओं में 36 राफेल लड़ाकू विमान सौदे की अदालत की निगरानी में जांच की मांग की गई थी। केंद्र सरकार ने इस सौदे का बचाव करते हुए कहा है कि फ्रांस की तरफ से कोई संप्रभु गारंटी नहीं है लेकिन लिखित आश्वासन मिला है।