क्या प्रशांत भूषण खुद गांधी बनने पर तुले हैं? अपराध स्वीकार न करना भी हजारों अपराधों के बराबर होता है

ज्ञात हो कि बीते 14 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट ने प्रशांत भूषण को न्यायालय की अवमानना का दोषी ठहराया था। सुप्रीम कोर्ट ने प्रशांत भूषण को माफी मांगने के लिए कहा था
क्या प्रशांत भूषण खुद गांधी बनने पर तुले हैं? अपराध स्वीकार न करना भी हजारों अपराधों के बराबर होता है
prashant bhushan on scUday Bulletin

पिछले काफी वक्त से वकील प्रशांत भूषण देश मे होने वाली लगभग हर बड़ी गतिविधि को लेकर चर्चा में हैं फिर चाहे वह आतंक के आरोपियों की वक़ालत को लेकर हो या सुप्रीम कोर्ट की अवमानना। लेकिन अब प्रशांत को लेकर देश की सबसे बड़ी अदालत ने अपना पक्ष साफ कर दिया है। लेकिन वकील प्रशांत भूषण खुद को गांधी के समकक्ष रखकर माफी मांगने से इनकार कर रहे हैं।

क्या है मामला:

पेशे से वकील और देश की अंदरूनी और बाहरी मामलों में हर बार खुद को पेश करने वाले वकील है। बीते समय मे वकील प्रशांत भूषण ने जस्टिस बोबडे और सुप्रीम कोर्ट के खिलाफ कुछ ऐसे शब्दों का प्रयोग किया जिसके बाद से एक नई बहस छिड़ गई जिसमें यह चर्चा होने लगी कि क्या सुप्रीम कोर्ट के जज की कोई हैसियत भी है या नहीं। लोगों ने आरोप लगाए की सुप्रीमकोर्ट के निर्णय और निर्णय देने वाले जजों के ऊपर कमेंट करने के स्तर की समीक्षा की बात होने लगी। बात आगे बढ़ी तो वकील प्रशांत भूषण को अदालत में चुनौती दी गयी जहा पर प्रशांत को आरोपी के साथ-साथ अवमानना का दोषी माना गया और अदालत में अपना पक्ष रखकर माफी मांगने की बात कही गयी। लेकिन उसके बाद से ही प्रशांत भूषण को एक बहुत बड़े संगठित गिरोह द्वारा समर्थन देकर अडिग बनाया जा रहा है। मीडिया संगठनों समेत सोशल मीडिया पर प्रशांत भूषण को एक हीरो की तरह पेश किया जा रहा है, मजे की बात यह है ये चलन भी उन्हीं लोगों के द्वारा चलाया जा रहा है जो कल तक सुप्रीम कोर्ट की बातों को लेकर अपना विश्वास अडिग बताते रहे हैं।

प्रशांत भूषण खुद को महात्मा गांधी की तरह दिखाने पर तुले हैं।

अब अगर सुप्रीम कोर्ट की अनसुनी तो फिर क्या है?

अगर ताजा हालात को देखा जाए तो वकील प्रशांत भूषण अदालत में दोषी करार दिए जा चुके है लेकिन प्रशांत ने देश की सर्वोच्च अदालत में अपना पक्ष बताते हुए माफी मांगने से इनकार कर दिया है। लेकिन माफी न मांगने के बाद से ही एक नया सवाल उठता है कि अगर प्रशांत भूषण को देश की सर्वोच्च अदालत के फैसले में अविश्वास होता है अथवा उनकी अवमानना की जाती है तो इसका परिणाम काफी दुष्प्रभावी साबित हो सकता है। लोगों के हिसाब से देश मे एक चलन हो जाएगा जिसमे कोई भी व्यक्ति किसी पर निजी हमले करके अदालत के निर्देशों और आदेशों को नकार सकता है।

पहले भी मांग चुके हैं माफी:

ऐसा नहीं कि वकील प्रशांत भूषण पहली बार इस तरह के मामले में सामने आये है बल्कि इससे पहले भी वकील प्रशांत भूषण अपनी जुबान और ट्विटर पर काबू नहीं रख पाए हैं। इससे पहले भी प्रशांत अपनी हरकतों की वजह से अदालत में माफी मांग चुके है।

लोगों ने प्रशांत को माफीवीर तक करार दिया है।

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उदय बुलेटिन
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