जिन्होंने राम के अस्तित्व को ही नकार दिया, आज वोट बैंक की वजह से उन्हें राम का महिमामंडन करते देखा जा रहा है

राम को काल्पनिक बताने वाले भी आज राम की महिमा का गुणगान कर रहे हैं।
जिन्होंने राम के अस्तित्व को ही नकार दिया, आज वोट बैंक की वजह से उन्हें राम का महिमामंडन करते देखा जा रहा है
Congress on shree ramSocial Media

अगर भारत के इतिहास और संस्कृति को देखा जाए तो इसके हर पहलू में राम ही राम रचे और बसे हैं, लेकिन विगत वर्षों की राजनीतिक माहौल पर नजर डाली जाए तो इसमें राम का इतना अनादर हुआ कि शायद दुनिया के किसी देश मे नहीं हुआ होगा भले ही वहां दूसरे धर्मों की बहुलता हो लेकिन अब वक्त बदल रहा है। मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम अब कई सौ वर्षों के लंबे वनवास के बाद अपने महल में विराजने जा रहे है ऐसे वक्त में ऐसे लोग भी राम भक्ति का राग अलाप रहे है जिन्होंने राम के अस्तित्व को ही नहीं स्वीकारा।

रामसेतु और मर्यादा पुरुषोत्तम:

अब अगर राम सेतु का नाम आता है तो जाहिर सी बात है कि उसमे राम के पराक्रम और धैर्य की बात होना लाजिमी है। दरअसल दक्षिण भारत के रामेश्वरम में भगवान राम ने पत्नी माता सीता की खोज के लिए वनवासी वानरों और अन्य वंचितों की मदद से व्यापक खोज अभियान चलाया था और अंत मे पता चलने पर रावण की दुष्टता को दंड देने के लिए लंका तक पहुंचना आवश्यक था लेकिन मार्ग में अथाह सागर श्री राम के दृढ़ संकल्प को लगातार चुनौती दे रहा था। श्री राम ने अनुनय विनय के बाद स्वयं समुद्र की अनुशंसा पर महान शिल्पियों नल और नील की मदद से सागर पर तब तक का सबसे बड़ा सेतु बांध दिया इसे विश्व मे प्रथम मानव निर्मित ब्रिज अर्थात एडम ब्रिज के नाम से भी जाना जाता है।

कांग्रेस शासन और रामसेतु:

वर्ष 2013 का साल, जब तत्कालीन सरकार ने देश के व्यवसायिक लाभ के लिए रामसेतु को तोड़ने के निर्देश जारी किए इस पर देशभर में विरोध की आवाजें उठने लगी खासकर संघ ने इस पर देश भर में इस जनजागरण के लिए लोगों को समझाया और मामला सुप्रीम कोर्ट भी पहुँच गया जहाँ पर कोर्ट ने सरकार से स्पष्टीकरण की मांग की जिसमे तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने कोर्ट में एक हलफनामा पेश किया था। जिसमे कांग्रेस द्वारा यह कहा गया था कि भारत के किसी स्थान पर राम के जन्म और उनके निवास अथवा होने का प्रमाण मौजूद नहीं है यह मात्र कुछ कोरी कल्पनाओं का समिश्रण है जिसकी वजह से लोगों ने इस मामले में कोरी आस्थाएं जोड़ रखी है। हालांकि बाद में कोर्ट ने इस पर अपना फैसला सुनाया और रामसेतु के तोड़ने को लेकर सारी क्रिया कलाप बंद कर दी गयी। हालांकि यह पहला मामला नहीं है बल्कि इसके साथ-साथ महिला कांग्रेस नेता द्वारा भी राम के अस्तित्व पर उंगली उठाई गयी थी जिसकी वजह से उन्हें देश भर में आलोचनाओं का सामना करना पड़ा था।

अब झलका कांग्रेस का राम प्रेम:

अब जबकि पांच अगस्त को प्रधानमंत्री मोदी द्वारा अयोध्या में भावी भव्य राम मंदिर का भूमि पूजन और नींव रखी चुकी है उसके ठीक एक दिन पहले कांग्रेस की जनरल सेक्रेटरी प्रियंका गांधी वाड्रा के द्वारा राम के चरित्र को अपनी नजर से दर्शाया गया है जिसमे प्रियंका गांधी राम के व्यापक चरित्र जिसमें हर वर्ग समुदाय जाति को आपस मे जोड़कर रखने की क्षमता को बताया गया है।

प्रियंका गाँधी वाड्रा का वक्तव्य:

हालांकि इस वक्तव्य के बाद लोगों ने अपनी अपनी सुविधानुसार कांग्रेस महासचिव को खरी खोटी सुनाने से परहेज नहीं रखा, लोगों ने कांग्रेस के दोगलेपन को लेकर निशाना साधा।

कुछ लोगों ने इसे यूटर्न बताया:

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उदय बुलेटिन
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