राम मंदिर के लिए भारत के राष्ट्रपति ने दिया दान, सोशल मीडिया पर बना चर्चा का विषय

राष्ट्रपति कोविंद ने दान किए 5 लाख 100 रुपए, अयोध्या में श्री राम मंदिर के लिए राष्ट्रव्यापी फंड कलेक्शन अभियान की हुई शुरुआत
राम मंदिर के लिए भारत के राष्ट्रपति ने दिया दान, सोशल मीडिया पर बना चर्चा का विषय
राष्ट्रपति कोविंद ने दान किए 5 लाख 100 रुपएGoogle Image

राम मंदिर केवल एक मंदिर की भूमिका में नही है बल्कि यह राष्ट्र की आस्था का पूरक बनता जा रहा है, मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम के मंदिर पुनः निर्माण ले अवसर पर देश के कोने कोने से धन समर्पण कार्यक्रम को बल मिल रहा है। इसी क्रम में भारत के राष्ट्रपति श्री राम नाथ कोविंद ने पांच लाख एक सौ रुपये दान में दिये।

जन जन के राम को मिल रहा सबका सहयोग:

श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र के तत्वाधान में पूरे देश मे यह मुहिम चलाई जा रही है कि राम लला के मंदिर निर्माण में ज्यादा से ज्यादा आर्थिक सहयोग आम व्यक्तियों से शामिल हो, ऐसे वक्त में आम आदमी के साथ साथ देश के गणमान्य लोगों के द्वारा भी आर्थिक सहयोग मिलना शुरू हो गया है, इस क्रम में भारत के प्रधानमंत्री श्री रामनाथ कोविंद के द्वारा श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को पांच लाख एक सौ रुपये का दान उपलब्ध कराया गया है, इस दान को श्री राम नाथ कोविंद ने अपने निजी एसबीआई के संसद भवन शाखा के द्वारा जारी की गई चेक के माध्यम से कराया गया है।

ट्रस्ट पहले कर चुका है घोषणा, सरकारी अनुदान से नही बनेगा मंदिर:

मंदिर निर्माण के लिए श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट अपने बयान में पहले ही निर्णय कर चुका है कि उसका पहला उद्देश्य है कि वह पहले मर्यादा पुरूषोत्तम श्री राम के भक्तों के दिये गए समर्पण से भव्य निर्माण कराएगा। अगर आवश्यकता पड़ती है तो वह धनाढ्य धर्मावलंबियों से इस बारे में बात करेगा। हालाँकि अगर कोई भक्त आकर अपनी तरफ से मंदिर निर्माण में सहयोग की पहल करता है तो उसे मना नही किया जाएगा।

राष्ट्रपति के दान के बाद मीडिया के एक धड़े ने उठाये सवाल:

हालांकि भारत के मीडिया में से एक धड़े ने इस दान को भी अलग नजर से देखना शुरू कर दिया है। एनडीटीवी ने अपनी पोस्ट में बाकायदा यह लिखकर अपना विरोध जाहिर किया कि आखिर राष्ट्रपति को दान करने की क्या जरूरत थी ? एनडीटीवी के अनुसार अगर राष्ट्रपति की भगवान राम पर आस्था थी तो उन्हें यह दान गुपचुप तरीके से देना चाहिए था। हालाँकि समाचार सेवा प्रदाता का तर्क और बयान कितना सही है इसका अंदाजा सेवा प्रदाता के ट्वीट में दिए गए जवाबों से पता चलता है। लोगों ने एनडीटीवी के तर्को को उसी की भाषा मे जवाब दिए है। लोगों के द्वारा बताया गया कि जब राष्ट्रपति भवन में रोजा इफ्तार पार्टी सरकारी खर्चे से दी जाती है तब भारत की अखंडता खंडित नही होती लेकिन अगर राष्ट्रपति अपने निजी पैसों को दान देता है तो सहिष्णुता खतरे में आजाती है।

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उदय बुलेटिन
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