फ्रांस में हुई घटना का महशूर शायर मुनव्वर राणा ने किया समर्थन, कहा मैं भी होता तो यही करता

कट्टरता और आतंकवाद का समर्थन करते है मुनव्वर राणा
फ्रांस में हुई घटना का महशूर शायर मुनव्वर राणा ने किया समर्थन, कहा मैं भी होता तो यही करता
munawwar ranaGoogle Image

माँ पर कविता करने वाला शायर कत्ल करने को जायज बता रहा है, हालांकि अपने बयान के बाद मुनव्वर राणा अपने बयान को अलग तरीके से जस्टिफाई करते नजर आए लेकिन बातों को कितना भी घुमा फिरा लिया जाए लेकिन किसी भी कत्ल को जायज करार नहीं किया जा सकता।

मुनव्वर ने कहा मैं होता तो यही करता:

बीते दिनों से फ्रांस में हुई घटनाओं और उसके बाद हुई प्रतिक्रियाओं को लेकर पूरे विश्व मे चर्चाएं हो रही है, तुर्की और पाकिस्तान दुनियाभर में मुस्लिम समुदाय का खलीफा बनकर फ्रांस का विरोध कर रहे है। इसकी जांच भारत मे भी मुस्लिम धर्मावलंबियों के पास तक पहुँच चुकी है, भारत मे भी फ्रांस के विरोध के लिए जमीन स्तर पर विरोध प्रदर्शन किया जा रहा है, इस दौरान जी टीवी ने देश के जाने माने शायर मुनव्वर राणा से इस मामले पर उनके विचार जानने का प्रयास किया, इस इंटरव्यू में मुनव्वर राणा ने बेहद तफलीश से इस मामले पर बात की, इस दौरान राणा ने अपने बयान में इस बात को उजागर किया कि फ्रांस में जो हुआ वो पूरी तरह से एक्शन के विरोध में रिएक्शन था, किसी को अधिकार नही है कि उनके नबी की शान में गुस्ताखी करे।

मुनव्वर ने कहा कि दुनिया मे किसी को अधिकार नही की कोई भी व्यक्ति हमारे माँ, बाप, देवी, देवता, पुरोधाओं के बारे में कोई आपत्तिजनक टिप्पणी करे, या उनके अश्लीलता से भरे चित्र बनाये, अगर ऐसा होता है तो उनका प्रतिकार बेहद आवश्यक है, जब जी टीवी के पत्रकार ने इस बात पर जोर दिया कि कंर्टून दिखाए जाने के बाद शिक्षक की हत्या कर दी गयी और उसके बाद फ्रांस में ही चर्च के बाहर महिला की हत्या अल्लाह हू अकबर कहकर सिर कलम कर दिया गया। इस तरह की हत्याएं कैसे जस्टिफाई की जा सकती है ?

इस पर मुनव्वर राणा ने साफ-साफ शब्दों में कहा कि न सिर्फ यह जायज है बल्कि अगर "उसकी जगह मैं होता तो मैं भी यही करता" कहने का तात्पर्य यह कि मुनव्वर राणा ने साफ-साफ शब्दों में यह कह दिया कि अगर कोई मामला उसके सामने पेश आएगा तो वह भी कत्ल करने का जोखिम उठा लेंगे।

मुनव्वर ने दिए अपने तर्क:

हालांकि इस मामले पर मुनव्वर ने बताया कि किसी की भावनाओं और आस्थाओं के साथ खेलने का अधिकार किसी भी व्यक्ति को नही है, किसी भी धर्म समुदाय के पुरोधाओं से बदतमीजी नही की जा सकती, इस मामले में मुनव्वर ने माता सीता समेत अन्य देवी देवताओं का नाम भी उल्लेख किया लेकिन मजे की बात यह रही कि ओवैसी बंधुओ द्वारा माता सीता के खिलाफ प्रयोग किये गए शब्दों को भूल गए।

वहीँ कलाकारी के नाम पर देवी देवताओं के नग्न चित्र बनाने वाले आर्टिस्ट मकबूल फिदा हुसैन की कलाकारी को मुनव्वर द्वारा नकार दिया गया।

कुलमिलाकर अगर देखा जाए तो मुनव्वर अपने लहजे में यह बताने की कोशिश करते रहे कि हर हालत में फ्रांस में हिंसा करने वाले लोग अपने जायज ट्रेक पर है, हालांकि उनके इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर मुनव्वर की फजीहत होने लगी ,इसपर भी मुनव्वर की तरफ से कोई जवाब नहीं आया है, लोग मुनव्वर को भी फ्रांस के कट्टरपंथी की तरह तौलते हुए नजर आये।

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उदय बुलेटिन
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