पीएम मोदी का साड़ी ज्ञान, महिलाओं को अचंभित कर गया

पीएम मोदी ने बताया साड़ी पहनने में उलटे पल्लू की शुरुआत कैसे हुई
पीएम मोदी का साड़ी ज्ञान, महिलाओं को अचंभित कर गया
पीएम मोदी ने बताया साड़ी पहनने में उलटे पल्लू की शुरुआत कैसे हुई Google Image

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ऊपर हमेशा से उनकी पत्नी को छोड़ने को लेकर आरोप लगाए जाते रहे है लेकिन प्रधानमंत्री का महिलाओं के परिधान साड़ी पर पक्का वाला ज्ञान सुनकर बड़े बड़े मठाधीश सकते में है। दरअसल मोदी ने महिलाओं के बीच मे बेहद चर्चित उल्टे पल्ले की साड़ी के पहनने से लेकर रोचक खुलासे किये और तथ्य भी ऐसे थे कि लोग बिना मुस्कुराए नही रह सके।

पीएम ने बताया उल्टे पल्लू की साड़ी का रहस्य:

अगर आप उत्तर भारत के निवासी है और नारी परिधान में रुचि रखते है तो आपको जानकारी होनी चाहिए कि साड़ी पहनने के मुख्यतः दो तरीके प्रचलन में है। पहला सीधा पल्ला, दूसरा उल्टा पल्ला, हालांकि दोनों तरीके साड़ी को महिला के इर्द गिर्द लपेटने से जुड़ा हुआ है लेकिन उल्टा पल्ला महिला के पहनावे को थोड़ा सा ज्यादा फैशन वाला बना देता है। लेकिन भला प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का इस पल्ले से क्या वास्ता, प्रधानमंत्री का ही क्यों ? किसी भी पुरुष का इस उलटे सीधे पल्ले से क्या वास्ता लेकिन अगर पुराने ट्रैक को देखे तो नरेन्द्र मोदी तथ्यों को लेकर जाने जाते हैं। हालाँकि ऐसा नही है कि उनके तथ्य हमेशा सही ही होते हो लेकिन इस बार जो उन्होंने साड़ी ज्ञान दिया है वो बेहद पक्का है और पक्का ही नही बेहद रोचक है हो सकता है भविष्य के किसी कंपटीशन के एग्जाम में इस तरह का सवाल खड़ा हो जाये कि भारत मे इस तरह के उल्टे पल्ले की साड़ी बांधने की शुरुआत किसने की थी?

मौका भी था और दस्तूर भी:

मामला विश्व भारती विश्वविद्यालय के शताब्दी कार्यक्रम से जुड़ा हुआ है जहां के कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने महिलाओं द्वारा पहनी जाने वाली सर्वसुलभ परिधान साड़ी के उल्टे पल्ले का रहस्य खोला, प्रधानमंत्री ने बताया कि दरअसल इस तरह की साड़ी पहनने की शुरुआत रवींद्रनाथ टैगोर के परिवार में शुरू हुई, आपको शायद जानकारी होगी कि रवींद्रनाथ टैगोर जी के बड़े भाई थे सत्येन्द्रनाथ टैगोर, देश के पहले आईसीएस (इंडियन सिविल सर्विसेज) जिसे अब आईएएस ( इंडियन एडमिनिस्ट्रेटिव सर्विसेज) कहा जाता है उनकी पत्नी ज्ञानन्दनी देवी ने आस पास की महिलाओं को बाए कंधे से साड़ी को बांधना सिखाया था।

क्यों हुई उल्टे पल्ले की शुरुआत:

पुरानी कहावत है कि आवश्यकता आविष्कार की जननी है, सो यह चलन भी आवश्यकता से उत्पन्न हुआ दरअसल जिस वक्त सतेन्द्र नाथ गुजरात के अहमदाबाद में तैनात थे उसी वक्त उनकी पत्नी उनके साथ गुजरात प्रवास कर रही थी। ऐसे वक्त में उनका मिलना स्थानीय महिलाओं से होता रहता था जो कि घरेलू महिलाएं थी। उन्हें पारंपरिक तरीके से साड़ी पहनकर काम करने में समस्या होती थी इसलिए ज्ञानन्दनी देवी ने उन्हें बाए कंधे पर साड़ी बांधने का सुझाव दिया। जो बादः में अपनी सहजता और साड़ी बांधने के अलग ढंग से बेहद प्रचलित हुआ, हालांकि इस तथ्य के बारे में कोई प्रामाणिक तथ्य तो उपलब्ध नही है लेकिन लोगों के द्वारा इस तथ्य पर विश्वास की मुहर लगाई जाती है।

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उदय बुलेटिन
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