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इनके गीतों की वजह से PM Modi को मिली थी वाराणसी में जीत, अब अपनी उपेक्षा से व्यथित हैं 

हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत के प्रख्यात गायक पं. छन्नूलाल मिश्र केंद्र और राज्य की मौजूदा सरकारों की उपेक्षा से काफी व्यथित हैं।

AKANKSHA MISHRA

AKANKSHA MISHRA

2014 में प्रधानमंत्री मोदी ने वाराणसी और अपने गृह राज्य वडोदरा से लोकसभा चुनाव लड़ा था और दोनों ही जगहों से जीत हासिल की थी। लेकिन अब प्रधानमंत्री मोदी कि जीत के सूत्रधार दुखी हैं, सरकार द्वारा उन्हें उपेक्षित महसूस कराया जा रहा हैं। वे ये भी नहीं जानते कि वे इस बार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रस्तावक बनेंगे या नहीं।

स्वच्छ भारत मिशन के लिए प्रधानमंत्री मोदी द्वारा नियुक्त नवरत्नों में से एक और शास्त्रीय संगीत के प्रख्यात गायक पं. छन्नूलाल मिश्र मोदी सरकार द्वारा की गई उपेक्षा से काफी व्यथित हैं। उन्हें और वाराणसी के लोगों को उम्मीद थी कि इस बार उन्हें भारत रत्न मिल सकता है, लेकिन जब पुरस्कारों की घोषणा हुई तो उनका नाम न तो भारत रत्न की सूची में था, और न पद्मविभूषण की सूची में ही।

उनका कहना है कि, जो अभी भी संगीत के लिए पूरी तरह समर्पित है, और पूरा जीवन संगीत के लिए समर्पित करने के बावजूद केंद्र और राज्य की मौजूदा सरकारों ने उन्हें वह सम्मान नहीं दिया, जो उन्हें मिलना चाहिए था।

वाराणसी में जीत के बाद दोबारा नहीं मिले मोदी

मिश्र ने कहा, नरेंद्र मोदी पिछले चुनाव में मेरे पास आए थे। वह ईमानदार आदमी लगे थे। उन्होंने प्रस्तावक बनने के लिए कहा, मैंने स्वीकार कर लिया था। मैंने उनके लिए गाना बनाकर गाया, लोगों ने उन्हें वोट दिया और वह जीत गए। इस बार क्या होगा अभी कुछ तय नहीं है। समय आएगा, जब वह आएंगे, तब देखा जाएगा।"

प्रधानमंत्री मोदी को दोबारा समर्थन करेंगे, उनका प्रस्तावक बनना चाहेंगे, या किसी दूसरी पार्टी का समर्थन करेंगे?" इस सवाल पर मिश्र कहते हैं, यह सवाल राजनीतिक है। मैं कलाकार हूं। मेरे लिए सभी पार्टियां समान हैं। मेरे पास जो भी आएगा, उसका स्वागत है। वाराणसी में "सड़क, बिजली-पानी की व्यवस्था ठीक हो गई है। साफ-सफाई भी है, पहले 10 बजे तक झाड़ू नहीं लगता था, अब सुबह पांच बजे ही झाड़ू लग जाता है। बाकी चुनाव में क्या होगा, राम जाने।"

शीला दीक्षित और पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह संगीत के कद्रदान

मिश्र ने कहा, "दिल्ली की मुख्यमंत्री शीला दीक्षित संगीत की बहुत प्रेमी और कद्रदान थीं। उस समय के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह भी संगीत के कद्रदान थे। दिल्ली में मैंने उनके सामने गाया था। उन्होंने पद्मभूषण की अनुशंसा कर दी, और मिल गया। अच्छा लगा था। मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने भी यश भारती पुरस्कार दिया था। मैंने उनसे कलाकारों को पेंशन देने के लिए कहा, अखिलेश ने 50,000 हजार रुपये पेंशन सभी कलाकारों के लिए शुरू कर दी थी। लेकिन नई सरकार आई तो पेंशन भी बंद हो गया। मैंने योगी आदित्यनाथ से कहा तो उन्होंने 25,000 रुपये पेंशन शुरू की, लेकिन अब मैं उसे भी नहीं लेता हूं।"

बता दें कि छन्नूलाल को 2010 में मनमोहन सरकार ने पद्मभूषण से नवाजा था।