PM Modi on IMA
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प्रधानमंत्री से फार्मा कंपनियों और डॉक्टरों के मामले में माफी की मांग रखना बेहद बेतुका है, मामला लॉबी से जुड़ा हुआ है। 

फार्मा कम्पनीज और डॉक्टर दोनों मिलकर मरीज को बेबकूफ बनाते हैं।

Shivjeet Tiwari

Shivjeet Tiwari

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कुछ मामले ऐसे है जिन पर हाँथ डालना मधुमक्खी के छत्ते पर हाँथ डालने जैसा है क्योंकि इसके बाद जो बवाल काटा जाता है उसकी कल्पना बेहद भयावह है, क्योंकि इन लोगों ने लोगों की कमजोरियों को ही अपना बाजार बना रखा है, वो इस चीज को जान चुके हैं कि लोग चाहकर भी इस मुद्दे पर उनसे बहस नहीं करेंगे।

आपको कुछ वाकये याद करने चाहिए, निश्चित तौर पर आप कभी न कभी हाल में ही हॉस्पिटलाइज हुए होंगे तो जाहिर तौर पर डॉक्टर साहब ने आपके इलाज में लंबी चौड़ी दवाओं की लिस्ट सौपी होगी, लेकिन क्या आपने कभी गौर किया है कि ये इलाज की दवाओं में करीब 30 से 40 फीसदी दवाएं आपकी उक्त बीमारी में कोई इलाज ही नहीं करती बल्कि इनका काम पैसा बटोरना होता है। उदाहरण के तौर पर अगर आप पैर में दर्द की शिकायत लेकर डॉक्टर के पास जाते है और डॉक्टर साहब आपको आपकी बीमारी की दवाओं के साथ गैस की दवाएं भी देंगे, और मजे की बात तो यह है कि इन दवाओं का मूल्य अपने समान साल्ट वाली दवाओं से करीब दो से तीन गुना होता है।

आखिर प्रधानमंत्री ने कह क्या दिया :

दरअसल प्रधानमंत्री मोदी ने बीते दिनों फार्मा कंपनियों के सेमिनार को संबोधित किया था। जिसमे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक चुभती हुई कड़वी बात कह दी जिसका सार यह था कि दवाओं की बिक्री ज्यादा कराने के लिए फार्मा कंपनियों के द्वारा दवा प्रिस्क्राइब करने वाले डॉक्टरों के लिए नकद रिश्वत, गिफ्ट, विदेशी दौरे और महिला प्रलोभन दिए जाने के संदर्भ को दर्शाया था। बस यही बात बवाल काटे हुए है, इस मामले को लेकर इंडियन मेडिकल एसोसिएशन ( IMA) ने बाकायदा प्रधानमंत्री को चिट्ठी लिखी है और इस सेमिनार में हुई बातों को लेकर स्पस्टीकरण मांगा है और साथ मे यह भी उल्लेख किया है कि अगर प्रधानमंत्री मोदी के द्वारा इस तरह की बात रखी गयी है तो उन्हें इस पर माफी मांगनी चाहिए।

लेकिन सच्चाई क्या है ?

देखिए सच्चाई तो यही है जिसके संदर्भ में बाते कही गयी है, दरअसल पिछले समय मे डॉक्टरों को दवा लिखने के एवज में फ्रिज, एसी, और अन्य उपहारों से नवाजा जाता था लेकिन सरकारों के कड़े निर्देशों के बाद इस पर आंशिक अंकुश लगाए जाने पर फार्मा कंपनियों और रिश्वत खोर लॉबी द्वारा इसके कई तोड़ निकाल लिए गए।

फिर हुआ लालच और रिश्वत का नंगानाच :

नाम न छापने की शर्त पर एक नामी गिरामी फार्मा कंपनी के मेडिकल रिप्रेजेंटेटिव ने यह बताया कि पुरानी रिश्वत बदस्तूर जारी है बस उसका स्वरूप बदल गया है, फार्मा कंपनियों द्वारा बड़े अस्पतालों की डिमांड पर एक ही दवा के दो मूल्य प्रिंट और डॉक्टरों के लिए विदेश टूर जैसे मामलों का बहाना बनाकर पैसे का बंदरबांट किया जाता है, यही टूर के दौरान औरत पेशगी जैसे कुकृत्य को अंजाम दिया जाता है, हालांकि ये काम इतनी शातिराना तरीके से होता है कि बाहर किसी को इसकी भनक न लग पाए।

सिर्फ इतने इल्जाम काफी नही है :

किसी मृत पेशेंट को परिजनों के बिना बताए वेंटिलेटर पर रखकर लंबे समय तक पैसे ऐंठना, बेवजह रक्त जांच, और तमाम प्रकार के ऐसे आरोप है जिनकी कभी जांच ही नही होती, और इसकी वजह है सरकार और सम्बंधित अधिकारियों पर इन माफियाओं पर भरपूर दबाव, क्योंकि कोई भी अधिकारी और नेता इस लाबी को हाँथ लगाकर अपना कैरियर बर्बाद नहीं करना चाहता।

  • डिस्क्लेमर: इस आर्टिकल में ने अपने निजी विचार रखे है, आप हमें बताईये आपकी इस बारे में क्या राय है।

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उदय बुलेटिन
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