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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इंडियन साइंस कांग्रेस में 
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इंडियन साइंस कांग्रेस में |Twitter
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उन्नत भारत बनाने के लिए आज भारत के विज्ञान को महत्वाकांक्षी बनना होगा - पीएम मोदी 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इंडियन साइंस कांग्रेस (आईएससी) के 106वें सत्र के उद्घाटन पर ‘भविष्य का भारत : विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी’ विषय पर बोल रहे हैं। 

AKANKSHA MISHRA

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चंडीगढ़: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Modi) इंडियन साइंस कांग्रेस (आईएससी) के 106वें सत्र के उद्घाटन के लिए आज चंडीगढ़ में हैं। जहां प्रधानमंत्री मोदी (PM Modi) ‘भविष्य का भारत : विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी’ ('Future of India: science and technology') विषय पर बोल रहे थे।

प्रधानमंत्री (PM Modi) ने कहा कि भारतीय वैज्ञानिकों का जीवन और कार्य प्रौद्योगिकी विकास तथा राष्ट्र निर्माण के साथ गहरी मौलिक अंतदृर्ष्टि के एकीकरण का शानदार उदाहरण है। उन्होंने कहा, ‘‘आज का नया नारा है- जय जवान, जय किसान, जय विज्ञान, जय अनुसंधान। मैं इसमें जय अनुसंधान जोड़ना चाहूंगा।’’

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पूर्व प्रधानमंत्री दिवंगत लाल बहादुर शास्त्री के प्रसिद्ध नारे ‘जय जवान जय किसान’ और पूर्व प्रधानमंत्री दिवंगत अटल बिहारी वाजपेयी के नारे ‘जय विज्ञान’ में ‘जय अनुसंधान’ जोड़ दिया है ।

प्रधानमंत्री ने कहा 'हमने कृषि विज्ञान में काफी प्रगति की है, हमारे यहां पैदावार, गुणवत्ता बढ़ी है लेकिन न्यू इंडिया की जरुरतों को पूरा के लिए विस्तार की ज़रूरत है। Big Data, AI, Blockchain से जुड़ी तमाम टेक्नॉलॉजी का कम कीमत में कारगर इस्तेमाल खेती में कैसे हो इस पर हमारा फोकस होना चाहिए।

उन्होंने कहा कि, 'यह विज्ञान ही है जिसके माध्यम से भारत अपने वर्तमान को बदल रहा है और अपने भविष्य को सुरक्षित रखने के लिए कार्य कर रहा है।'

प्रधानमंत्री ने कहा, ‘‘भारतीय विज्ञान के लिए 2018 एक अच्छा वर्ष रहा। इस साल हमारी उपलब्धियों में उड्डयन श्रेणी के जैव ईंधन का उत्पादन, दृष्टिबाधितों के पढ़ने में मदद करने वाली मशीन -दिव्य नयन, सर्वाइकल कैंसर, टी बी, डेंगू के निदान के लिए किफायती उपकरणों का निर्माण और भूस्खलन के संबंध में सही समय पर चेतावनी प्रणाली जैसी चीजें शामिल हैं।’’

प्रधानमंत्री ने कहा 'उन्नत भारत बनाने के लिए आज भारत के विज्ञान को महत्वाकांक्षी बनना होगा। हमें सिर्फ प्रतिस्पर्धा नहीं करनी, हमें श्रेष्ठता दिखानी होगी। हमें सिर्फ रीसर्च करने के लिए रीसर्च नहीं करनी है बल्कि अपनी Findings को उस स्तर पर ले जाना है जिससे दुनिया उसके पीछे चले। किसी भी देश की इंटेलेक्चुअल (Intellectual), क्रिएटिविटी (Creativity) और आइडेंटिटी (Identity) उसके इतिहास, कला, भाषा और संस्कृति से बनती है। ऐसे में हमें विधाओं के बंधन से मुक्त होकर शोध करना होगा। अब ऐसी रीसर्च की जरुरत है जिसमें Arts और Humanities, सोशल साइंस, साइंस और टेक्नोल़ॉजी के Innovation का Fusion हो।