बुंदेलखंड राज्य की सुगबुगाहट, उठने लगे राजधानी को लेकर विरोध

बुंदलेखंड को अलग राज्य बनाने की मांग लगातार तेज होती जा रही है और कयास लगाए जा रहे है कि सरकार प्रयागराज को बुंदेलखंड की राजधानी बनाने के प्रयास में है।
बुंदेलखंड राज्य की सुगबुगाहट, उठने लगे राजधानी को लेकर विरोध
बुंदलेखंड राज्य की अनवरत मांग करने वाले सामाजिक कार्यकर्ता तारा पाटकार महोबाउदय बुलेटिन

विकास की राह से भटका हुआ वह भूभाग जिसने अपने संसदीय क्षेत्र से प्रधानमंत्री तक दिए लेकिन हर बार सरकारों ने इस क्षेत्र को विकाश और इसकी आहटो से दूर रखा हालांकि लंबे वक्त से लंबित मांग अब सरकार द्वारा पूरी करने की कवायद शुरू की जा रही है लेकिन इस कवायद के साथ ही राजधानी को लेकर लोग आक्रोश में है।

दरसअल सरकार की मंशा है कि वह प्रयागराज को बुंदेलखंड की राजधानी बनाये मगर लोगों का कहना है कि अगर ऐसा होता है तो पहले से ही विकसित प्रयागराज क्षेत्र पर तो सरकारी कृपा बरसेगी लेकिन कोर बुंदेलखंड का क्या होगा ?

सत्ता में सुगबुगाहट, नया राज्य बनेगा:

अगर सूत्रों की माने तो अब वह दिन दूर नहीं जब भारत मे नए राज्य का गठन किया जाएगा। जल्द ही भारत मे एक नए राज्य बुंदेलखंड की अवधारणा को मूर्त रूप दिया जा सकता है। जिसके लिए कई दशकों से लगातार मांग और आंदोलन इत्यादि चल रहे थे हालांकि इसमें कई पेच है लेकिन इन पेंचों के बावजूद भी मध्यप्रदेश और उत्तर प्रदेश के साथ केंद्र में भारतीय जनता पार्टी की सरकार है इससे यह समझ मे आता है कि अगर सरकारे चाहे की राज्य का गठन हुआ है तो ऐसी कोई बड़ी मुश्किल नहीं है।

मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के जिले मिलकर बनेंगे नया राज्य:

उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश का ऐसा भूभाग जो पूर्व में बुंदेली शासन में रहे या दूसरे शब्दों में ऐसा क्षेत्र जो बुंदेला राज्य में रहा वह बुंदेलखंड में माना जाता है हालांकि सरकारी बुंदेलखंड और लोगों द्वारा स्वघोषित बुंदेलखंड में काफी अंतर है दरअसल मूल रूप से लोगों द्वारा यह माना जाता है कि उत्तर प्रदेश-मध्यप्रदेश का एक निर्धारित क्षेत्र है जिसमे संस्कृति, भाषा, संस्कार, रहन सहन के साथ-साथ वैवाहिक सम्बंध बनते है वह बुंदेलखंड है अगर इस दृष्टि से देखे तो उत्तर प्रदेश के महोबा, बाँदा, झांसी, ललितपुर, जालौन, चित्रकूट और हमीरपुर शामिल है।

वहीं मध्यप्रदेश से छतरपुर, पन्ना, सागर, विदिशा, टीकमगढ़, दमोह, दतिया, भिंड, सतना इत्यादि जिले शामिल है। इन सभी क्षेत्रों में भाषायी समानता के साथ-साथ संस्कृति का भी बेहद मिला जुला रूप नजर आता है लेकिन अगर वर्तमान सरकार का प्लान सोचे तो इसमे मध्यप्रदेश के जबलपुर समेत उत्तर प्रदेश के प्रयागराज जिले को भी शामिल करने की योजना बनाई जा रही है।

प्रयागराज को लेकर लोगों मे आक्रोश:

दरअसल सरकार जिस बुंदेलखंड के लिए प्रस्ताव तैयार कर रही है उसमे प्रयागराज (पूर्व में इलाहाबाद) को बुंदेलखंड राज्य की राजधानी बनाने के मूड में है लेकिन सरकारों के इस काम को लेकर बुंदेली मड़ई काफी आक्रोश में है लोगों का मानना है कि अगर बुंदेलखंड की राजधानी प्रयागराज हुई तो उनके लिए सास मरी और बहू के बिटिया हुई वाली कहानी साबित होगी।

लोगों का कहना यह कि अभी उन्हें अपने विकास के लिए प्रदेश के मुख्यालय लखनऊ के मुँह की तरफ देखना पड़ रहा है। कल उन्हें प्रयाग की तरफ देखना पड़ेगा और हर प्रकार से बुंदेली समाज के खिलाफ एक साजिस है। जिससे बुंदेली लोगों को जानबूझकर पूर्वांचल के ऊपर निर्भर किया जा रहा है। लोगों ने बताया कि बुंदेलखंड खनिज संपदा के लिए स्वर्ग है इस प्रकार से बुंदेलखंड के दोहन बरकरार रहेगा और इसका मुफ्त में लाभ प्रयाग उठाएगा।

बुन्देलखण्ड की राजधानी बुन्देलखण्ड के बीचो-बीच स्वीकार्य होगी न कि प्रयागराज अन्यथा आन्दोलन के लिए हर बुंदेलखण्डी हमेशा...

Posted by सन्तोष कुमार राजेन्द्रा on Wednesday, November 18, 2020

प्रधानमंत्री ने अपने वक्तव्य में खुद खुलासा किया है कि बुंदेलखंड जैसे प्रकृति सम्पन्न क्षेत्र को केवल लूटा गया है। विकास यहां किसी के स्वप्न में भी शामिल नहीं रहा।

नई नहीं है राज्य की कल्पना:

ऐसा नहीं की बुंदेलखंड राज्य किसी कल्पना का अंग हो दरअसल बुंदेलखंड राज्य अपने आप मे एक राज्य रह चुका है। आजादी के बाद 12 मार्च 1948 को संविधान सभा द्वारा बकयदा इस बुंदेलखंड राज्य का गठन किया गया था जो लगातार 8 वर्ष और 7 माह तक एक राज्य की भांति रहा। इस राज्य के पहले मुख्यमंत्री भी कामता प्रसाद सक्सेना रहे लेकिन बाद में 31 अक्टूबर 1956 को बुंदेलखंड राज्य का विलय उत्तर प्रदेश और मध्यप्रदेश में कर दिया गया था।

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