Patanjali Coronil
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क्या बाबा रामदेव की दवा कोरोनिल साजिस की भेंट चढ़ गई ? या फिर दिव्य फार्मेसी ने तैयारी नहीं की

सबसे पहले हमें यह समझना पड़ेगा कि आखिर पतंजलि ने दवा किसकी बनाई और रिसर्च किस पर की ? और अगर या घोषणा जल्दबाजी में हुई तो सरकार को क्या कदम उठाने चाहिए थे ? आइये इन पर थोड़ी चर्चा कर लें

Shivjeet Tiwari

Shivjeet Tiwari

मामला कोरोना जैसी वैश्विक समस्या से जुड़ा हुआ है, पूरी दुनिया की नजरें बरबस ही उस केंद्र की तरफ लग जाती है जहां थोड़ी सी भी रोशनी की किरण दिखाई देती है। शायद ऐसा ही कुछ हुआ है बाबा रामदेव की कोरोनिल के साथ। बाबा रामदेव ने दवा को बनाने में कितनी तैयारी की उसका तो पता नहीं लेकिन दवा (Patanjali Coronil) के रहस्योद्घाटन में इतनी फुर्ती दिखा दी कि लोग भौचक्के रह गए नतीजन लोगों का रिएक्ट करना भी जरूरी था और हुआ भी ऐसा। समाज में दो धड़े हो गए एक धड़ा जो आयुर्वेद को सदियों पुरानी हानिरहित चिकित्सा पद्धति बताकर अपना पक्ष रखने लगा तो दूसरा वो वर्ग जिसे केवल एलोपैथिक में ही भविष्य नजर आया।

मामला हाइप हुआ तो भारत मे कुछ जिम्मेदार एजेंसियों से दखल करने की मांग की गयी जिसमे एक थी आयुष मंत्रालय जिसके जिम्मे होता है यूनानी चिकित्सा, होम्योपैथी, आयुर्वेद और नेचुरोपैथी मने प्राकृतिक चिकित्सा, और दूसरी आईसीएमआर यानी कि वायरोलॉजी की प्रमुख संस्था जिसके जिम्मे होता है किसी भी नए और पुराने वायरस की पहचान और निदान करना होता है। हालाँकि भारत मे ये दोनों एजेंसियां कितना जिम्मेदारी से काम करती है ये किसी से छुपा नहीं है। खैर दवा के उदघाटन के बाद हो हल्ला हुआ और आयुष मंत्रालय ने तपाक से जवाब दिया और दवा के प्रचार प्रसार पर पाबंदी लगा दी और कहा कि आप दस्तावेज साझा कीजिये।

फिर शुरू हुआ खेल:

खेल तो खेल है भाई कभी भी शुरू और बंद हो सकता है लेकिन बाबा रामदेव इस मामले में बहुत ज्यादा लकी नहीं रहे बल्कि मामले पर बढ़ती तल्खी देखकर सरकारी एजेंसियों ने गड़े हुए मुर्दे खोद निकाले और पूंछा की दवा का लाइसेंस लिया या नहीं? क्या कोरोना की दवा बनाने का ही लाइसेंस लिया गया था या कोई और। खोजबीन हुई और पता चला कि जिस दवा से कोरोना को नेस्तोनाबूद करना का दावा किया जा रहा था उसका रजिस्ट्रेशन केवल खांसी, बुखार, जुकाम और इम्यूनिटी बढ़ाने की दवा के नाम पर रजिस्ट्रेशन कराया गया था। बाबा की बूटी के बारे में जिस निम्स ( नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज जयपुर ) के द्वारा साझा कार्यक्रम चलाया गया उसके प्रमुख भी मौके पर साथ छोड़कर निकल लिए। यही नहीं राजस्थान जिसमे कांग्रेस की सरकार सत्ता में है वहां करीब आधा दर्जन की संख्या में मुकदमे दर्ज कराए गए है।

  • आचार्य बालकृष्ण का फेसबुक लाइव जिसमे कोरोनिल के विमोचन के बाद हुई प्रतिक्रिया के बारे में जानकारी उपलब्ध कराई गई है:

आज #स्वास्थ्य_समाधान में सभी मित्रों,आत्मीय स्वजनों ने अपने रोग की चिंता छोड़कर देश में हमारी औषधि को लेकर हो रहे...

Posted by Acharya Bal Krishna on Saturday, June 27, 2020

आयुष मंत्रालय इतने दिनों तक कहां सोया रहा?

अगर योगगुरु रामदेव और बालकृष्ण के पक्ष को समर्थन देने वाले व्यक्तियों की सुने तो उनके अनुसार यह स्थिति अनायास नहीं बनी है बल्कि इसे विधिवत रूप से तैयारी के साथ खड़ा किया गया है। जानकारों के मुताबिक जब पतंजलि योगपीठ और दिव्य फार्मेशी लंबे वक्त से कोरोना की दवा के बारे में घोषणा करने की बात कह रहा था उस वक्त तक आईसीएमआर और आयुष मंत्रालय कहां गायब था और अचानक से यह एक्ट "ड्रग्स एन्ड रैमिडीज (ऑब्जेक्शनेबल एडवर्टाइजमेंट) 1954 " कहाँ गायब हो गया था। लोगों के आरोप यह भी है कि फिल्मी दुनिया मे लंबे समय से कार्यरत जावेद अख्तर द्वारा प्रचारित संधि सुधा ( जोड़ो के दर्द को चुटकियों में खत्म करने वाली औषधि और शराब छुटाने का चमत्कारिक दवाओं का प्रचार इसी भारत के लगभग हर टीवी पर फ्लैश होता है और संबंधित विज्ञापनों से न तो सरकार को कोई आपत्ति होती है ना ही मंत्रालयों को। लोगों की शिकायत है कि अगर कोरोनिल की दवा में इलाज की पुष्टि नहीं होती तो सरकार को इस दवा की ट्रायल करना चाहिए। लोगों के तर्क है कि जो सरकार कुछ दिन पहले तक देशवासियों को काढ़ा पिलाकर इम्यून करना चाहती थी उन्हें अब उन्हीं औषधियों से बनी कोरोनिल से क्या आपत्ति हो सकती है?

आखिर क्या विसंगतियां हुई:

ऐसा नहीं कि हम यहाँ सिर्फ सरकार के कदमों भर की विवेचना करने के लिए बैठे है, यहाँ पतंजलि योगपीठ और दिव्य फार्मेसी के द्वारा भी कुछ मामलों में ढिलाई बरती गई सरकारी मानकों को उस प्रकार से लिया ही नहीं गया जिस प्रकार से उन्हें रखा और देखा जाना चाहिए। एक तो संगठन ने सरकार की विधिवत नियमावली के मद्देनजर दवा के रजिस्ट्रेशन में ढिलाई बरती गई और इस ट्रायल को सरकार के जिम्मेदार मंत्रालय आयुष मंत्रालय के संज्ञान में नहीं लाया गया।

हालांकि मामले में बंदिश लगने के बाद योगगुरु रामदेव के अलावा आचार्य बालकृष्ण के द्वारा यह भी बताया कि आयुष मंत्रालय और उनके बीच कुछ कम्युनिकेशन गैप हो गया था जिसे अब भर दिया गया है लेकिन विरोध के चलते बाबा रामदेव के ऊपर लगातार एफआईआर की जा रही है जिससे दो धारणाओं के बीच टकराव होना तय है।

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उदय बुलेटिन
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