उदय बुलेटिन
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प्रदर्शन करती महिला
प्रदर्शन करती महिला|IANS
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नन दुष्कर्म मामला : आरोपी बिशप को इस शर्त पर मिली जमानत  

केरल उच्च न्यायालय ने सोमवार को बिशप फ्रैंको मुलक्कल को जमानत दे दी। बिशप मुलक्कल पर 2014 से 2016 के बीच एक नन से कई बार दुष्कर्म करने का आरोप लगा है।

AKANKSHA MISHRA

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कोच्चि: केरल उच्च न्यायालय ने सोमवार को बिशप फ्रैंको मुलक्कन की जमानत याचिका मंजूर कर ली। बिशप को 2014 से 2016 तक एक नन का कई बार दुष्कर्म करने के आरोप में सितंबर में गिरफ्तार किया गया था। केरल उच्च न्यायालय ने 15 अक्टूबर की सुबह सुनवाई के दौरान रोमन कैथलिक पादरी फ्रैंको मुलक्कन को शर्त के साथ जमानत पर रिहा किया है , न्यायधीश राजा विजयराघवन ने फ्रैंको मुलक्कन की जमानत याचिका को मंजूर करते हुए आदेश दिए हैं कि फ्रैंको मुलक्कन को अपना पासपोर्ट पुलिस अधिकारीयों को देना होगा , और हर हफ्ते शनिवार के दिन जांच अधिकारी के समक्ष पुलिस स्टेशन में हाजिरी लगनी होगी। साथ ही उन्होंने फ्रैंको मुलक्कन को कभी केरल में दाखिल न होने के निर्देश भी दिए हैं।

फ्रैंको मुलक्कन को तीन दिन पूछताछ के बाद 21 सितंबर को गिरफ्तार किया गया था। उन्हें 24 सितंबर को दो सप्ताह की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया था। मुलक्कल तब से पाला उपकारावास में हैं। इससे पहले तीन अक्टूबर को जस्टिस वी. राजा विजयराघवन ने बिशप को जमानत देने से इनकार कर दिया था।उस वक़्त अदालत ने अभियोजन की यह दलील स्वीकार कर ली थी कि समाज में ऊंचा दर्जा रखने वाले आरोपियों को जमानत पर रिहा कर दिए जाने पर वह गवाहों को प्रभावित करने की कोशिश करेगा।

आईएएनएस द्वारा प्राप्त जनकारी के अनुसार, नन से आरोपी फ्रैंको मुलक्कन ने कई बार रेप और यौन हमले किये थे जिसके कारण उसे कोट्टायम जिले के पाला की उप जेल में बंद किया था। पुलिस ने भी बिशप फ्रैंको मुलक्कन की जमानत याचिका करने का अनुरोध किया था क्योंकि पुलिस इस मामले में अपनी जांच पूरी होने के बाद ही किसी फैसले पर आना चाहती थी।

आपको बता दें, यह मामला मई 2014 में शुरू हुआ था, जून में कोट्टायम के एक पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई गई थी, जिसमें नन ने बिशप फ्रैंको मुलक्कन पर आरोप लगाया था, की मई 2014 में कुरविलंगड़ के एक गेस्ट हाउस में उनसे रेप किया और बाद में कई बार यौन शोषण किया। नन ने कहा कि उन्होंने पहले चर्च के अधिकारीयों के पास पादरी के खिलाफ शिकायत की थी लेकिन जब उनके द्वारा कोई कदम नहीं उठाया गया तो उन्हें पुलिस के पास आना पड़ा।