Nirbhaya Case
Nirbhaya Case|Google
टॉप न्यूज़

7 साल 3 महीने बाद निर्भया को मिला इंसाफ, तिहाड़ में पहली बार हुई एक साथ चार लोगों को फांसी ! 

निर्भया के दोषियों को शुक्रवार तड़के तिहाड़ जेल में फांसी दिए जाने के बाद लंबे समय से पीड़िता को इंसाफ मिलने की राह देख रहे लोगों ने राहत की सांस ली।

Uday Bulletin

Uday Bulletin

दिसंबर 2012 में एक मेडिकल छात्रा के साथ निर्मम तरीके से सामूहिक दुष्कर्म और हत्या के दोषियों को आखिरकार उनके किए की सजा मिल गई, जिससे समाज में जघन्य अपराध की सोच रखने वालों के मन में भी डर पैदा होगा।

तिहाड़ जेल के महानिदेशक संदीप गोयल ने पुष्टि की कि चार दोषियों - विनय, अक्षय, मुकेश और पवन को सुबह 5.30 बजे एक साथ फांसी दी गई और उन्हें सुबह 6:10 बजे मृत घोषित कर दिया गया।

फांसी दिए जाने के बाद निर्भया की मां आशा देवी ने कहा कि मेरी बेटी को आज न्याय मिलने से मैं संतुष्ट महसूस कर रही हूं।

फांसी के बाद जल्लाद पवन ने कहा, "मैं चार दोषियों को फांसी देने के बाद खुशी महसूस कर रहा हूं। मैंने इस पल का लंबे समय तक इंतजार किया था।"

भारत की बेटी निर्भया को आखिरकार न्याय मिल गया। फांसी की सजा की सूचना मिलते ही तिहाड़ के बाहर एकत्रित भीड़ में अचानक जोश पैदा हो गया। इस दौरान सभी ने जश्न मनाते हुए एक-दूसरे को मिठाई खिलाई। जेल परिसर के बाहर निर्भया के नाम की गूंज साफ इलाके में दूर तक सुनी जा सकती थी।

इस दौरान लोग 'निर्भया जि़ंदाबाद' के साथ ही 'न्यायपालिका को धन्यवाद' जैसे स्लोगन लिखे हुए पोस्टर पकड़े हुए थे। यहां एकत्र कुछ लोगों ने तिरंगा भी लहराया।

स्थानीय निवासी मीना शर्मा ने कहा कि जैसे ही यह खबर पता चली कि दोषियों को फांसी दे दी गई है, हमने निर्भया को श्रद्धांजलि देने के लिए सड़कों पर तिरंगा फहराया।

उमाकांत शर्मा नामक एक व्यक्ति निर्भया को इंसाफ मिलने के बाद इतने जोश में आ गए कि जेल के बाहर रेलिंग पर ही चढ़ गए। उनके हाथ में एक पोस्टर था, जिसमें पीड़िता को न्याय देने में देरी की बात कही गई थी। शर्मा ने कहा, "इसका मकसद हमारी न्यायिक प्रणाली में खामियों को उजागर करना है।"

सामाजिक कार्यकर्ता और इस मामले में हर समय निर्भया के परिजनों के साथ खड़ी रहीं योगिता भयाना ने कहा, "यह राष्ट्र के इतिहास में एक बड़ा दिन है। फांसी दुनिया को एक संदेश देगी कि ऐसी हरकतें नहीं की जानी चाहिए।"

निर्भया सामूहिक दुष्कर्म और हत्याकांड के चारों दोषियों को तिहाड़ जेल में शुक्रवार सुबह ठीक 5.30 बजे फांसी दे दी गई। इसके साथ ही तिहाड़ में पहली बार एक साथ चार लोगों को फांसी दी गई है। इन चारों दोषियों को दुष्कर्म के एक मामले में फांसी की सजा दी गई। निर्भया के दोषियों को अदालत द्वारा दिए गए मृत्युदंड के फैसले को क्रियान्वित करने का काम पवन जल्लाद ने किया। पवन का परिवार कई पीढ़ियों से जल्लाद का काम करता आ रहा है। पवन के पर-दादा लक्ष्मण, दादा कालू जल्लाद और पिता मम्मू जल्लाद भी फांसी की सजा को क्रियान्वित करने का काम किया करते थे।

पवन ने चार दोषियों को एक साथ फांसी पर लटकाकर आजाद भारत में तिहाड़ जेल में हुई फांसियों को लेकर अपना नाम इतिहास में दर्ज करा लिया है। यहां एक ही अपराध के लिए चार दोषियों को एक साथ फांसी देने का यह रिकॉर्ड अब पवन के नाम है।

वहीं, डीजी जेल दोषियों की फांसी से पहले 24 घंटे तक जागते रहे और जेल के भीतर ही मौजूद रहे। जेल नंबर तीन के सुपरिटेंडेंट सुनील, एडिशनल आईजी राजकुमार शर्मा और जेल के लीगल ऑफिसर पूरी रात जागते रहे।

दूसरी ओर फांसी के बाद पवन जल्लाद को कड़ी सुरक्षा के बीच तिहाड़ जेल से मेरठ के लिए रवाना कर दिया गया है।

उदय बुलेटिन के साथ फेसबुक और ट्विटर जुड़ने के लिए यहाँ क्लिक करें।

उदय बुलेटिन
www.udaybulletin.com