वाराणसी मामले में हुआ खुलासा, नेपाली नहीँ था युवक

आज की पत्रकारिता का स्तर कितना गिर चुका है यह किसी से छुपा नहीँ है लेकिन वैश्विक स्तर पर प्रशिद्धि प्राप्त अवॉर्ड पाने वाले पत्रकार भी अगर गलत रिपोर्टिंग करते है तो उसके लिए आमजन से माफी मांगनी चाहिए
वाराणसी मामले में हुआ खुलासा, नेपाली नहीँ था युवक
Varanasi nepali mundan CaseUday Bulletin (Edited)

भारत से नेपाल के रिश्ते पिछले कुछ दिनों से तल्ख चल रहे हैं और नेपाल आये दिन भारत के खिलाफ कोई न कोई कहानी रचकर दूसरों को सुना देता है। हालांकि इसके पीछे क्या कहानी है ये सब को पता है, दरअसल नेपाली प्रधानमंत्री ओली इन दिनों चीन के इशारों पर नाच रहे हैं इसी वजह से कभी अयोध्या के राजा राम को नेपाली कहा जाता है तो कभी जमीन को लेकर विवाद खड़ा किया जाता है। इसी बीच वाराणसी से एक अजीब खबर आई, खबर में यह बात फैलाई गई कि वाराणसी के कुछ युवकों ने किसी नेपाली युवक को पकड़ कर बदतमीजी की और उसका सर मुड़वा दिया। इसके बाद युवक के सर पर पेन से जय श्रीराम लिखा गया और उस नेपाली युवक से जय श्री राम के नारे लगवाए गए, बस यही मामला विवाद की जड़ बन गया।

दरअसल भले ही नेपाल के राजनैतिक रिश्तों में इन दिनों ज्यादा मिठास न हो लेकिन सदियों से भारत का नेपाल के साथ रोटी बेटी का संबध रहा है इससे भारत मे रहने वाले नेपालियों और नेपाल में रहने वाले भारतीयों के मन मे इस विवाद को लेकर असुरक्षा की भावना घर कर गयी। चूंकि अगर विवाद बढ़ता तो जाहिर तौर पर इसका रिएक्शन नेपाल में देखने को मिल सकता था और कुछ हद तक ऐसा हुआ भी नेपाल की सरकार ने भारत से इस मामले पर स्पष्टीकरण भी मांग लिया क्योंकि भारतीय मीडिया के द्वारा इस मामले पर जमकर रिपोरिंग की गई और मामले की सच्चाई जाने बिना कुछ भी दिखाया गया।

क्या है असल रहस्य ?

सबसे पहले इस मामले को वाराणसी यानी की बनारस पुलिस ने खोला पुलिस ने बताया कि बनारस के इलाके थाना भेलूपुर में एक व्यक्ति का मुंडन करने के बारे में जनाकारी मिली है जिसका वीडियो सोशल मीडिया में वायरल किया गया है, मामले की जांच हो रही है।

इस मामले में संतोष पांडेय नाम के व्यक्ति की अगुवाई पाई गई थी।

अब जाकर खुला राज:

तो सबसे पहले आपके लिए यह जानना जरूरी है कि वह व्यक्ति जिसका मुंडन किया गया है वह नेपाली है ही नहीँ, बल्कि भारतीय नागरिक है और भारत मे ही पैदा हुआ है। पुलिस पूछताछ में उक्त व्यक्ति ने अपना नाम धर्मेंद्र सिंह निवासी भेलूपुर जल संस्थान स्थित सरकारी आवास बताया। धर्मेंद्र ने पुलिस को बताया कि उसके माता-पिता उत्तर प्रदेश जल संस्थान में कार्यरत थे। सिर मुड़वाने की घटना के बारे में पूछने पर उसने बताया कि 16 जुलाई को उसके परिचित महंगू और जयप्रकाश नाई घर आए थे उन्होंने मुझे एक कार्यक्रम में गंगा घाट किनारे सिर मुड़वाने के लिए बोला और इसके बदले में एक हजार रुपये देने की बात कही। मैंने गंगा घाट पर जाकर मुंडन करवा लिया और घर आ गया। जानकारों ने बताया कि यह प्रोपेगैंडा पहली नजर में ही एक सोशल मीडिया स्टंट नजर आता है। कुछ सो काल्ड ऑर्गनाइजेशन चलाने वाले व्यक्तियों ने इसे शूट करके प्रसारित किया ताकि लोग इसे देखे और उनका निजी लाभ हो। हालांकि इस कृत्य पर भी बनारस पुलिस ने अब तक 6 लोगों को सलाखों के पीछे भेज दिया है।

लेकिन मीडिया का क्या:

कौआ कान ले गया वाली कहावत सुनी है? कुछ ऐसा ही बनारस में हुआ है, बड़े-बड़े पत्रकार जिनके दम से भारत मे पत्रकारिता कायम है, बड़े-बड़े पुरस्कार उनके हिसाब से दिए और दिलाये जाते है उनके द्वारा इस मामले पर गंभीरता से रिपोर्टिंग की गई ताकि माहौल खराब हो लेकिन मामले के खुलासे के बाद किसी का कोई बयान सामने नहीँ आया है।

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उदय बुलेटिन
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