एनडीटीवी की महिला पत्रकार निधि राजदान के साथ हुआ धोखा, फेक नियुक्ति मामला

देश की जानी मानी पत्रकार निधि राज़दान के साथ हुआ बड़ा धोखा
एनडीटीवी की महिला पत्रकार निधि राजदान के साथ हुआ धोखा, फेक नियुक्ति मामला
एनडीटीवी की महिला पत्रकार निधि राजदान के साथ हुआ धोखाGoogle Image

इससे पहले कि इस मामले पर नजर डाली जाए उससे पहले एक कहावत पर नजर डालनी चाहिए जिससे सारा मामला किलियर हो जाएगा "आधी छोड़ पूरी को धावे, पूरी मिले न आधी पावे"

हालाँकि ये कहावत इस मामले पर कितना सच बैठती है इसका निर्णय पाठकों पर, दरअसल इस मामले में दो चीजें बेहद किलियर है कि महिला पत्रकार/एंकर को विश्वप्रसिद्ध हार्वर्ड विश्वविद्यालय से एसोसिएट प्रोफेसर बनने का बुलावा आया और महिला पत्रकार ने 21 साल के एनडीटीवी कैरियर को लात मारकर विश्वविद्यालय को चुना। हालांकि बाद में यह जानकारी मिली कि यह दरअसल एक फेक नियुक्त पत्र था। निधि राजदान एक खतरनाक टाइप की फिशिंग का शिकार हुई है। ऐसे में अब निधि के पास न तो एनडीटीवी है और न ही हार्वर्ड विश्वविद्यालय।

फर्जी ऑफर के चक्कर मे बसी बसाई नौकरी छोड़ दी:

इसे नासमझी कहा जाए या फिर जरूरत से ज्यादा उतावलापन लेकिन ऐसा हुआ है वह भी हमेशा गंभीर मुद्दों पर दूसरों की पोल खोलने वाली एनडीटीवी की पत्रकार निधि राजदान के साथ। दरअसल हुआ कुछ यूं कि एनडीटीवी की एक जानी मानी पत्रकार है निधि राजदान जो हमेशा हर मुद्दों पर मुखर होकर बोलने के लिए जानी जाती है लेकिन एक ऐसा मौका आ गया जब निधि राजदान भी गच्चा खा गयी, निधि के पास बीते साल में एक मेल आया जो देखने मे ऐसा प्रतीत होता था मानो विश्वप्रसिद्ध हार्वर्ड विश्वविद्यालय से भेजा गया था। इस मेल में यह बताया गया था कि निधि को हार्वर्ड यूनिवर्सिटी से एसोसिएट प्रोफेसर के तौर पर पढ़ाने का ऑफर है। निधि राजदान ने बिना कोई खास जांच पड़ताल किये हुए इसे हार्वर्ड में नौकरी मिलना मान लिया और एनडीटीवी से इस्तीफा भी दे दिया। सोशल मीडिया समेत अन्य जगहों पर लिखा कि उन्हें दुनिया के कुछ प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों में से एक हार्वर्ड विश्वविद्यालय में नौकरी मिल गयी है। खैर वक्त बीतता गया लेकिन नौकरी मिलने के बाद पढ़ाने का अवसर नही मिला तो निधि ने हार्वर्ड से सम्पर्क किया और वहां से जवाब आने के बाद निधि के पैरों के नीचे से जमीन हिल गयी। निधि को मालूम पड़ा कि वह एक योजनाबद्ध फिशिंग का शिकार हुई है, जिसका उपयोग डाटा चोरी के लिए किया जाता है।

बदल गया माहौल:

हालांकि मामले के खुलासे के बाद निधि समेत वह अन्य लोग भी शॉक में है जिन्होंने निधि को हार्वर्ड में प्रोफेसर होने पर बधाई दी थी। इसके बाद सोशल मीडिया में लोगों द्वारा निधि की पुरानी बायो और अब की बायो को लेकर तुलना की जा रही है। लोगों ने सुबूतों के साथ पेश किया कि कैसे निधि ने बिना पड़ताल किये खुद को प्रोफेसर मान लिया था।

इस पर लोग मजे भी ले रहे है:

भारत मे मिम्सबाजों का ख़ौफ़ है ये मीमसेना कभी भी किसी को भी नहीं लपेट लेती है। जब भारत के प्रधानमंत्री और ग्रह मंत्री नही बचे तो निधि राजदान क्या है। लोगों ने अलग अलग तरीके से निधि को लपेटा।

गलतफहमी किसी को भी हो सकती है:

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उदय बुलेटिन
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