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Mumbai Dance bar:  मुंबई में खुलेंगे डांस-बार
Mumbai Dance bar: मुंबई में खुलेंगे डांस-बार|Google
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Mumbai Dance bar: शर्तों के साथ एक बार फिर से मुंबई में खुलेंगे डांस-बार, नहीं लगेगा CCTV

Supreme Court ने मुंबई डांस बार मामले में आज अपना फैसला सुना दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा दोबारा डांस बार खोल सकते हैं, लेकिन इसके लिए सुरक्षा और नियम शर्तों का पालन करना होगा। 

AKANKSHA MISHRA

AKANKSHA MISHRA

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने देश की आर्थिक राजधानी मुंबई में एक बार फिर से डांस बार खोलने की अनुमति दे दी है। सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसलों में कहा कि, "डांस बारों पर पूर्ण प्रतिबंध नहीं लगाया जा सकता है। 2005 से महाराष्ट्र सरकार द्वारा किसी को भी लाइसेंस नहीं दिया गया है। हालांकि इसमें कुछ नियम हो सकते हैं, लेकिन पूर्ण प्रतिबंध नहीं होनी चाहिए।"

सुप्रीम कोर्ट ने मुंबई के डांस बार में नए सुरक्षा और नियमों के साथ डांस बार को दोबारा से खोले का आदेश दे दिया है, लेकिन डांस बार में पैसों की बारिश करने की इजाजत नहीं होगी। अदालत ने कहा कि मुंबई के डांस बार में सीसीटीवी कैमरों की कोई जरूरत नहीं है, क्योंकि ये लोगों की निजता यानी प्राइवेसी का उल्लंघन करते हैं।

इस मामले की सुनवाई के दौरान महाराष्ट्र सरकार ने कहा था कि नया कानून संवैधानिक दायरे में आता है और यह गैर कानूनी गतिविधियों और महिलाओं का शोषण भी रोकता है। हालांकि, इसी मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट की ओर से कहा गया कि मुंबई में ऐसा लग रहा है कि मोरल पुलिसिंग हो रही है। कोर्ट ने कहा था कि राज्य सरकार के कड़े नियमों की वजह से मुंबई में एक भी डांस बार का परिचालन नहीं हो पा रहा है।

दरअसल सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में महाराष्ट्र सरकार द्वारा डांस बार चलाने के लिए लाइसेंस पाने के लिए कड़े शर्तों में ढील दी और डांस परफॉरमेंस के लिए साढ़े पांच घंटे का समय बरकरार रखा। सुप्रीम कोर्ट ने मुंबई के डांस बार में ऑर्केस्ट्रा की अनुमति तो दी है, लेकिन डांस बार के अंदर नकदी और सिक्कों की बौछार करने की अनुमति नहीं दी है। सुप्रीम कोर्ट ने मुंबई के डांस बार में सीसीटीवी कैमरे लगाने की महाराष्ट्र सरकार की शर्तों को भी खारिज कर दिया है।

जिसके साथ सुप्रीम कोर्ट ने कुछ शर्तें रखी हैं, एक शर्त के अनुसार डांस बार शैक्षिक और धार्मिक स्थानों से 1 किमी दूर होना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने महाराष्ट्र सरकार के एक नियम को बरकरार रखा है जिसके द्वारा कामकाजी महिलाओं के पास अनुबंध होना चाहिए ताकि उनका शोषण न हो, हालांकि बार डांसरों के लिए मासिक वेतन के एक नियम को रद्द कर दिया। सुप्रीम कोर्ट ने डांस बार की समयसीमा 11 बजे तक तय की है।

हालांकि बार मालिकों ने दावा किया है किमुंबई जैसे बड़े शहरों में इन शर्तों का पालन करना संभव नहीं है। उन्होंने यह भी दावा किया कि 11.30 बजे से डांस बार को बंद करने का एक और प्रतिबंध भेदभावपूर्ण है। वो भी जब केंद्र सरकार ने व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को चौबीसों घंटे चलाए जाने की अनुमति दे रखी है।