COVID-19 : कोरोना संकट से परेशान हुआ सबसे ताकतवर देश, भारत से मांगनी पड़ी मदद

पूरी दुनिया के साथ कोरोना ने सबसे शक्तिशाली देश अमेरिका की भी कमर तोड़ दी है, जिसकी वजह से ट्रंप को पीएम मोदी से मदद मांगनी पड़ रही है।
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हाड्रोक्सीकलोरोक्विनGoogle
हाड्रोक्सीकलोरोक्विन
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कोरोना वायरस, एक ऐसी महामारी है जो पिछले 3 से 4 महीने में किसी एक, दो या चार देश को नहीं बल्कि पूरे विश्व को अपनी चपेट में लिए हुए है। इस खतरनाक और संक्रामक वायरस की वजह से ना सिर्फ पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था चरमरा गयी है बल्कि हर तरफ इसने कोहराम मचा रखा है। अमेरिका, इटली, स्पेन जैसे देश भी इसके आगे घुटने टेक चुके है और अब बस किसी चमत्कार का इन्तजार कर रहे है क्योंकि इतनी मौत होने और तबाही मचने के बाद भी अभी तक इसकी कोई दवा नहीं बन पाई है।

भारत में यह महामारी कुछ देर से पहुंची मगर जब आई तो यहाँ पर भी इसने अपना प्रकोप दिखाया जिसकी वजह से अभी तक भारत में 5000 से ज्यादा कोरोना वायरस के केस आ चुके हैं और 150 से ज्यादा लोगों की मौत भी हो चुकी है। फिलहाल इस वायरस से बचने के लिए भारत में भी लॉकडाउन चल रहा है। यक़ीनन लोगों को इससे समस्या हो रही है मगर देश को, नागरिकों को बचाने के लिए ये ही एक मात्र तरीका है।

वैसे तो दुनियाभर में सभी देशों के वैज्ञानिक इस वायरस की दवा बनाने में जोरों से जुटे हैं और कई सारे टेस्ट आदि भी किये जा रहे मगर अभी तक कोई सकारात्मक परिणाम सामने नहीं आ पाया है। मगर पिछले कुछ दिनों से एक दवा का नाम सोशल मीडिया से लेकर अंतरराष्ट्रिय स्तर पर चर्चा में है, हाड्रोक्सीकलोरोक्विन (Hydroxychloroquine)

जी हाँ, ये वो दवा है जिसका नाम अमरीकी राष्ट्रपति ट्रंप से लेकर विश्व के अलग अलग देशों सहित भारत के तमाम वैज्ञानिक भी बार-बार ले रहे हैं। तो क्या कोरोना वायरस की दवा मिल गयी है, जिसके लिए हर कोई इतना उतावला हो रहा? क्या खास है इस दवा में और किसने इसे इजाद किया है, ऐसे कई सारे सवाल एक साथ दिमाग में आने लग रहे हैं।

आखिर क्या बला है ये हाड्रोक्सीकलोरोक्विन

सबसे पहले तो आपको ये जान लेना चाहिए की हाड्रोक्सीकलोरोक्विन मलेरिया की बीमारी से लड़ने की एक दवा है जो ना सिर्फ बेहद सस्ती और टिकाऊ है बल्कि बेहद ही असरदार भी है। सिर्फ इतना ही नहीं बल्कि यह दवा और भी कई तरह की बीमारी जैसे गठिया, चर्म रोग या फिर किडनी संबधी बीमारी में भी इसका इस्तेमाल किया जाता है।

हाड्रोक्सीकलोरोक्विन
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डोनाल्ड ट्रंप के उतावलेपन को हम आपको इस तरह से समझाते हैं, असल में COVID 19 चीन के वुहान से उत्पन्न हुआ है इस बात से तो अब पूरी दुनिया वाकिफ है। ऐसे में चीन में इस बीमारी का इलाज खोजने के दौरान मरीजों पर टेस्ट किया गया जिसमे इस दवा का इस्तेमाल किया गया था और रिजल्ट में यह देखने को मिला कि इसकी वजह से कोरोना संक्रमित मरीज पर वायरस का असर कम होते दिखा।

सिर्फ यही नहीं फ़्रांस के भी एक जाने-माने वैज्ञानिक ने कोरोना मरीजों पर इसका टेस्ट किया और नतीजा 98 प्रतिशत से ज्यादा मरीजों में इसका असर देखने को मिला। इस तरह के नतीजे मिलने के बाद अमेरिका के न्यूयॉर्क शहर में भी इसकी टेस्टिंग शुरू हुई जहाँ पर इस वक़्त कोरोना का सबसे ज्यादा प्रकोप फैला हुआ है और सबसे ज्यादा मौते हो चुकी हैं।

यहाँ पर वैज्ञानिकों ने तक़रीबन 400 से 500 कोरोना मरीजों पर एंटी मलेरिया और असीमोमाईस्रीन (एक तरह का एंटीबायोटिक) का मिश्रण दिया गया जिसके बाद कई मरीजों में काफी हद तक सुधार देखने को भी मिला।

इस परिक्षण से अमेरिका को एक रौशनी दिखी और उसे लगने लगा है कि वह इसके जरिये अपने नागरिकों की जान बचा सकता है। मगर वहां के डॉक्टर और वैज्ञानिक आदि इसे कोरोना का पुख्ता इलाज नहीं मानते हैं लेकिन एक बड़ी सम्भावना जरुर दिख रही है।

हाड्रोक्सीकलोरोक्विन
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ट्रंप ने पीएम मोदी से की इस दवा की मांग

अमेरिका इस दवा को पाने के लिए भारत से लगातार संपर्क बनाये हुए है और इस दवा की विशेष मांग कर रहा है। ऐसा नहीं है कि अमेरिका के पास यह दवा बनाने के संसाधन या विज्ञान नहीं है बल्कि भारत से इसकी डिमांड करने के पीछे वजह यह भी है कि इसका उत्पादन भारत में काफी ज्यादा मात्रा में किया जाता है।

असल में भारत में मलेरिया कई वर्षों तक रही है जिसके इलाज के लिए हाड्रोक्सीकलोरोक्विन दवा के उत्पादन की मात्रा ज्यादा है। आप यह भी कह सकते हैं कि इस दवा का उत्पादन पुरे विश्व भर में सबसे ज्यादा भारत में ही होता है और तो और हमारे देश में इसके निर्माण में इस्तेमाल की जाने वाले रॉ-मटेरियल भी आसानी से उपलब्ध हो जाती है।

सबसे अहम बात तो ये है की यहाँ पर इसके उत्पादन में लागत बेहद ही कम आती है और इसकी क्वालिटी भी काफी उन्नत है। जब से इस दवा का सम्बन्ध कोरोना संक्रमण से जुड़ा है उसके बाद से ही भारत की आला मेडिकल टीम ने इस दवा के सम्बन्ध में नियम में बदलाव करते हुए इसके निर्यात पर पूरी तरह से प्रतिबन्ध लगा दिया था।

निश्चित रूप से अपने देश के लिए ऐसा करना बहुत ही आवश्यक होगा क्योंकि जिस तरह से भारत में कोरोना के केस बढ़ते जा रहे हैं उसे देखते हुए यह दवा यहाँ के नागरिकों के लिए संजीवनी का काम तो कर ही सकती है। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प अपने देश की परिस्थिति से काफी ज्यादा चिंतित हैं और ये भी एक बड़ी वजह है कि वो पीएम मोदी से फ़ोन कर के इस दवा की विशेष मांग कर रहे हैं जिसके बाद पीएम मोदी ने अमेरिका की मदद भी की है।

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उदय बुलेटिन
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