जातीय उपेक्षा और हाथरस कांड से आहत होकर बाल्मीकि समाज के 200 से ज्यादा लोगों ने स्वीकारा बौद्ध धर्म

गुट के रूप में धर्मान्तरण कर सरकार को प्रेशर में ले रहे हैं ये लोग
जातीय उपेक्षा और हाथरस कांड से आहत होकर बाल्मीकि समाज के 200 से ज्यादा लोगों ने स्वीकारा बौद्ध धर्म
बौद्ध धर्म अपनाने वाले बाल्मीकि समाज के लोग उदय बुलेटिन

एक ओर जहां इतने बड़े धर्म परिवर्तन को लेकर प्रदेश में उथल-पुथल मची हुई है वहीँ स्थानीय लोगों द्वारा इसे सरकार पर दबाव बनाने का प्रोपेगैंडा बताया जा रहा है, हालाँकि शुरुआत से लेकर अब तक स्थानीय प्रशासन द्वारा इस घटना को नकारा जा रहा था लेकिन अब इस मामले की परतें खुलने लगी है, अधिकारी धर्मांतरण किये हुए लोगों के आस-पास चक्कर लगाते हुए नजर आ रहे हैं।

जातीय उत्पीड़न को बनाया अहम मुद्दा:

ज्ञात हो कि बीते दिनों में गाजियाबाद जिले के करेड़ा गांव से बाल्मीकि समाज के 236 लोगों द्वारा सामूहिक रूप से बौद्ध धर्म अपनाने से खासा बवाल कट गया है, बौद्ध धर्म मे गए हुए लोगों द्वारा सोशल मीडिया समेत प्रशासन को यह जानकारी दी है कि उनका समुदाय छुआछूत और जातीय उत्पीड़न से बेहद परेशान था जिसकी वजह से उन्होंने बौद्ध धर्म को स्वीकार करने का निर्णय लिया है।

बाल्मीकि समाज के लोगों ने स्थानीय लोगों पर उनका उत्पीड़न किये जाने का आरोप लगाया है, समुदाय के लोगों ने बताया कि उन्हें आये दिन उनकी जाति के आधार पर प्रताड़ित किया जाता है, आये दिन होने वाली घटनाओं से आहत होकर समुदाय के लोगों ने बीते 14 अक्टूबर को बौद्ध धर्म स्वीकारने की बात कही है।

हाथरस मामले से भी हुए आहत:

बौद्ध धर्म मे गए बलामीकी समाज के लोगों ने हाथरस जिले में हुए रेप और हत्या को भी अपने कन्वर्जन का एक अहम कारण बताया है, साथ ही समुदाय के लोगों ने यह जानकारी दी कि उनका समुदाय बेरोजगारी जैसी समस्या से बेहद परेशान है, जिसके कारण उन्होंने यह कदम उठाया है।

लोगों ने कहा ध्यान खींचने की कोशिश:

हालांकि अन्य स्थानीय लोगों ने इस मामले की अलग कहानी बताई है, लोगों के अनुसार न तो बौद्ध धर्म स्वीकार करने से बेरोजगारी दूर हो जाएगी और न ही किसी के बौद्ध धर्म स्वीकार करने से हाथरस की पीड़िता को न्याय मिलने की उम्मीद है, हाँ यह बात अलग है कि भारी मात्रा में हुए धर्मांतरण की वजह से देश की मीडिया और सरकार इन लोगों की तरफ आकर्षित होगी, लोगों द्वारा इसे मात्र एक प्रोपेगैंडा करार दिया गया है।

पुलिस प्रशासन ने अभी तक धर्म परिवर्तन को नकारा:

इस मामले पर धर्मांतरण की बात को अभी तक पुलिस प्रशासन और जिले के आला अधिकारियों द्वारा नकारा जाता रहा है, लेकिन अधिकारियों का बार-बार समुदाय के लोगों से मिलना, समझाने बुझाने की कोशिश करना अलग कहानी पेश करती है।

मामले को लेकर जिले के आला अधिकारी मौके पर पहुंचकर करीब पचास परिवारों को समझाने के लिए जुटे हुए है देखना यह कि लोग अधिकारियों की बातों पर अमल करते है अथवा नहीं।

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