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अंतरिम डिविडेंट
अंतरिम डिविडेंट|Google
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शुरू हो गया मोदी सरकार का दिवाली मेगा सेल प्लान, जानें कितना होगा फायदा

भारत सरकार के विनिवेश के रास्ते से भारतीय अर्थव्यवस्था आखिर किस हद तक पटरी पर आ पाएगी ये तो वक्त ही बताएगा, लेकिन इस मंदी के दिनों में कई बड़ी कंपनियां बिक रही हैं।

Puja Kumari

Puja Kumari

भारतीय अर्थव्यवस्था के बारे में बात करे तो यह बीते काफी समय से बुरी स्थिति में है। ऐसे में आये दिन कोई न कोई कंपनी घाटे में जा रही है। हर तरफ सिर्फ पैसे की ही बात हो रही है। खबरें आ रही है कि मोदी सरकार आरबीआई से फिर कुछ बड़ी मात्रा में रकम उधार लेने पर विचार कर रही है जो कि 25 से 30 हजार करोड़ है। अभी तक की जानकारी के अनुसार बताया जा रहा है कि ये रकम मोदी सरकार अंतरिम डिविडेंट के रूप में लेगी। जनवरी 2020 एक सर्वे किया जाएगा जिसके बाद यह निर्धारित होगा कि सरकार को कितनी रकम दी जा सकती है।

क्या है अंतरिम डिविडेंट

अब आप सोच रहे होंगे कि ये अंतरिम डिविडेंट है क्या? तो बता दें कि आरबीआई हर वित्तिय वर्ष में साल भर की कमाई गई प्रॉफिट की एक तय रकम सरकार को देती है जिसे डिविडेंड कहते है, लेकिन अगर सरकार को एकाएक पैसे की आवश्यकता पड़ जाए यानी कि साल के बीच में तो वो आरबीआई से डिमांड करती है, जिसे 'अंतरिम डिविडेंट' कहते हैं और साल के बीच में सरकार जो पैसे लेती है वो रकम (यानी कि एडवांस में दिए गए पैसे) काटकर वित्तीय वर्ष पूरे होने के बाद आरबीआई सरकार को दे देती है। वैसे ये पहली बार नहीं हो रहा बल्कि इससे पहले भी साल 2016 में सरकार ने आरबीआई से अंतरिम डिविडेंट लिया था।

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इन तरीकों से भी सरकार करेगी पैसों का जुगाड़

वैसे आपको बता दें ये एक मात्र तरीका नही है जिसे सरकार पैसों के जुगाड़ के लिए अपना रही है बल्कि इसके अलावा भी सरकार कई कंपनियों का विनिवेश कर या फिर अपनी हिस्सेदारी बेचकर पैसे जुटाने के काम में लगी हुई है। बीते 30 सितम्बर को भी सरकार ने कुछ कंपनियों के विनिवेश का फैसला किया जिसमें कई छोटी व बड़ी कंपनियां शामिल है, इनमें से एक भारत की बड़ी कंपनी भी थी जिसका नाम है BPCL (Bharat Petroleum Corporation Limited)। भारत में ये दूसरे नम्बर की सबसे बड़ी सरकारी पेट्रोलियम कंपनी है।

सरकार की इस कंपनी में 53% की हिस्सेदारी है जिसे बेचकर 55 से 65 हजार करोड़ रुपये मिलने का अनुमान है। अगर इस वित्तीय वर्ष की बात करे तो इस बार सरकार करीब 1 लाख 5 हजार करोड़ रुपये जुटाने का टारगेट रखी हुई है जो कि काफी हद तक BPCLकी डील से पूरा हो जाएगा।

अब बात करते है इस लिस्ट में शामिल हुई दूसरी बड़ी कंपनी की जिसे BEML (Bharat Earth Movers Limited) कहते हैं। ये कंपनी सेना के लिए व्हीकल बनाती है इसके अलावा यह देश के सभी मेट्रो शहरों में मेट्रो ट्रेन की सप्लाई भी करती है। इसमें कई विदेशी कंपनियां भी जुड़ी हुई है। हालांकि 1992 तक ये कंपनी रक्षा मंत्रालय के अंदर में पूरी तरह से आता था लेकिन विनिवेश की वजह से इस कंपनी में भी सरकार की हिस्सेदारी 54% तक हो गयी। सरकार इस डील से 2100 करोड़ हासिल करने के विचार में है।

इस लिस्ट में तीसरी सबसे बड़ी कंपनी है concor (Container Corporation of India), रेल मंत्रालय ने इस कंपनी को कंटेनर ढुलाई के लिए बनाया था लेकिन अब सरकार के पास इसमें करीब 54 % ही हिस्सेदारी है जिसके विनिवेश से सरकार को 20 हजार करोड़ रुपये मिल सकती है।

अब बारी आती है इस लिस्ट की चौथी बड़ी कंपनी की जिसका नाम है SCI (shipping corporation of india)। इसमें सरकार की हिस्सेदारी 73.75% है जिसके विनिवेश से सरकार को 13,00 करोड़ रुपये मिल सकते हैं।

कई जानकारों का ये दावा है कि सरकार BPCL की पूरी हिस्सेदारी बेचने के फिराक में है लेकिन बाकी कंपनियों को लेकर क्या टारगेट है अभी तक पता नहींं चल पाया है। ऐसा पहली बार नहीं हो रहा जब भारत सरकार मंदी में विनिवेश का सहारा ले सके बल्कि इससे पहले भी साल 1991 के बाद जितनी सरकारें बनी है वो मंदी में विनिवेश का ही रास्ता अपनाते आ रही है। पर कई लोग का मानना है कि इस बार की सरकार विनिवेश पर कुछ ज्यादा आश्रित है।