सेना में अफसरों की पेंशन कटौती को लेकर हुआ बवाल, कांग्रेस ने भाजपा पर बोला हमला

मोदी सरकार ने सेना में नया प्रवधान लाने के प्रयास में है। जिसमे सेना में अफसरों की पेंशन की कटौती हो सकती है। इसी पर कांग्रेस ने मोदी सरकार पर निशाना साधा है।
सेना में अफसरों की पेंशन कटौती को लेकर हुआ बवाल, कांग्रेस ने भाजपा पर बोला हमला
Randeep Singh Surjewala Attacks BJPUday Bulletin

इस सारे बवाल की जड़ भारत सरकार का एक मसौदा है जिसमे यह प्रस्ताव किया गया है कि सेना में उन्हीं अफसरों को पूरी पेंशन मिलेगी जिन्होंने सेना में रहकर कम से कम 35 साल की सेवा दी हो। इस मामले पर कांग्रेस मुखर होकर भाजपा की नीति का विरोध कर रही है।

केंद्र सरकार की सेना पेंशन नीति पर खड़ा हुआ विवाद :

दरअसल केंद्र सरकार भविष्य में सेना में अधिकारियों को मिलने वाली पेंशन स्कीम लाने की तैयारी में है। जिसके अंदर यह प्रावधान रखा गया है कि रिटायरमेंट के बाद उन्हीं सैन्य अफसरों को पूरी पेंशन मिलेगी जिन्होंने कम से कम 35 साल सेवा पूरी की हो।

इससे पहले वीआरएस लेने वाले सैन्य अधिकारियों को जो पेंशन दी जाएगी वह उनकी वास्तविक पेंशन से काफी कम होगी। दरअसल माजरा यह है कि सेना में भर्ती होने वाले अधिकारी सेना में अपनी आवश्यक सेवा काल (निर्धारित 20 वर्ष) पूरी करने के बाद अन्य विकल्पों के चयन कर लेते है इसका फॉयदा यह होता है कि उन्हें सेना में युवा उम्र में कार्य करने का मौका मिल जाता है साथ ही उन्हें दूसरे रोजगार के विकल्प भी मिल जाते है।

हालांकि केंद्र सरकार इस कदम को इसलिए उठाया है कि बीते काफी समय से सेना में अफसरों की खासी कमी को झेला जा रहा है। सेना में भर्ती होने वाले जवान अफसर पहले तो सेना में भर्ती होते है लेकिन बाद में अन्य विकल्प मिलने पर सेना से त्यागपत्र दे देते है।

जिसका सीधा सीधा खामियाजा सेना को भुगतना पड़ता है दरअसल सरकार सैन्य अधिकारियों के चयन, ट्रेनिंग इत्यादि में काफी कुछ खर्च करती है लेकिन बाद में सेना और सरकार के हाँथ में कुछ नहीं लगता और अफसरों की भारी किल्लत इसके परिणामस्वरूप ही आती है।

क्या है अफसरों का तर्क?

अफसरों के मुताबिक सेना में भर्ती होने वाले कुल अधिकारियों में से केवल 35 फीसदी अधिकारी ही लेफ्टिनेंट कर्नल के पद से आगे पहुंचते है बाकी के 65 फीसदी अधिकारी केवल लेफ्टिनेंट कर्नल तक ही सीमित रह जाते है और यहीं 65 फीसद अधिकारी भर्ती होते वक्त नियमानुसार 20 वर्ष की आवश्यक सेवा का सेवा बांड भराया जाता है।

जिसके बाद ही अधिकारी सेना से सेवानिवृत्ति लेकर दूसरे विकल्प तलाशते है।चूंकि सेवा का प्रोमोशन सेवाकाल सबको नहीं मिलता और ऐसे ही नए अधिकारियों के आने और पुराने सैन्य अधिकारियों के जाने से सेना में नयापन बना रहता है।

मसौदे में क्या है विवादित:

दरअसल मोदी सरकार ने सेना की अनुशंसा पर यह मसौदा तैयार किया है कि जिन सैन्य अधिकारियों द्वारा सेना में 35 वर्ष का सेवाकाल नहीं होता उनकी पेंशन जो तत्कालीन वेतन का 50 प्रतिशत होती है उसे उससे कम करके करीब 25 प्रतिशत करने का है।

हालांकि यह मसौदा अभी रिसर्च पर है। अभी इसको फ्लोर पर नहीं लाया गया है और इस मसौदे का सेना और सेना के बाहर राजनीतिक स्तर पर विरोध होना शुरू हो गया है। सरकार में विपक्ष की मुख्य पार्टी कांग्रेस द्वारा इस मसौदे का कड़ा विरोध दर्ज कराया गया है।

कांग्रेस प्रवक्ता सुरजेवाला द्वारा जनता के सामने कांग्रेस का पक्ष रखते हुए कहा कि भाजपा हमेशा से सेना विरोधी रही है।

कांग्रेस ने कहा भाजपा सेना का मनोबल गिरा रही है:

कांग्रेस के प्रवक्ता रणदीप सिंह सुरजेवाला ने भाजपा पर कड़ा हमला बोलते हुए कहा कि भाजपा द्वारा हमेशा से सेना विरोधी कार्य कराया जाता रहा है। चाहे वह सेना के लिए सुविधाओं की बात हो या फिर पेंशन का मामला हो इन सभी मामलों पर भाजपा ने अपना असल रंग दिखाया है।

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उदय बुलेटिन
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