migrant workers on foot
migrant workers on foot|Google Image
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पैदल चल रहे इन गरीब मजदूरों पर सरकार को दया क्यों नहीं आती?

सरकार द्वारा तमाम ऐसे बयान दिए जाते है जिनका मतलब होता है कि आखिरी कतार में खड़े हुए व्यक्ति तक मदद पहुँच रही है लेकिन असलियत में ऐसा होता नहीं है, क्योंकि अगर मदद मिल रही है तो ये लोग पैदल क्यों चलते?

Shivjeet Tiwari

Shivjeet Tiwari

इतनी दूरी सिर्फ क़दमों पर :

ये जो चित्र आपकी आँखों के सामने से गुजर रहा है जिसमें एक महिला अपने पांच साल से भी कम उम्र के बच्चे को सूटकेस पर सुलाकर लिए जा रही है। ये चित्र रास्ते में लिए गया जब भारत समेत पूरा विश्व अंतरराष्ट्रीय मातृत्व दिवस मना रहा था।अब ये आपके लिए सवाल है कि कैसे कोई महिला मजदूर दिल्ली से महोबा तक की करीब 550 किलोमीटर की दूरी पैदल तय कर रही है और बच्चे को सूटकेस पर लादकर? ये चित्र और वीडियो सवाल पैदा करते है, ऐसे सवाल जो आपको झझकोर दें।

#Agra से दिल दुखाने वाला एक वीडियो, सूटकेस पर बच्चा लेटा, मां पैदल खींच रही, पंजाब से यूपी के लिए पैदल सफर पर परिवार.

Posted by Jitendra Sharma Journalist on Thursday, May 14, 2020

क्या ये सरकार द्वारा आम जनता से किये संवाद का टूटता तालमेल नही है?

एक ओर जहां देश के प्रधानमंत्री और लगभग हर प्रदेश के मुख्यमंत्री द्वारा घरो में रहने की अपील की गई और लोगों को यह भरोसा दिलाया गया कि उनको उनके जीवनोपयोगी बस्तुओं की कमी नहीं होने दी जाएगी लेकिन असल मे ये बात कितनी सच साबित हुई है इसके बारे में तो सिर्फ मजदूर ही बता सकते हैं। क्योंकि असल मुसीबतों से मजदूरों ने ही लड़ाई की है, एक ओर जहां दिल्ली जैसे राज्य के मुख्यमंत्री जो हमेशा केंद्र और दूसरे राज्यों पर आरोप लगाने से नहीं चूकते उनके बारे में मजदूरों के अलग ही ख्याल है एक मजदूर ने अपनी व्यथा कुछ इस प्रकार बताई:

"साहब वहां का माहौल बिल्कुल अलग है, वहाँ मजदूरों को काम निकलने के बाद ऐसे अलग थलग कर दिया गया जैसे मानो हम अछूत थे,राशन तो छोड़ दीजिए, कभी कभार पका पकाया खाना आता था तो वो भी बमुश्किल मिल पाता था। अब जब इस बीमारी से मरना ही है तो क्यों न अपने घर गांव जाकर मरे"

वहीँ उत्तर प्रदेश सरकार जो तमाम ट्रेन और बस चलाने की बात कर रही है तो फिर ये पैदल सड़को को नापते हुए मजदूर किस गोले से आये हैं?

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उदय बुलेटिन
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