उदय बुलेटिन
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इस बार राजभवन में देखने को मिली मायानगरी की माया

आज सुबह आंख खुलते ही महाराष्ट्र की राजनीति से जो खबर सुनने को मिली उसपर इतनी आसानी से यकीन करना संभव नहीं था पर सच तो यही था कि अब महाराष्ट्र के सीएम देवेन्द्र फडणवीस होंगे।

Puja Kumari

Puja Kumari

मायानगरी की मायावी देवी ने आज अपना जलवा रुपहले पर्दे की जगह राजभवन में दिखाया। महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के तुरंत बाद से चालू नाटकीय घटनाक्रम ने आज भोर में जब हम आप सो रहे थे तभी महाराष्ट्र की राजनीति ने एक रोचक मोड़ लिया। राज्य में देवेन्द्र फडणवीस ने मुख्यमंत्री और अजित पवार ने उपमुख्यमंत्री पद के लिए शपथ ली।

वहीं अगर आपको जरा भी याद होगा तो इस बात का संदेश तो पीएम ने संसद शीतकालीन सत्र शुरू होने से पहले ही दे दिया था जिस समय उन्होंने NCP और शरद पवार की तारीफ़ की थी। उस वक्त चारो तरफ सुगबुगाहट होने लगी थी कि महाराष्ट्र में कुछ अनोखा होने वाला है।

हालांकि इस तरह संवैधानिक प्रक्रिया को ताक पर रखते हुए सरकार बनाने की हड़बड़ी कई तरह के सवाल खड़े करती है। गोवा, कर्नाटक, फिर हरियाणा और अब महाराष्ट्र में जिस तरीके से सरकार बनाने की कवायद की गयी है उससे ऐसा लगता है जैसे हम किसी लोकतांत्रिक देश मे नहीं बल्कि मध्य एशिया के किसी अनिश्चित से देश के नागरिक हैं जहाँ पता नहीं होता कि अगले पल कौन देश की गद्दी संंभालेगा ?

महाराष्ट्र की सत्ता
महाराष्ट्र की सत्ता
ANI

लोकतांत्रिक संस्थाओं और मूल्यों का लगातार गला घोंटा जा रहा है। बीजेपी को सरकार बनाने के लिए बधाई दे रही लेकिन बधाई की मिठाई की मिठास कम और संदेहों की कड़वाहट ज़्यादा लिए हुए है। आखिर कब राज्यपाल ने राज्य में राष्ट्रपति शासन हटाने की अनुशंसा की?

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फडणवीस ने कब सरकार बनाने के लिए दावा पेश किया? क्या ये सारी चीजें पर्दे के पीछे चल रहीं थीं और अचानक से तख्तापलट हो गया। किसी भी हालात में सरकार बनाने को आतुर अमित शाह और बीजेपी संविधान और उसमें तय किये गए नियम कानून से भी खुद को ऊपर मानने लगे हैं ऐसा मालूम पड़ता है।

विभिन्न समाचार पत्र सूत्रों के अनुसार सुबह 5:47 पर राष्ट्रपति शासन हटाने का नोटिफिकेशन जारी किया गया लेकिन मीडिया को सूचना 9 बजे दी गयी। भोर 5:30 पर अजित पवार और देवेन्द्र फडणवीस राजभवन पहुंच गए थें। एक लोकतांत्रिक सरकार क्या ऐसे चोरी छुपे बनाई जानी चाहिए? बाद में NCP के 3 MLA ने आरोप लगाया कि उन्हें गलत जानकारी देकर राजभवन ले जाया गया था।

महाराष्ट्र में कैसे पलटी बाजी

जैसा कि कर्नाटक के एक विधायक ने दावा किया था कि उसे खरीदने के लिए येदियुरप्पा ने 1000 करोड़ रुपये का मूल्य लगाया था। क्या महाराष्ट्र में भी कांदा भाजी की तरह हमारे चुने हुए जन प्रतिनिधि खरीदे गए ? या जैसा कि शरद पवार दावा कर रहे हैं अजित पवार CBI आदि के डर से बीजेपी की गोद में जा बैठे हैं। भले ही महाराष्ट्र में सरकार ने शपथ ले ली हो लेकिन नंबर गेम में अभी भी वो 'जादुई अंक' से पीछे ही हैं। देखना ये है कि येनकेन प्रकारेण बनायी गयी सरकार कितने दिनों तक सत्ता का आनंद ले पाती है।