मौलाना साद
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कौन हैं मौलाना साद, आखिर कैसे बना 150 देशों के तबलीगी जमात का मालिक

कोरोना संकट के बीच जब से दिल्ली में मरजक कांड हुआ है तब से एक ही नाम गुंज रहा है और वो है मौलाना साद, इसलिए आज हम आपको इसके बारे में सबकुछ बताने जा रहे हैं।

Puja Kumari

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तबलीगी जमात, मरजक, ये सभी ऐसे शब्द हैं जो नए तो नहीं हैं मगर पिछले दिनों दिल्ली के निजामुद्दीन इलाके में घटी एक घटना के बाद कुछ इस तरह से चर्चा में आये हैं की पूरे देश में सिर्फ इसके बारे में ही बातें होने लगी है।

चर्चा की वजह भी बहुत ही ज्यादा ठोस और गंभीर है क्योंकि इस वक़्त सम्पूर्ण देश कोरोना संकट के दौर से गुजर रहा है और सरकार हर संभव प्रयास कर रही है की किसी भी तरह से देश के नागरिकों को इस संकट से निकला जा सके। जब ऐसा लग रहा था की हमारे देश में कोरोना को तक़रीबन थाम ही लिया गया है तो उसी वक़्त पर ना जाने कहाँ से ये तबलीगी जमात के लोग सामने आये और जैसे कोई बम फोड़ दिया।

असल में ये पूरा मामला शुरू हुआ दिल्ली के निजामुद्दीन क्षेत्र के तबलीगी जमात के मरकज से जहाँ पर लॉकडाउन के आदेश के बावजूद तक़रीबन 2000 से भी ज्यादा की संख्या में लोग जुटे हुए थे। अब इससे ही आप अंदाजा लगा सकते हैं कि यह कितनी ज्यादा खतरनाक परिस्थिति हो सकती है।

मगर उससे भी बड़ी बात ये कि आखिर इतने सारे लोग अपनी अपनी जान को जोखिम में डालकर आखिर किसके कहने पर यहाँ पहुंचे थे। कौन था इनका गुरु, आका, मास्टरमाइंड तो इन सबका जवाब हैं मौलाना साद। वही मौलाना साद जो इस तबलीगी जमात के मुखिया हैं। इनके ही इशारे पर हजारों बाशिंदे कोरोना वायरस जैसी महामारी को नजरंदाज करते हुए मरकज में आ पहुंचे थे और फिर वही किया जिसके लिए सरकार सुबह शाम सावधान कर रही है।

मौलाना साद
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कौन है मौलाना साद

देखा जाये तो मौलाना के बारे में जो भी कुछ जानकारी है उसके मुताबिक वो निज़ामुद्दीन बस्ती के 'लोकल बॉय' के रूप में जाने जाते हैं। वर्ष 1965 में दिल्ली में जन्मे मौलाना साद की प्राथमिक शिक्षा 1987 में हजरत निजामुद्दीन के मदरसा कश्फुल उलूम में हुई। सबसे खास बात तो ये है कि तबलीग़ी जमात की लीडरशिप उन्होंने कोई चुनाव या खौफ जाता कर नहीं पायी है बल्कि ये उन्हें विरासत में मिली है।

आपको ये भी पता होना चाहिये कि मौलाना साद कोई मामूली हस्ती नहीं है, इनके अनुयायी पूरी दुनियाभर में फैले हुए हैं। बताया जाता है कि मौलाना के पास इस्लाम से सम्बंधित ज्ञान का कोई खास भण्डार नहीं है मगर संस्था पर उनकी पकड़ काफी मजबूत है।

यही वजह है कि मौलाना साद के किसी भी बयान या तकरीर (सामान्य भाषा में उपदेश) को मुस्लिम समुदाय के बीच बेहद ही दिलचस्पी और उत्सुकता के साथ सुना जाता है। जमात में लोग उनसे हाथ मिलाने और उनकी झलक मात्र के लिए मौलाना साद की एक झलक देखने और उनसे हाथ मिलाने के लिए लोग बेताब रहते हैं।

मौलाना साद
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खुद को खुद ही घोषित कर दिया था जमात का प्रमुख

बताया जाता है कि वर्ष 1995 में जब तबलीगी जमात के मौलाना इनामुल हसन का इन्तकाल हो गया था तो उसके बाद जमात का नया प्रमुख बनाने पर काफी विवाद हुआ मगर कोई चुना नही जा सका। तत्पश्चात 10 सदस्यों वाली सूरा कमेटी की देखरेख में जमात का काम जारी रहा। बाद में साल 2015 में सूरा की स्थिति कुछ और भी नाजुक हो गयी जब अन्य मौलना का निधन हो जाने से कमेटी में सदस्यों की जगह खाली होते चली गयी। जिसके बाद मौलाना साद ने बड़ा कदम उठाते हुए खुद को तबलीगी जमात का प्रमुख यानी की अमीर ऐलान कर दिया। हा।

इस वाकये के बाद से ही दुसरे गुट ने मरकज से अलग हट कर एक जमात का काम फैज-ए-इलाही मस्जिद से शुरू कर दिया। मगर ध्यान देने वाली बात तो ये थी कि तबलीगी जमात से जुड़ा मुस्लिम समुदाय का बड़ा हिस्सा अभी भी निजामुद्दीन स्थित मरकज को ही अपना केंद्र मानता है। आलम ये हैं की दुनियाभर के तक़रीबन 150 से भी ज्यादा देशों की तबलीगी जमात के मुखिया है मौलाना साद।

मौलाना साद पर दर्ज है केस

फिलहाल तो तबगीली जमात के फाउंडर मेंबर मौलान मुहम्मद इलियास के पोते मौलाना साद पर लॉकडाउन का उल्लंघन करने पर दिल्ली पुलिस ने महामारी कानून 1897 के तहत एफआईआर दर्ज किया है। काफी विवादों के बाद मौलाना इन दिनों अंडरग्राउंड हैं और उनकी तलाश जारी है।

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उदय बुलेटिन
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