mask and hand sanitizer out from essential commodity
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मास्क और हैंड सैनिटाइजर हुए आवश्यक वस्तु लिस्ट से बाहर, सरकार ने कहा पर्याप्त आपूर्ति उपलब्ध

सरकार ने 13 मार्च को फेस मास्क और हैंड सैनिटाइजर को 100 दिन के लिए आवश्यक वस्तु घोषित किया था।

Shivjeet Tiwari

Shivjeet Tiwari

देश मे कोरोना की दस्तक के बाद मास्क और हैंड सेनेटाइजर समेत हैंड वाश की कालाबाजारी चरम पर हो गयी थी, साथ ही इनके दाम आसमान को छू रहे थे। हालांकि अब इन मामलों को देखने वाले मंत्रालय ने इनको एसेंशियल कमोडिटी लिस्ट से बाहर का रास्ता दिखा दिया है।

उपभोक्ता मामलों की केंद्रीय सचिव लीला नंदन में मीडिया को जानकारी देते हुए यह अवगत कराया कि मास्क और हैंड सेनेटाइजर अब "आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955 " की लिस्ट में शामिल नहीं रहे" (mask and hand sanitizer out from essential commodity) लीला नंदन ने कारण बताते हुए कहा कि अब देश में इन उत्पादों की उपलब्धता सहज है, देश मे पर्याप्त मात्रा में मास्क और सेनेटाइजर हैं और लगभग हर जगह उपलब्ध है और अब जमाखोरी के साथ मूल्य वृद्धि जैसी समस्या नहीं है। इसलिए इनका आवश्यक वस्तु लिस्ट में रहना जायज नहीं है।

क्यों किये गए थे शामिल ?

दरअसल जैसे ही भारत मे कोरोना की आहट हुई देश में मास्क और सेनेटाइजर को लेकर एक लहर सी चल पड़ी। निर्माताओ द्वारा इसे औने पौने दामों पर बेचा जाने लगा। चूंकि भारत मे एन 95 कैटेगरी के मास्क कम मात्रा में निर्मित होते थे इस वजह से भारत मे इनकी जमाखोरी और अधिक मूल्य पर बिक्री शुरू हो गयी थी। देखने मे यह पाया गया था कि 50 एम एल के हैंड सेनेटाइजर की बोतल का मूल्य 150 रुपये तक करके बेचा जा रहा था, बाद में खुद उपभोक्ता मामलों के मंत्री राम विलास पासवान को इस मामले में हस्तक्षेप करके 31 मार्च 2020 को जानकारी देनी पड़ी और बताया कि इन दोनों वस्तुओं को आवश्यक वस्तु की कैटेगरी में जोड़ दिया गया है जिसके बाद से इनका मूल्य अधिकतम 250 रुपये प्रति 500 एमएल तक ही सीमित रहेगा। हैंड सैनिटाइजर और मास्क का अवैध भंडारण और अधिक मूल्य पर बिक्री करना दंडनीय अपराध माना जायेगा।

क्या कहता है आवश्यक वस्तु अधिनियम ?

आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955 देश मे उन वस्तुओं की आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए बाध्य करता है जो आम जनमानस के लिए बेहद आवश्यक है, जिनमे खाद्य समाग्री इत्यादि शामिल होते हैं। इस अधिनियम का मुख्य उद्देश्य आम जनमानस को फेक व्यापारियों की जमाखोरी और गैर कानूनी तरीके से समाग्री के मूल्य बढ़ाने की रोकथाम के लिए लागू किया गया था।

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उदय बुलेटिन
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