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 लोकसभा चुनाव 2019
लोकसभा चुनाव 2019|Google
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लोकसभा चुनाव 2019: मोदी सेना के वो पांच सेनापति, जो 2019 की जंग से हो गए बाहर 

इस बार के लोकसभा चुनाव में बीजेपी के ये पांच दिग्गज नेता जो मैदार में नज़र नहीं आएंगे। 

AKANKSHA MISHRA

AKANKSHA MISHRA

भारतीय जनता पार्टी राम मंदिर के सहारे राजनीति में जगह बना पाई है। लेकिन ऐसा पहली बार हो रहा है कि चुनाव जीतने के लिए बीजेपी के पास राम मंदिर के बजाए कोई और मुद्दा हो। लोकसभा चुनाव 2019 की घोषणा से पहले बीजेपी राम के साथ थी और लगा था कि हर बार की तरह इस बार भी बीजेपी राम मंदिर को एजेंडा बना कर चुनाव लड़ेगी। लेकिन पुलवामा में हुए आतंकी हमले ने चुनाव की दिशा बदल दी अब इस चुनाव में मुद्दा राम मंदिर के बजाए राष्ट्रवाद बन गया है जिसके सहारे बीजेपी सियासी जंग को जीतने में लगी है। और राष्ट्रवाद के इस जंग में पार्टी ने राम मंदिर नायको को बहार का रास्ता दिखा दिया है।

साल 1984 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी ने हिन्दू वोट बैंक पर कब्ज़ा जमाया और 2 सीटों के साथ देश की सियासत में जगह बनाई थी। जिसके बाद लगातार आगे बढ़ते हुए भारतीय जनता पार्टी ने 2014 के लोकसभा चुनाव में पूर्ण बहुमत की सरकार बना ली। लेकिन साल 2019 का यह लोकसभा चुनाव अलग है, मुद्दे अलग है, मतदाता अलग हैं और नेताओं के चेहरे अलग हैं। पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का निधन हो चुका है। पार्टी ने आडवाणी, उमा भारती , मुरली मनोहर जोशी, विनय कटियार, कल्याण सिंह, कलराज मिश्र, साध्वी ऋतम्भरा, स्वामी चिन्मयानंद और राम विलास वेदांती जैसे बड़े नेताओं को चुनावी मैदान में नहीं उतारने का मन बनाया है।

लाल कृष्ण आडवाणी

भारतीय जनता पार्टी की नींव रहे आडवाणी को पार्टी ने दरकिनार करते हुए उनकी सीट से बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह को उतारने का फैसला किया है। आडवाणी गुजरात के गाँधी नगर सीट से लगातार जीतते रहे हैं। आडवाणी 8 बार लोकसभा के सदस्य रहे हैं।

उमा भारती

2014 के लोकसभा चुनाव में मुख्य किरदार निभाने वाली उमा भारती बीजेपी में सफलता की गारंटी हैं। 2014 में उमा भारती ने उत्तर प्रदेश के झांसी से लोकसभा चुनाव लड़ा और उन्हें मोदी मंत्रिमंडल में भारत की जल संसाधन, नदी विकास और गंगा सफाई मंत्री बनाया गया। उमा भारती मध्य प्रदेश की मुख्यमंत्री भी रह चुकी हैं। साध्वी ऋतम्भरा के साथ उन्होंने राम जन्मभूमि आन्दोलन में प्रमुख भूमिका निभाई थी । इस दौरान उनका नारा था "श्री रामलला घर आयेंगे मंदिर वहीं बनायेंगे"।

विनय कटियार

विनय कटियार बीजेपी में हिंदुत्व के चेहरे हैं। इस लोकसभा चुनाव में पार्टी ने उन्हें टिकट नहीं देने का फैसला लिया है। कटियार का जन्म देवीचरण कटियार एवं श्यामकली के यहाँ हुआ है । वह फैज़ाबाद (अयोध्या) से सन् 1991, '96 एवं '99 में क्रमशः 10वीं, 11वीं एवं 13वीं लोक सभा के लिए निर्वाचित हुए। वर्तमान में वह उत्तर प्रदेश से राज्यसभा में सदस्य है।

मूरली मनोहर जोशी

भारतीय जनता पार्टी ने इस बार मुरली मनोहर जोशी को टिकट नहीं देने का फैसला लिया है। हालांकि वह 2014 के लोकसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश के कानपुर से जीत कर सांसद पहुंचे थे। मूरली मनोहर जोशी की जगह सत्यदेव पचौरी कानपुर से चुनाव लड़ेगें। राम मंदिर आंदोलन में मुरली मनोहर जोशी ने बढ़ चढ़ कर हिस्सा लिया था। बाबरी मस्जिद विध्वंस के समय बीजेपी की कमान जोशी के हाथों थी।

कल्याण सिंह

कल्याण सिंह राम मंदिर निर्माण और अयोध्या आंदोलन के प्रमुख चेहरे हैं। वे वर्तमान में राजस्थान और हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल हैं। इससे पहले वो दो बार उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री रह चुके हैं और उन्हें 26 अगस्त 2014 को राजस्थान का राज्यपाल नियुक्त किया गया। उन्हें कट्टरपंथी हिन्दुत्व वादी के रूप में जाना जाता है और बाबरी मस्जिद विध्वंस में उनका कार्य विवादास्पद है। वर्ष 1991 में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री बने कल्याण सिंह को बाबरी मस्जिद विध्वंस के बाद इसकी नैतिक जिम्मेदारी लेते हुये 6 दिसम्बर 1992 को मुख्यमंत्री पद से त्यागपत्र दे दिया।