उदय बुलेटिन
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Ayodhya Verdict 
Ayodhya Verdict |Google

LIVE: अयोध्या में राम मंदिर बनने का रास्ता साफ़

खुदाई में जो मिला वो इस्लामिक ढांचा नहीं था।

फैसले से संतुष्ट नहीं, पुनर्विचार की मांग करेंगे : जफरयाब जिलानी

सुप्रीम कोर्ट ने अयोध्या मामले पर फैसला सुना दिया। मुस्लिम पक्ष के वकील जफरयाब जिलानी ने कहा कि वह सुप्रीम कोर्ट के फैसले संतुष्ट नहीं हैं। जिलानी ने कहा कि वह सुप्रीम कोर्ट के फैसले से सहमत नहीं हैं और फैसले पर पुनर्विचार करने की मांग करेंगे।

सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में मुस्लिम पक्ष को मस्जिद बनाने के लिए विवादित भूमि से अलग पांच एकड़ भूमि देने का फैसला सुनाया है।

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बड़े फैसले की बड़ी बातें:

लगभग सदियों पुराने न्यायिक मामले पर सुप्रीम कोर्ट ने अपना फैसला सुनाया, विवादित जमीन पर मंदिर का निर्माण ट्रस्ट के माध्यम से कराया जाएगा और साथ ही सुन्नी वक्फ बोर्ड को अयोध्या में ही ऐसी 5 एकड़ जमीन उपलब्ध कराई जाए जो सरलता से पहुचने योग्य हो , ये सब केंद्र सरकार को 3-4 महिने में ही करना होगा

  • विवादित जमीन पार राम जन्म भूमि न्यास का अधिकार.
  • फैसले से मुस्लिम पक्ष संतुष्ट नहीं
  • सुप्रीम कोर्ट ने कहा बोर्ड ऑफ़ ट्रस्टी बनाये सरकार
  • पक्षकार गोपाल विशारद को पूजा का अधिकार
  • रामलला न्यायिक संपत्ति है, ना कि राम जन्मभूमि : सुप्रीम कोर्ट
  • केंद्र, उप्र सरकार मंदिर, मस्जिद निर्माण की निगरानी करेंगे
  • अयोध्या में बुनियादी ढांचा इस्लामी नहीं : सुप्रीम कोर्ट
  • सुन्नी वक्फ बोर्ड, निर्मोही अखाड़ा को जमीन देने का इलाहाबाद हाईकोर्ट का फैसला गलत : एससी
  • सुप्रीम कोर्ट ने अयोध्या मामले पर फैसला सुनाते हुए कहा कि इस बात के सबूत हैं कि अंग्रेजों के आने से पहले हिंदू राम चबूतरा, सीता रसोई की पूजा करते थे।
  • विवादित स्थान पर राम जन्म की हिंदू मान्यता के स्पष्ट सबूत : सुप्रीम कोर्ट

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देश मे और खासकर उत्तर प्रदेश और अयोध्या में अभी तक हालात बेहद सामान्य है

  • किसी उन्माद या अफवाह की कोई सूचना नही है, प्रशासन बेहद सतर्क और चौकन्ना है
  • प्रशासन बेहद सतर्क और चौकन्ना है
  • मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ खुद इस मामले को बेहद नजदीकी से मॉनिटर कर रहे है
  • डीजीपी उत्तर प्रदेश पूरे प्रदेश के हर मिनिट का अपडेट लेते जा रहे है
  • सुप्रीम कोर्ट के फैसले का सम्मान करते हैं : इक़बाल अंसारी

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विष्णु शंकर जैन वकील हिन्दू महासभा ने कहा कि विकल्प के तौर पर दूसरे पक्ष के लिए 5 एकड़ जमीन का निर्धारण किया गया है

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इस फैसले में अनेकता में एकता का भाव नजर आता है, फैसले को लेकर उत्साहित वकीलों के समूह ने कोर्ट परिसर में ही जय श्री राम के नारे लगाए

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वरुण कुमार सिन्हा : सुप्रीम कोर्ट ने यह ऐतिहासिक फैसला दिया है

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सुप्रीमकोर्ट ने केंद्र सरकार को निर्देशित किया

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अयोध्या पर हाईकोर्ट के फैसले के 9 साल बाद आया सुप्रीम कोर्ट का फैसला

अयोध्या मामले में साल 2010 में इलाहाबाद हाईकोर्ट द्वारा 2 :1 के अनुपात में दिए गए फैसले के नौ साल बाद आज सुप्रीम कोर्ट का फैसला आया है। हाईकोर्ट ने अपने फैसले में विवादित 2.77 एकड़ भूमि को तीनों पक्षों- रामलला, सुन्नी वक्फ बोर्ड और निर्मोही अखाड़े में बरावर बांटा था। हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने 30 सितंबर 2010 को अपने फैसले में विवादित भूमि पर हिंदुओं और मुस्लिमों को संयुक्त रूप से मालिक माना था।

हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा था कि मुख्य गुंबद के नीचे, जहां भगवान राम और अन्य देवताओं का अस्थाई मंदिर स्थित है, वह जमीन हिंदुओं की है।

तीनों न्यायाधीशों ने यह निर्णय सर्वसम्मति से लिया था कि मुख्य गुंबद के नीचे की जमीन हिंदुओं को मिलनी चाहिए।

इलाहाबाद हाईकोर्ट का फैसला 6,000 पन्नों पर दिया गया था।

हाईकोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई, जिसने नौ मई 2011 को हाईकोर्ट के आदेश पर रोक लगा दी।

सुप्रीम कोर्ट में अपनी बहस आगे बढ़ाते हुए हिंदू पक्षों ने कहा कि हिंदुओं की मान्यताओं का विभाजन नहीं हो सकता और पूरी विवादित जमीन पर कब्जे का दावा किया।

'शेबैत' (देवता की सेवा करने वाला भक्त) होने का दावा करने वाले निमोर्ही अखाड़ा ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि जमीन का टुकड़ा भगवान राम की जन्मभूमि है और यह उसी का है।

अखाड़ा ने अपनी दलीलों में कहा, "यह अखाड़ा के अधिकार में है, जो इसके महंत और सरबराहकार के जरिए प्रबंधक के रूप में काम करता रहा है।"

रामलला के वकीलों ने तर्क दिया कि फिलहाल के लिए शेबैत एकमात्र व्यक्ति है जो मूर्ति के हितों की रक्षा करने के लिए सक्षम है, समर्पित संपत्ति पर उसका अधिकार है।

हिंदू पक्ष के मुकदमों के जवाब में मुस्लिम पक्ष के वकील ने ज्यादा दलील दी है।

मुस्लिम पक्ष ने दावा किया, "आंतरिक और बाहरी प्रांगण के साथ-साथ विवादित ढांचे के बारे में मौजूद मुकदमे सभी अलग-अलग प्रेयर्स के साथ दायर किए गए हैं। जबकि मुकदमा एक को केवल पूजा के अधिकार का दावा करने के लिए दायर किया गया था, मुकदमा तीन (निर्मोही अखाड़ा) कथित मंदिर के प्रबंधन व प्रभार के लिए दायर किया गया था। केवल मुकदमा चार (सुन्नी वक्फ बोर्ड) और मुकदमा पांच (राम लला) ऐसे हैं, जिसमें कि पक्षों ने विवादित संपत्ति पर अधिकार का दावा किया है।"

सुन्नी वक्फ बोर्ड पहले ही हाईकोर्ट के फैसले से असहमति जता चुका है।

सुन्नी वक्फ बोर्ड ने अपनी दलील में विवादित स्थल को सार्वजनिक मस्जिद बताया है।

प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पांच न्यायाधीशों की पीठ ने 16 अक्टूबर को इस विवादास्पद मुद्दे पर अपनी सुनवाई पूरी की थी। पीठ के अन्य सदस्यों में न्यायमूर्ति एस.ए. बोबडे, न्यायमूर्ति अशोक भूषण, न्यायमूर्ति डी.वाई चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति एस.ए. नजीर शामिल हैं।

इससे पहले, सुप्रीम कोर्ट ने इस विवादित मुद्दे को सुलझाने के लिए मध्यस्थता का आदेश दिया था, लेकिन यह विफल रहा। आखिरकार अगस्त में शीर्ष अदालत ने मामले में सुनवाई शुरू की। पीठ ने 16 अक्टूबर को सुनवाई पूरी करने के बाद मामले पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था।

सुनवाई कर रही पीठ के अध्यक्ष और प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई 17 नवंबर को रिटायर हो रहे हैं।

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पुलिस ने शोसल मीडिया पर कुछ अफवाहों को तूल देता पकड़ा, आरोपियों के विरुद्ध कार्यवाही शुरू, राजस्थान के अधिकतर जिलों में निषेधाज्ञा धारा 144 डिप्लॉय की गई

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अजमेर में शाम 6 बजे तक के लिए इंटरनेट टेम्पररी तौर पर बाधित कराया गया

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सुप्रीम कोर्ट फैसले के उपसंहार की ओर बढ़ता जा रहा है

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ब्रिटिश राज्य के पहले भी वहां इन स्थानों की पूजा होती आ रही है

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स्थल पर राम का जन्म हुआ विश्वास के कारण है जो बेहद निजी है

सुप्रीम कोर्ट ने मामले में आगे कहा कि हिन्दू समाज यह विश्वास करता है कि विवादित स्थल भगवान राम का जन्मस्थान है और मुस्लिम इसे बाबरी मस्जिद के रूप में आस्था रखते है, हालकि विश्वास बेहद निजी मामला है लेकिन हिन्दुओ का यह विश्वास और मत की यहाँ श्री राम पैदा हुए थे वो किसी प्रकार से विवादित नही है

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अयोध्या मामला में फैसले को जीत हार के भाव से न लें : केशव प्रसाद मौर्य

अयोध्या भूमि विवाद को लेकर सुप्रीम कोर्ट शनिवार को अपना फैसला सुनाने वाला है। इस बीच, उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने जनता से फैसले को जीत और हार के भाव से नहीं लेने की अपील की है। केशव प्रसाद ने शनिवार को ट्वीट कर कहा, "श्रीराम जन्मभूमि मामले में आज सर्वोच्च न्यायालय से आने वाले फैसले को जीत और हार के भाव से न लें आपसी सौहार्द शांति एकता बनाए रखें फैसले का आदर और स्वागत करें।"

ज्ञात हो कि श्रीरामजन्मभूमि-बाबरी मस्जिद भूमि विवाद में सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने से पहले ही अयोध्या में सुरक्षा घेरा सख्त हो गया है। पंचकोसी परिक्रमा समाप्त होते ही विवादित परिसर के एक किलोमीटर परिधि में सुरक्षा बेहद कड़ी कर दी गई है।

इससे आधी अयोध्या तमाम बंदिशों से घिर गई है। मोहल्लों में आने-जाने के रास्तों पर बैरिकेडिंग करके पुलिस-पीएसी के साथ अर्धसैनिक बल के जवान तैनात किए गए हैं। वहीं, उत्तर प्रदेश के सभी स्कूल-कॉलेजों सहित सभी शिक्षण संस्थान को 9 नवंबर से सोमवार 11 नवंबर तक बंद रखने का आदेश दिया गया है।

जस्टिस गोगोई ने शिया वक्फ बोर्ड की सिंगल लीव पिटीशन खारिज कर दी , जिसे 1946 फैजाबाद कोर्ट के आदेश के विरुद्ध दायर किया गया था

सुप्रीम कोर्ट ने विवादित जमीन को राजस्व जमीन का हिस्सा बताया, यह भी बताना सुनिश्चित किया कि विवादित जमीन पर मस्जिद का निर्माण मीर बांकी ने कराया था

सुन्नी बक्फ बोर्ड को 5 एकड़ जमीन देने का आदेश

कोर्ट ने पढ़ते वक्त यह बताया कि निर्मोही अखाड़ा का दावा प्रबंधन से जुड़ा हुआ है , वह किसी विशेषाधिकार की मांग के लिए नही है

मंदिर निर्माण के लिए ट्रस्ट बनाने का आदेश।

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