जामिया की सुनो लेकिन माखन लाल चतुर्वेदी पर सब खामोश

आखिर कोई शिक्षक जातिबाद कैसे कर सकता है?
जामिया की सुनो लेकिन माखन लाल चतुर्वेदी पर सब खामोश
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Summary

सरकार और समाज सब दोहरे मापदंडों के लिए जिंदा रहने लगा है। तभी वर्ग और समुदाय विशेष के व्यक्तियों को तथ्य विशेष को सुनने के लिए मजबूर किया जा रहा है। लेकिन दूसरी ओर अगर किसी को किसी व्यक्ति विशेष या उसके आचरण या फिर उसके वक्तव्यों पर आपत्ति है तो उनका न सिर्फ बहिष्कार किया जा रहा है बल्कि किसी अपराधी की तरह पेश किया जा रहा है।

दिलीप मंडल को मीडिया में कुछ ऐसा महसूस हो रहा है:

आखिर बवाल क्या है ? :

बवाल की मुख्य बात यह है कि विश्वविद्यालय से निष्कासित छात्रों ने पक्ष में यह दलील दी है कि प्रोफेसर दिलीप मंडल जब भी लेक्चर देने आते है तो वह विद्यार्थियों से उनकी जाति देखकर उनसे भेदभाव करते है और यह जानकर की उक्त व्यक्ति सवर्ण है तो उसपर दलितों के ऊपर अत्याचार करने की तोहमत लगाते है। और साथ ही भरी कक्षा में बेइज्जत करते है। छात्रों ने बताया कि हम उनके व्यवहार से आहत थे साथ ही छात्रों ने बताया कि उनके इस बर्ताव को लेकर उन्होंने विश्वविद्यालय प्रशासन से उनके द्वारा हमे न पढ़ाने की बात कही जिसपर प्रशासन ने उक्त छात्रों पर अनुशासन कायम करने के तहत विश्विद्यालय से निष्कासित कर दिया है।

सरकार की शह पर हो रहा काम :

छात्रों ने वर्तमान सरकार पर यह आरोप लगाया कि सरकार के इशारे पर ही विश्वविद्यालय ने यह कार्यवाही की है। तथा प्रशाशन के इशारे पर ही इन सभी 23 छात्रों को किसी अपराधी की तरह घसीट कर विश्वविद्यालय से पुलिस ने बाहर निकाला। छात्रो ने बताया कि इस खबर को सरकार ने अपने बलबूते पर मीडिया को साधने के भी काम हुआ है। अब जब जामिया के छात्रों के साथ पूरा देश खड़ा है उसके बाद माखनलाल विवि में हुए अत्याचार पर किसी का ध्यान नही जा रहा।

इन छात्रों को निष्काषित किया गया:

List Of Suspended Students 
List Of Suspended Students Social Media

मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह द्वारा इस मामले में ट्वीट:

कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह छात्रो की राजनीति पर सवाल उठाते हुए नजर आए:

कौन है दिलीप मंडल :

सोशल मीडिया में अच्छे खासे सक्रिय प्रोफेसर है जितना किसी कक्षा में एक्टिव न होते होंगे उस से ज्यादा ट्विटर पर एक्टिव रहते है किसी मुद्दे को लेकर ट्विटर पर ट्रेंड कराने में माहिर है। ट्विटर पर ब्लू टिक न मिलने पर भी काफी दिनों तक परेशान रहे। ट्विटर पर खुद को दलित विचारक बताते है, दलितों के संबंध पर लिखते है और समाज के कुछ वर्गों को खासकर निशाना बनाते है, और हां ये कभी गलत नही होते, सिर्फ कमियां निकालने की क्षमता रखते है, किताबे भी लिखते है, कुलमिलाकर प्रोफेसर होने के साथ-साथ काफी कुछ और भी है.

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उदय बुलेटिन
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