Mumbai Grocery Delivery Boy Case
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मुंबई में मुस्लिम डिलीवरी ब्यॉय मामले में आया रोचक मोड़, खुद गजानंद ने बताई सच्चाई।

आखिर डिलीवरी ब्यॉय ने सामान लेने के लिए गजानंद चतुर्वेदी पर दवाब क्यों बनाया? सामान लेना है या नहीं यह कौन तय करेगा अब?

Shivjeet Tiwari

Shivjeet Tiwari

पुलिस द्वारा आरोपी बनाए गए गजानंद चतुर्वेदी के अनुसार न तो पुलिस ने उनका पक्ष जानने की कोशिश की और न ही उस डिलीवरी ब्वाय की हरकतों पर किसी ने सवाल खड़े किए। डिलेवरी वापस करने का कारण कुछ अलग ही था, गजानन ने यह भी कहा है ये बहुत बड़ी साजिश है।

गजानंद चतुर्वेदी ने बताई सामान न लेने की वजह :

आप सब का सहयोग चाहिए 🙏🙏🙏🙏🙏🙏 यह मेरे बड़े भैया हैं गजानंद चतुर्वेदी जी जो कि मुंबई में रहते हैं 2 दिन पहले डिलीवरी ब्वॉय...

Posted by गौरव कुमार चौबे on Thursday, April 23, 2020

मुम्बई निवासी गजानंद चतुर्वेदी ने डिलीवरी ब्वाय पर मामले को सनसनीखेज बनाने और गलत तरीके से फंसाने का आरोप लगाते हुए बताया कि उनकी बड़ी बिटिया जो की हैदराबाद में रहती है उसने हमारे लिए कुछ आवश्यक सामानों का ऑर्डर दिया था जिसको यह डिलीवरी ब्वाय लेकर आया था। लेकिन जैसे ही हम पति-पत्नी आर्डर लेने बिल्डिंग के नीचे पहुंचे तो हमें इस व्यक्ति की हालत संदिग्ध नजर आयी, गजानंद के अनुसार व्यक्ति अपने हांथो में ग्लब्स नहीं पहने हुए था, साथ ही उसने अपने मुँह से मास्क उतार रखा था, वह बार-बार अपने हांथो से शरीर के तमाम हिस्सो को छू रहा था या खुजला रहा था। हमने जब यह देखा तो कोरोना वायरस के लिये सरकार द्वारा जारी किए गए सुरक्षा मानकों और नियमो का खयाल आया।

पता करने पर लड़के ने बताया कि वह कोरोना का एक प्रकार से हब बन चुके इलाके नया नगर से सामान लाया है, इस पर गजानंद ने संदेह जताया कि जहां कोरोना की वजह से सब कुछ बंद है वहां से डिलीवरी के लिए कोई सामान लेकर कैसे निकल सकता है? वो भी सुरक्षा मानकों को ताक में रखकर, बिना मास्क बिना ग्लब्स और जिस महामारी के डर से लोग अपने हाँथ से मुँह को छूने से डर रहे है उस वक्त यह लड़का शरीर के तमाम हिस्सों को छू रहा है। इस पर गजानंद के अनुसार हमने डिलेवरी लेने से मना कर दिया।

उसके बाद लड़के ने मोबाइल निकाला :

मामले में आरोपी बनाये गए गजानंद ने बताया कि जैसे ही हमने समान लेने से मना किया तो उसने मोबाइल निकाल कर वीडियो बनाना शुरू कर दिया और खुद के लिए वो बाते कही जो मैंने कही ही नहीं। जिसमे उसके मुस्लिम होने और न होने की बात कही, इस पर भी मैंने साफ यह कहा कि मुझे कुछ नहीं करना तुम्हे जो अच्छा लगे वही समझो। मुझे तुमसे समान नहीं लेना तो नहीं लेना। मुझे इस पूरे वीडियो में न तो मुस्लिम शब्द और न ही इस तरह का कोई वाक्य कहते हुए सुना जा सकता है।

इसके पीछे है ताकते :

गजानंद ने बताया कि उन्हें पता है कि इसके पीछे किसका हाँथ है, इसके पीछे एक बड़ा विरोधी वर्ग लगा हुआ है इसीलिए पुलिस ने बिना मेरा पक्ष जाने मुझ पर 295 के तहत मुकदमा दर्ज कर दिया। ये सब एक सोची समझी साजिश के तहत हुआ है।गजानंद ने आगे बताया कि अब जब सरकारे कोरोना के बचाव के लिए अनेक नियमावली लागू कर रही है उस वक्त में मुझे कैसे कोई उस आर्डर को लेने के लिए बाध्य कर सकता है। मेरा सामान लेना और नही लेना दोनो मेरे निजी निर्णय पर आधारित है। किसी भी प्रकार से कानूनों द्वारा भी मुझे बाध्य नहीं किया जा सकता।

समय नाजुक है:

गजानन्द के अनुसार जब पूरे देश मे सब्जियों को नाले में धुलने, पेशाब को फलों के ऊपर डालने और फलों पर थूक लगाकर बेचने के मामले सामने आ रहे है उस वक्त में सतर्कता बरतना बेहद आवश्यक है। गजानंद ने बताया कि मुस्लिम वाली बात केवल डिलीवरी ब्वाय के द्वारा जोड़ी गयी है उस वीडियो में मुझे एक बार भी इस बात को कहते हुए नही सुना जा सकता। लेकिन अगर मैं ऐसा करता भी तो यह एतिहातन ही होता। मेरा निजी निर्णय है कि मैं सामान खरीदूँ या नही।

मामले पर समाचार प्रदाता मन माफिक जानकारी दे रहे है:

अब इस मामले का धार्मिकरण कहे या फिर मीडिया की मनमानी आधी अधूरी खबरों को चटखारा बनाकर पेश किया गया है, सबसे पहले हमने हिंदी न्यूज पोर्टल द वायर का रुख किया तो इस पोर्टल पर सिर्फ इस नजरिए को दिखाने की कोशिश की है कि सिर्फ मुस्लिम होने की वजह से डिलीवरी लेने से मना कर दिया गया और इस खबर में महिला पुरुष दोनों को पिता पुत्री बताया गया है जबकि असलियत यह है दोनो पति पत्नी है।

ठाणे ज़िले के कशीमीरा इलाके का मामला. पुलिस ने धार्मिक भावना को आहत करने के उद्देश्य से दुर्भावनापूर्ण हरकत करने का...

Posted by The Wire Hindi on Thursday, April 23, 2020

किसी भी मुद्दे को बिना पड़ताल के इस तरह की हवा देना भी एक प्रकार से दूसरे पक्ष के सम्मान को ठेस पहुचाने जैसा है। शायद यही वजह है कि उत्तर प्रदेश में द वायर के संपादक सिद्धार्थ वरदराजन के ऊपर मुकदमा दर्ज कराया है।

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