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 न्यायमूर्ति रंजन गोगोई व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद
न्यायमूर्ति रंजन गोगोई व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद
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जस्टिस रंजन गोगोई ने भारत के 46वें प्रधान न्यायाधीश पद की शपथ ली 

न्यायमूर्ति दीपक मिश्रा के प्रधान न्यायाधीश पद से सेवानिवृत्त होने के बाद न्यायमूर्ति रंजन गोगोई देश के 46वें प्रधान न्यायाधीश बने हैं।

AKANKSHA MISHRA

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नई दिल्ली: न्यायमूर्ति रंजन गोगोई ने बुधवार को भारत के प्रधान न्यायाधीश के रूप में शपथ ली। गोगोई (64) सर्वोच्च अदालत में शीर्ष स्थान हासिल करने वाले पूर्वोत्तर भारत के पहले न्यायाधीश हैं। न्यायमूर्ति गोगोई को राष्ट्रपति भवन में एक समारोह में राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने शपथ दिलाई। इस अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी व केंद्रीय मंत्री अरुण जेटली, राजनाथ सिंह और रविशंकर प्रसाद भी मौजूद थे।

इसके साथ ही लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन, पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, एच.डी. देवगौड़ा व वरिष्ठ कांग्रेस नेता मल्लिकार्जुन खड़गे भी मौजूद थे।

न्यायमूर्ति दीपक मिश्रा के प्रधान न्यायाधीश पद से सेवानिवृत्त होने के बाद वह देश के 46वें प्रधान न्यायाधीश बने हैं।

दीपक मिश्रा का कार्यकाल दो अक्टूबर को समाप्त हो गया था और सोमवार को शीर्ष अदालत में उनके कार्यकाल का आखिरी दिन था।

न्यायमूर्ति गोगोई 13 महीने 15 दिन तक (17 नवंबर 2019 तक) कार्यभार संभालेंगे।

न्यायमूर्ति गोगोई शीर्ष अदालत के उन चार वरिष्ठ न्यायाधीशों में शामिल हैं जिन्होंने जनवरी में अप्रत्याशित रूप से प्रेस सम्मेलन कर प्रधान न्यायाधीश न्यायमूर्ति दीपक मिश्रा द्वारा न्यायाधीशों को मामलों के आवंटन पर सवाल उठाया था।

शपथ ग्रहण समारोह में महान्यायवादी के.के. वेणुगोपाल, पूर्व महान्यायवादी मुकुल रोहतगी, प्रतिष्ठित कानूनविद फाली नरीमन, सर्वोच्च अदालत के बार संघ के अध्यक्ष विकास सिंह भी मौजूद थे।

न्यायमूर्ति गोगोई वर्ष 1978 में बार में शामिल हुए थे और उन्होंने गुवाहाटी उच्च न्यायालय में प्रैक्टिस की थी जहां वह 28 फरवरी, 2001 में स्थाई न्यायाधीश नियुक्त किए गए।

इसके बाद उन्हें नौ सितंबर 2010 को पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय में स्थानांतरित कर दिया गया और 12 फरवरी, 2011 को इसका मुख्य न्यायाधीश बनाया गया। गोगोई 23 अप्रैल, 2012 को शीर्ष अदालत के न्यायाधीश नियुक्त हुए।