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Justice for Hyderabad Veterinary Doctor
Justice for Hyderabad Veterinary Doctor|Uday Bulletin 
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वो बीमार जानवरों का इलाज करती थी, लेकिन असल मे बीमार तो समाज था, इंसान था, इसका इलाज कैसे हो ?

हमें भूलने की आदत है जो आज हुआ कल भूल जायेंगे, हमारे जेहन में सिर्फ वही घटना जीवित रहती है जो हमारे साथ या हमारे किसी करीबी के साथ घटित होती है।हम निर्भया को भूल गए और इसको भी भूल जायेंगे ! 

Shivjeet Tiwari

Shivjeet Tiwari

Summary

पत्रकारिता के आयाम बहुत होते हैं कोई “वॉर जर्नलिस्ट” होता है तो कोई क्राइम का पत्रकार, किसी की पकड़ सत्ता पर ज्यादा होती है तो कोई फिल्मी सितारों के दुधमुंहे बच्चो को सनसनी बनाता रहता है, लेकिन हम बात करेंगे समाज की, असल समाज की, बिना किसी लाग लपेट के, बिना किसी लेकिन परन्तु के।

किस्सा कहाँ से शुरू करें ये एक समस्या है, समस्या दरअसल छोर से नहीं है बल्कि पूरे आयाम से है जिस आधार पर यह घटना घटी वह दर्द से भरी हुई है

आखिर उम्र 26 की होती ही कितनी है, इस उम्र में जानवरों का इलाज करना जिसमें कुत्ता, भैस, गाय यहाँ तक कि जंगली जानवर भी शामिल है, उस वेटनरी डॉक्टर ने कितने जानवरों को उनकी तकलीफों से मुक्त कराया होगा ये तो उसके द्वारा हैंडल किये गए केसों की पड़ताल करने पर ही पता चलेगा लेकिन वास्तव में उसने जिन जानवरों का इलाज किया था वो तो सिर्फ जानवर थे उनमें स्नेह का भाव होता है तभी तो वो पालतू बनाये जा सकते है।

लेकिन इन जानवरों का क्या जिन्होंने एक अकेली लड़की को सुनसान जगह देखा और अपनी हैवानियत के दायरे फैलाने शुरू कर दिए।

स्कूटी पंचर करना एक जाल का हिस्सा था:

ब्लात्कार के आरोपी चारो लोग ट्रक परिवहन में शामिल थे जिंनमे मुख्य आरोपी लगभग 26-27 वर्ष की उम्र का है बाकी की उम्र करीब 20 साल के अंदर है अकेली लड़की को देखकर सबसे पहले इन आरोपियों ने स्कूटी को पंचर करने की योजना बनाई और दुखद यह रहा कि वो अपनी योजना में सफल भी रहे

बाद में उन्होंने गाड़ी का पंचर ठीक कराने की बात कही और उसे ज्यादा जोर देकर ठीक कराने की बात कही, हालाँकि महिलाओ के अंदर नजर पहचान लेने किआ अद्भुद क्षमता होती है जिसकी वजह से डॉक्टर ने घर पर अपनी बहन को अनजाने भय की बातें बताई और इसके बाद फोन लगातार बंद रहा।

पुलिस ने तत्परता दिखाई होती तो ये न होता:

सनद रहे पीड़िता ने सबसे पहले खतरे को भांप कर अपने परिजनों को सूचित किया और परिजनों ने मौके की नजाकत को देखते हुए नजदीकी पुलिस स्टेशन में इसकी इत्तला भी दी, लेकिन पुलिस अपने काम में उतनी मगशूल नहीं हुई जितना उसे होना था नतीजा यह हुआ कि पीड़िता को घटनास्थल से करीब 25 किमी दूर ले जाकर सारी रात दरिंदगी की गई, और अंत मे ज्वलनशील पदार्थ डाल कर जिंदा जला दिया गया।

हम गजब के भुलक्कड़ साबित हुए :

मजाल क्या की ऐसा कोई वाकया हो और हम मोमबत्ती न उठाये हम चौराहे जाम न करें, ज्ञापन न दें, अगर हमारी पहुँच सितारों की दुनिया में है तो हम अपना ज्ञान सोशल मीडिया पर भी बघारेंगे लेकिन जैसे ही मामले पर धूल पड़ेगी हम भूल जाएंगे और अपने दिमाग मे वह चीज बिठाएंगे की ऐसा कभी हुआ ही नहीं याद करिये हम कितनी घटनाओं को भुला चुके हैं।

अभी देखिएगा कोई कानून का रखवाला मानव अधिकार की बात करेगा:

मामला फास्ट ट्रैक कोर्ट हैंडल करेगा सजा होगी लेकिन क्या आपको पता है कि निर्भया के बलात्कारियों को फांसी दी गयी ?

हमें तो याद है कि कुछ बलात्कारियों को सिलाई मशीन देकर अच्छा आदमी बनाने की कोशिश की गई!

सिलाई मशीन पाप धोने की मशीन नही होती साहब।

अब समाज को फैसले की जिद पर अड़ना चाहिए तुरंत फैसला और तुरंत फांसी क्योंकि बालात्कार अब रोग की तरह फैल रहा है जिसका निदान बेहद जरूरी है।