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आतंकियों के प्रधान, जिहादी इमरान खान !

UN के मंच से इमरान ने परमाणु युद्ध की धमकी दी।

Abhishek

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आतंकिस्तान के प्रधानमंत्री की 10 बड़ी बातें जो उन्होंने UN के मंच से बोली:

  1. मैं कश्मीर में होता तो बन्दूक उठा लेता।
  2. 9/11 से पहले श्रीलंका में हिन्दू आत्मघाती हमले करते थे।
  3. कश्मीर में कर्फ्यू हटते ही भयंकर रक्तपात होगा।
  4. कश्मीर के लिए 130 करोड़ मुसलमान चरमपंथी बन जायेंगे।
  5. दुनिया भर के नेता स्थितियों की गंभीरता नहीं समझ रहे हैं।
  6. 9/11 के बाद इस्लामोफोबिया तेज़ी से बढ़ रहा है।
  7. अगर भारत-पाकिस्तान में युद्ध हुआ, तो परंपरागत युद्ध नहीं होगा, बल्कि परमाणु युद्ध होगा।
  8. हम भारत के सामने सरेंडर नहीं करेंगे, जान दे देंगे।
  9. मुस्लिम अन्याय के खिलाफ हथियार उठा रहे हैं।
  10. मुजाहिदीनों को दुनिया में आतंकी घोषित किया जा रहा है।

इमरान ने UNGA के मंच से फिर अलापा कश्मीर राग:

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने शुक्रवार को संयुक्त राष्ट्र महासभा के सत्र में अपने संबोधन के दौरान एक बार फिर कश्मीर मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि कश्मीर से कर्फ्यू हटने के बाद वहां काफी खून-खराबा होगा। इससे पहले भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यहां अपने संबोधन में दुनिया को शांति का संदेश दिया। इमरान ने परमाणु युद्ध की धमकी देते हुए कहा, "मैं सोचता हूं कि मैं कश्मीर में होता और 55 दिनों से बंद होता, तो मैं भी बंदूक उठा लेता। आप ऐसा करके लोगों को कट्टर बना रहे हैं। मैं फिर कहना चाहता हूं कि यह बहुत मुश्किल समय है। इससे पहले कि परमाणु युद्ध हो, संयुक्त राष्ट्र को कुछ करना चाहिए। हम हर स्थिति के लिए तैयार हैं। अगर दो देशों के बीच युद्ध हुआ तो कुछ भी हो सकता है।"

उन्होंने कहा, "कश्मीर में लोगों को जानवरों की तरह क्यों बंद कर दिया गया है। वे इंसान हैं। कर्फ्यू उठ जाएगा तो क्या होगा। तब मोदी क्या करेंगे। उन्हें लगता है कि कश्मीर के लोग इस स्थिति को स्वीकार कर लेंगे? कर्फ्यू उठने के बाद कश्मीर में खून की नदियां बहेंगी, लोग बाहर आएंगे। क्या मोदी ने सोचा कि तब क्या होगा?"

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री ने इसके अलावा इस्लामोफोबिया का भी मुद्दा उठाया।

इमरान ने भारत पर निशाना साधा, मुस्लिम समुदाय से अपील की:

इमरान खान ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में अपने भाषण में कश्मीर मुद्दे पर अपना ध्यान केंद्रित करते हुए भारत पर निशाना साधा। उन्होंने अपने संबोधन में उन्हीं सब बातों को दोहराया, जो वह बीते कुछ सप्ताह से कर रहे थे। इमरान खान ने शीर्ष विश्व फॉरम को भी अपने संप्रदायिक दृष्टिकोण से नहीं बख्शा। उन्होंने खुले तौर पर 'आरएसएस के भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी' द्वारा 'मुस्लिमों के जातीय नरसंहार' के खिलाफ वैश्विक मुस्लिम भावना से अपील की।

पाकिस्तान विदेश कार्यालय के प्रवक्ता मोहम्मद फैसल ने ट्वीट किया, "जब प्रधानमंत्री ने मोहम्मद पैंगबर का संदर्भ दिया, कई मुस्लिम राजनयिक के आंखों में आंसू थे। इस भाषण को याद किया जाएगा, आने वाले समय में इसका संदर्भ दिया जाएगा।"

अपने देश और इसकी समस्या को नजरअंदाज करते हुए, इमरान खान ने अपना ध्यान पूरी तरह से कश्मीर पर दिया।

उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि भारत के जम्मू एवं कश्मीर में जब कर्फ्यू हटेगा, तब वहां खूनखराबा होगा। तब क्या होगा। क्या किसी ने इस बारे में सोचा है।

मोदी पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा, "नस्लीय श्रेष्ठता की भावना और घमंड की वजह से आदमी गलतियां करता है और गलत निर्णय लेता है।"

उन्होंने पांच अगस्त को जम्मू एवं कश्मीर को विशेष राज्य का दर्जा देने वाले अनुच्छेद 370 को हटाए जाने का संदर्भ दिया।

इमरान खान ने चेतावनी देते हुए कहा कि 'तब एक और पुलवामा होगा और तब भारत पाकिस्तान पर आरोप लगाएगा।'

जम्मू एवं कश्मीर में 14 फरवरी को पाकिस्तान स्थित जैश-ए-मुहम्मद के ऑपरेटिव द्वारा किए आत्मघाती हमले में 40 भारतीय जवान शहीद हो गए थे।

उन्होंने कहा, "आरएसएस मुस्लिमों के जातीय सफाये पर विश्वास करता है और प्रधानमंत्री मोदी आरएसएस के नेता हैं।"

लगातार इस्लाम और मोहम्मद पैगंबर का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा, "मोहम्मद पैगंबर हमारे दिलों में बसते हैं और दिल का दर्द शरीर के दर्द से ज्यादा बड़ा है।"

परमाणु तबाही की धमकी इमरान की अस्थिरता दर्शाता है ना कि राजनीतिज्ञता:

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने अपने संबोधन के दौरान कश्मीर और अन्य मुद्दों पर भारत पर हमला किया, जिसके बाद भारत ने अब पाकिस्तान को करारा जवाब दिया है। भारत ने कहा कि परमाणु हमले की धमकी देना इमरान खान की अस्थिरता दर्शाता है ना कि उन्हें राजनीतिज्ञ बताता है।

यूएनजीए में इमरान के नफरत भरे भाषण पर भारत ने दिया करारा जवाब:

भारत ने पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान खान के कश्मीर पर दिए नफरत भरे भाषण के बाद पलटवार करते हुए करारा जवाब दिया है। भारत ने कहा कि इमरान के भाषण में अपरिपक्वता नजर आई है और पाकिस्तान ने जहां आतंकवाद को बढ़ावा दिया है और अपना निचला स्तर दिखाते हुए नफरत भरा भाषण दिया है, वहीं भारत जम्मू-कश्मीर में मुख्यधारा के विकास के साथ आगे बढ़ रहा है। इमरान के नफरत भरे संबोधन के खिलाफ कड़ा रुख दर्शाते हुए विदेश मंत्रालय की प्रथम सचिव विदिशा मैत्रा ने उनके भाषण पर भारत के जवाब देने के अधिकार का प्रयोग करते हुए कहा, "शायद ही कभी महासभा ने इस मंच पर अपनी बात रखने के अवसर का इस तरह से दुरुपयोग होते देखा है, बल्कि अवसर का दुष्प्रयोग होते देखा है।"

उन्होंने कहा कि भारत पर हमला करने के लिए उन्होंने जिन शब्दों का इस्तेमाल किया जैसे 'तबाही' 'खून-खराबा' 'नस्लीय श्रेष्ठता', 'बंदूक उठाना' और 'अंत तक लड़ना', एक मध्ययुगीन मानसिकता को दर्शाता है न कि 21वीं सदी के दृष्टिकोण को।

उसने कहा, "एक पुराने और अस्थायी प्रावधान - अनुच्छेद 370 को हटाए जाने पर जो भारतीय राज्य जम्मू-कश्मीर के विकास और एकीकरण में बाधा था, उस पर पाकिस्तान की नफरत भरी प्रतिक्रिया इस तथ्य की उपज है कि जो लोग लड़ाई में यकीन करते हैं वे कभी भी शांति की किरण का स्वागत नहीं करते।"

उन्होंने कहा, "पाकिस्तान जब आतंकवाद को बढ़ावा दे रहा है और नफरत फैलाने वाला भाषण दे रहा है, ऐसे समय में भारत जम्मू-कश्मीर में मुख्यधारा के विकास के साथ आगे बढ़ रहा है।"

विदिशा मैत्रा ने आगे कहा, "भारत के लोगों को अपनी ओर से बोलने के लिए किसी और की जरूरत नहीं है खासकर उन लोगों की बिल्कुल जरूरत नहीं है जिन्होंने नफरत की विचारधारा पर आतंक का उद्योग खड़ा किया है।"