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जम्मू कश्मीर को बांटने वालों पर हुई करवाई, जमात-ए-इस्लामी कैडर प्रमुख यासीन मलिक हिरासत में

जम्मू कश्मीर में अलगाववादियों पर कार्रवाई करते हुए शुक्रवार रात जमात-ए-इस्लामी कैडर प्रमुख यासीन मलिक को हिरासत में ले लिया गया है। 

AKANKSHA MISHRA

AKANKSHA MISHRA

श्रीनगर: जम्मू कश्मीर के पुलवामा आतंकी हमले के बारे में सोच कर आज भी रोंगटे खड़े हो जाते है। देश ने इस हमले में अपने 45 वीर जवानों को खोया था। इस हमले के बाद पूरे देश में एक ही मांग है आतंकियों से बदला लो और अब करवाई करते हुए कश्मीर घाटी में पुलिस अधिकारियों ने सख्त रुख अपनाते हुए जमात-ए-इस्लामी कैडर के दर्जनों लोगों को हिरासत में ले लिया है, जिसमें इसका सरगना भी शामिल है। पुलिस सूत्रों ने यह जानकारी दी। दक्षिण, मध्य और उत्तरी कश्मीर जिलों में राजनीतिक समूह के प्रमुख सदस्यों हिरासत में लेने के लिए छापे मारे गए।

मीडिया रिपोर्ट से मिली जानकारी के मुताबिक अनुच्छेद 35-ए पर 26 फरवरी के आस-पास सुनवाई प्रस्तावित है। इसी वजह से एहतियातन यासीन मलिक को गिरफ्तार किया गया है। इस बीच घाटी में पुलिस और अर्द्धसैनिक बलों को हाई अलर्ट पर रखा गया है। पुलिस यासीन को कोठीबाग थाने ले गई।

क्या है आर्टिकल 35-A

दरअसल आर्टिक्ल 35-A धारा 370 का हिस्सा है। इस आर्टिकल के तहत जम्मू-कश्मीर के अलावा भारत के किसी भी राज्य का नागरिक जम्मू-कश्मीर में कोई संपत्ति नहीं खरीद सकता इसके साथ ही वहां का नागरिक भी नहीं बन सकता।

यासीन मलिक पुलिस हिरासत में

जमात के एक प्रवक्ता ने कहा कि हिरासत में लिए गए लोगों में प्रमुख (अमीर-ए-जमात) अब्दुल हमीद फयाज भी शामिल हैं। अधिकारियों ने इस बारे में कोई स्पष्टीकरण नहीं दिया है कि 5,000 से अधिक कैडर वाले सबसे पुराने धार्मिक-राजनीतिक संगठन पर छापेमारी की आवश्यकता क्यों पड़ी। जम्मू-कश्मीर लिबरेशन फ्रंट (जेकेएलएफ) के चेयरमैन यासीन मलिक को भी पुलिस ने शुक्रवार को श्रीनगर में हिरासत में लिया था।

क्यों उठ रही है आर्टिकल 35 A को हटाने की मांग

आर्टिकल 35 A को हटाने की मांग इसलिए हो रही है क्योंकि इस अनुच्छेद को संसद के जरिए लागू नहीं किया गया है, दूसरा कारण ये है कि इस अनुच्छेद के ही कारण पाकिस्तान से आए शरणार्थी आज भी राज्य के मौलिक अधिकार और अपनी पहचान से वंचित हैं।

आपको बता दे कि, इससे पहले कश्मीर प्रशासन द्वारा अलगाववादी नेताओं की सुरक्षा को वापस ले लिया गया था। जिसे यासीन मलिक ने झूठ करार दिया था। मलिक ने कहा कि उन्हें राज्य से कभी कोई सुरक्षा नहीं मिली। कट्टरपंथी हुर्रियत कॉन्फ्रेंस ने उसके अध्यक्ष सैयद अली शाह गिलानी की सुरक्षा वापस लेने संबंधी खबर को ‘हास्यास्पद' बताया था। मलिक ने मीडिया से बात करते हुए कहा था कि मेरे पास पिछले 30 सालों से कोई सुरक्षा नहीं है। उन्होंने ये भी कहा था कि न हमने कभी सरकार से सुरक्षा मांगी और न कभी उन्होंने दी है। उनका जो मन है वो करें। यह सरकार की तरफ से बिल्कुल बेईमानी है।