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कांग्रेस के राज में आर्थिक तंगी से जूझता ISRO, नहीं कर पाया था एक भी परिक्षण !

इसरो के सफल ऑपरेशन ‘मिशन शक्ति’ के बाद कांग्रेस पार्टी पर बीजेपी नेताओं द्वारा आरोप लगाया जा रहा है कि कांग्रेस के पिछले 70 सालों में ISRO आर्थिक तंगी से जूझता रहा। 

AKANKSHA MISHRA

AKANKSHA MISHRA

प्रधानमंत्री मोदी ने बुधवार को सोशल मीडिया में घोषणा करते हुए कहा कि भारत ने 'मिशन शक्ति' का सफल ऑपरेशन पूरा किया। इस ऑपरेशन के बाद भारत अंतरिक्ष में दुनिया का चौथा महाशक्ति देश बन कर उभरा हैं। इसरो के वैज्ञानिकों ने अंतरिक्ष में एक लाइव सैटेलाइट को नष्ट करने में सफलता हासिल कर ली है।

जिसके बाद इसरो के पूर्व प्रवक्ता टीवी के सामने आये उन्होंने कहा, हमनें यह तकनीक साल 2012 में ही विकसित कर ली थी, लेकिन तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने इसके परीक्षण की अनुमत हमें नहीं दी। प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में हमनें यह परीक्षण सफलता पूरा किया और अब अंतरिक्ष में अमेरिका, रूस और चीन की बराबरी कर ली।

इसरो की कामयाबी के बाद, बीजेपी नेता प्रधानमंत्री मोदी का गुणगान करने लगे, बधाई देने लगे, जैसे मोदी ने ही यह तकनीक विकसित की हो, और मिशन शक्ति उन्होंने ही पूरा किया हो। प्रधानमंत्री मोदी के राष्ट्र संबोधन के बाद बीजेपी आईटीसेल और पार्टी कार्यकर्ता सक्रिय हो गए और कांग्रेस पर आरोप लगाने लगे कि कांग्रेस पार्टी जब तक सत्ता में रही इसरो का हाल बेहाल रहा।

इसरो इंदिरा गाँधी के काल में पाई पाई के लिए मोहताज बन गया था। गांधी परिवार ने देश का धन लूट लिया। जिसके बाद बीजेपी आईटी सेल ने सोशल मीडिया में एक तस्वीर शेयर की जिसमें कथित तौर पर इसरो के वैज्ञानिक बैलगाड़ी पर किसी सैटेलाइट को रख कर ले जा रहे हैं।

इंदिरा गांधी राहुल गांधी का 7 वां जन्मदिन मनाती हुई 
इंदिरा गांधी राहुल गांधी का 7 वां जन्मदिन मनाती हुई 
Facebook-PMO India

तस्वीर के कैप्शन में लिखा गया - "मभी मत भूलिएगा कि जब इसरो को एक रॉकेट ले जाने के लिए बैलगाड़ी दे दी गई थी। तब गांधी परिवार एक चार्टर विमान में जन्मदिन की पार्टी मना रहा था।"

गांधी परिवार पर आरोप लगते हुए सोशल मीडिया में वायरल हो रही तस्वीर का राज अब खुल चुका है। इसरो के जानकर रहे पल्ल्व बागला बताते हैं कि, इसरो संस्थान को किसी भी सरकार में संसाधनों की कमी कभी नहीं हुई। और खासतौर पर नए प्रोजेक्ट्स को शुरू करने में। अब तक कभी नहीं हुआ कि इसरो के पास उसके लिए संसाधन न हो।

सोशल मीडिया में वायरल हो रही बैलगाड़ी की तस्वीर पर बोलते हुए उन्होंने कहा - यह एप्पल सेटेलाइट है, इसे बैलगाड़ी में रखने का आदेश इसरो वैज्ञानिकों का ही था। दरअसल हमें उस समय 'इलेक्ट्रोमैग्नेटिक इंटरफेयरोंस रिफ्लेक्शन' की जानकारी नहीं थी। हमें नहीं पता था कि, इस सेटेलाइट को इलेटोनिक्स मशीन पर रखने से क्या होगा। इसलिए हमनें बैलगाड़ी चुना। यह हमारी मज़बूरी नहीं थी। जरुरत थी।

उन्होंने बताया, इसरो का यह परीक्षण 1977 में हुआ था, और यह तस्वीर भी तभी की है।

आपको बता दें कि, 1977 में देश में जनता पार्टी की सरकार थी और प्रधानमंत्री मोराजी भाई देसाई थी। इंदिरा गांधी उस समय भारत की प्रधानमंत्री नहीं थी।