भारत बंद हुआ तगड़ा फ्लॉप, क्या रहे कारण ?

पूरे देश में भारत बंद का कितना असर देखा गया आइये जानते हैं।
भारत बंद हुआ तगड़ा फ्लॉप, क्या रहे कारण ?
भारत बंद हुआ तगड़ा फ्लॉपउदय बुलेटिन

भारतीय किसान संगठनों ने कृषि कानूनों के विरोध में देश भर के लोगों से सरकार के प्रति विरोध करने के लिए भारत बंद का आवाहन किया, लेकिन अगर तकनीकी रूप से देखे तो यह भारत बंद महज सांकेतिक रूप में रहा। कुछ जगहों को छोड़कर पूरे देश मे भारत सामान्य रहा, आइये इन कारणों पर नजर डालते है......

राजनीतिक घालमेल ने किसानों की मेहनत पर फेरा पानी:

यहां असल मुद्दा किसानों की समस्याओं और किसानों के मन मे पल रही भविष्य की आशंकाओं से उपजा था, जानकारों की माने तो यह विरोध सरकार की नीतियों को लेकर था। लेकिन जैसे ही इस मामले में राजनीति हावी हुई, विपक्षी पार्टियों ने अपना समर्थन देकर इसे राजनीतिक मुद्दा बनाया जनता इस मामले को लेकर बिदक गयी। आम जनमानस का कहना है कि वह किसानों के साथ मे है लेकिन राजनीतिक विद्वेष का फायदा उठाकर राजनीति चमकाने के मामले में कतई सहयोग नही करेंगे। इस मामले में सपा, कांग्रेस, बसपा जैसी पार्टियों ने किसान नेताओं के बार-बार मना करने पर पार्टी के झंडे टोपी के साथ भारत बंद कराने की सोची लेकिन कई जगह तो ऐसा भी देखने मे आया है कि लोग विरोध के विरोध में मोदी-मोदी के नारे लगाते हुए नजर आए।

आम आदमी ने इस भारत बंद की असलियत समझ ली:

भारत बंद को नीति विरोध के बदले मोदी विरोध में बदला गया, जिसके परिणाम भी लगभग हर जगह नजर आए

आम व्यापारी ने नकारा भारत बंद:

चूंकि भारत लंबे वक्त तक लॉक डाउन की गिरफ़्त में रहा, इसलिए अर्थव्यवस्था के साथ आम आदमी का निजी अर्थ भी बेहद निचले स्तर पर रहा, उसके बाद राजनीतिक उल्लू सीधा करने के चक्कर मे जो खेल खेला गया व्यापारी उसके लिए अपनी रोजी रोटी पर आंच नही आने देना चाहता। यही कारण था कि जब विपक्षी पार्टियों के कार्यकर्ता दुकानदारों के हाथ पैर जोड़ते नजर आए तो दुकानदारों ने बड़ी शालीनता से उन्हें मना करते हुए बाजार खोले।

खुद राजस्थान के भीलवाड़ा में जब कांग्रेसी दल के कार्यकर्ताओं के द्वारा इलाके को बंद कराया गया तो आम दुकानदारों ने कांग्रेस के कार्यकर्ताओं को उल्टे पाँव वापस कर दिया।

लोगों ने कहा किसानों के साथ, लेकिन अब और मजाक नही:

भले ही किसान आंदोलन बहुत बड़े मुद्दे के साथ शुरू हुआ था लेकिन किसानों ने अपने मंच ऐसे लोगों के लिए खाली कर दिए जिन्होंने इस आंदोलन की प्रकृति में बदलाव लाने की सोच पैदा कर दी। आप पूर्व क्रिकेटर योगराज सिंह को ही ले लीजिये उन्होंने तो आंदोलन में जाकर हिन्दू समुदाय की महिलाओं को गाली गलौज से भी नवाज दिया। चूंकि दुनिया डिजिटल है और हर बात देर सवेर आम आदमी के पास पहुँच ही जाती है सो किसानों की करी कराई मेहनत पर जमकर पानी फेरा गया।

सरकार कर रही लगातार बातचीत:

हालांकि इस मामले में एक बात और ज्यादा महत्व रखती है कि आखिर भारत बंद किस बिनाह पर? सरकार किसानों के साथ मान मनोउववल के लिए लगातार बातचीत कर रही है। मीटिंग के चार पांच दौर बीत चुके है ऐसे मौके पर जब सरकार के साथ बात चीत चल रही है वैसे में भारत बंद लोगों को बेमानी समझ मे आया और लगभग यह भारत बंद किसी फ्लॉप फ़िल्म की तरह पिट गया।

डिस्क्लेमर: लेख में लिखे गए सभी विचार लेखक के है

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उदय बुलेटिन
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