बाँदा जिले में रेत माफिया का कहर, बहते पानी से निकाली जा रही है रेत

बाँदा में नहीं रुक रहा अवैध रेत खनन, बहती नदी से रेत निकालने में मदद करने से लेकर गाड़ियों को उचित स्थान पर पहुंचाने की जिम्मेदारी स्थानीय पुलिस ने संभाल रखी है।
बाँदा जिले में रेत माफिया का कहर, बहते पानी से निकाली जा रही है रेत
बाँदा में अवैध रेत खननउदय बुलेटिन

बाँदा शहर के बीचों बीच हुए रेत माफिया और खनन विभाग के बीच हुए प्रसिद्द संघर्ष को जुम्मा जुम्मा चार दिन ही हुए है वही जिले के बदौसा थाना क्षेत्र की एक घटना ने प्रशासन की पोल खोल कर रख दी है, इस मामले को लेकर प्रशासन जवाब देने से लगातार बच रहा है

बहती नदी से रेत निकाल रही पोकलैंड मशीनें:

एक कहावत है कि अगर पुलिस चाह ले तो मंदिर के दरवाजे से चप्पल भी चोरी नहीं जा सकती लेकिन जब जिम्मेदार विभाग लगातार उदासीनता दर्शाता रहेगा तो इस मामले में कोताही होना बेहद आम है। ताजा मामला उत्तर प्रदेश के बाँदा जिला अंतर्गत थाना बदौसा क्षेत्र के गांव तेरा महूटा से जुड़ा हुआ है जहां पर ग्रामीणों ने खनिज विभाग और पुलिस विभाग की कार्यशैली पर सवालिया निशान लगाए है, दरअसल लोगों ने इस बात की पुख्ता जानकारी वीडियो और तस्वीरों के माध्यम से उपलब्ध कराई है कि क्षेत्र में बहने वाली बागे नदी से दिन दहाड़े अवैध रेत निकाली जा रही है, ज्ञात हो सुप्रीम कोर्ट और नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के आदेशों और निर्देशों के अनुसार बहती नदी की धारा से रेत निकलना न सिर्फ कानूनन अपराध है बल्कि जैव विविधता नष्ट करके मानव जीवन को संकट में डालने जैसा नैतिक अपराध भी है, इसके बावजूद भी सरकारी नियमों को धता बताकर रेत माफिया द्वारा खनिज को लूटा जा रहा है।

आखिर रेत से लदे ट्रेक्टर जाते कहां है?:

अगर जानकारों की माने तो उक्त स्थान से रेत निकासी के उपरांत रेत से लदे हुए ट्रैक्टर मुख्य मार्ग से ही कर्वी जिला और बदौसा की तरफ जाते है। यह सब स्थानीय पुलिस की मिलीभगत से संभव हो पाता है कि ट्रैक्टर आराम से सड़कों पर अवैध रेत लादे फर्राटा भरते हुए नजर आते है वहीँ पुलिस उनकी खुशामद में लगी रहती है। पूर्व में रेत व्यवसाय करने वाले व्यक्ति ने नाम न छापने की शर्त पर उदय बुलेटिन को यह बताया कि इस फर्जीवाड़े में नदी के किनारे आने वाले गांवों के प्रधान जनप्रतिनिधि और स्थानीय पुलिस बराबर की भागीदार है, उक्त व्यक्ति ने यह जानकारी दी कि पुलिस ट्रैक्टर निकालने के लिए 1300-1500 रुपये प्रतिदिन के हिसाब से सुविधा शुल्क बसूलती है जिसके लिए उन्हें लोकेशन सम्बंधित सभी जानकारी मुहैया करानी होती है।

बाँदा में हो चुका है विवाद:

यहां आपको बताते चले कि खनिज विभाग और रेत माफिया का आमना-सामना बाँदा जिला मुख्यालय में पहले भी हो चुका है जिसमें खनन माफिया के हमले में खनिज अधिकारी को जान बचाकर भागना पड़ा था।

इस मामले पर निगाह रखने वाले व्यक्तियों ने जानकारी दी इस अवैध जाल में स्थानीय पुलिस अपनी अहम भूमिका निभाती है जिसके द्वारा लगातार जिले में रेत माफिया और सिंडिकेट को पानी देकर पोषित किया जा रहा है, अगर इस फर्जीवाड़े को सही समय पर रोका नहीं गया तो क्षेत्र को अकाल और पानी की किल्लत जैसी समस्याओं से जूझना पड़ सकता है।

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उदय बुलेटिन
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