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जानें, सहकारी बैंकों में कितनी सुरक्षित है आपके जीवनभर की जमा पूंजी?

लोग बैंक में पैसे रखते हैं यह सोचकर कि भविष्य में उन्हे वो पैसे काम आएंगे, लेकिन हाल में सहकारी बैंकों की स्थिति देखकर जनता का भरोसा उठता जा रहा है।

Puja Kumari

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हममें से आधे से ज्यादा लोग अपनी इनकम से जो कुछ भी बचा सकते हैं यानि कि जमा पूंजी को बैंकों में रखते है लेकिन कई बार बैंकों से जुड़ी जो खबरें सामने आती वो एकाएक इंसान को हिलाकर रख देती है। आज भी कुछ ऐसा ही हुआ है, कई दिनों से लगातार PMC बैंक अपनी हरकतों की वजह से चर्चा में बना हुआ है। हो भी क्यों न भला, पिछले कुछ समय से इस बैंक की ओर से हो रही लगातार अनियमितताओं की वजह से RBI ने इसपर कई तरह के प्रतिबंध लगा दिए हैं।

ऐसे में जाहिर सी बात है कि इस बैंक के सभी ग्राहकों के मन में को तरह के सवाल आ रहे होंगे, इसके अलावा उन्हें अपने जीवन भर को जमा पूंजी को लेकर टेंशन बना होगा। इतना ही नहीं परिस्थितियां कुछ इस कदर बन गयी है कि लोगों के मन में अब यह सवाल भी आने लगा है कि आखिर Co-operative Bank यानि कि सहकारी बैंकों में पैसा जमा करना आखिर कितना सेफ रह गया है?

लेकिन इन सभी सवालों के जवाब जानने से पहले ये जान लेते हैं कि आखिर सहकारी बैंक होता क्या है व ये कॉमर्शियल बैंक से कैसे अलग होते है ?

सबसे पहले तो बता दें कि सहकारी बैंक, कॉमर्शियल बैंक से बिल्कुल ही अलग होते हैं।

* कॉमर्शियल बैंक (Commercial Bank) की तरह सहकारी बैंक भी एक तरह की वित्तीय संस्था होती है जो कि पैसों के लेनदेन का काम करती है। लेकिन दूसरे बैंकों से अलग सहकारी बैंक अपने सदस्यों के आपसी समझ और सोच पर चलता है।

* जब भी सहकारी बैंकों को पूंजी की आवश्यकता होती है तो वो अपने सदस्यों पर निर्भर रहता है लेकिन कॉमर्शियल बैंक के साथ ऐसा नही होता।

* सहकारी बैंक में उसके सदस्य ही पूंजी लगाते हैं इसलिए लाभ का एक प्रतिशत उन्हें भी दिया जाता है। सामान्य रूप से आप ये समझ सकते है कि सहकारी बैंक के ग्राहक ही उसके मालिक भी हैं।

कैसे हुई सहकारी बैंक की शुरुआत

हमारे देश में सहकारी बैंको की शुरुआत पहले ग्रामीण इलाकों से ही हुई, ये विशेषकर उन लोगों के लिए खोल गया जो रसूखदारों से पैसे लेकर कभी न खत्म होने वाले कर्ज में डूबे रह जाते थे। इस पुराने व रूढ़िवादी तरीके को खत्म करने के लिए ही सहकारी बैंक की शुरुआत की गई।

इस बैंक के जरिये ग्रामीण इलाकों में किसान, मवेशियों, आदि को पैसों की मदद कर सके। फिलहाल के आँकनो पर गौर करें तो सहकारी बैंक के हिस्से में देश के 8% डिपॉजिट और 9 % लोन है। अक्सर सहकारी बैंक उनलोग के लिए ज्यादा लाभकारी होते हैं जो पहली बार उनसे लोन लेने जाते है, और जिन्हें पब्लिक या प्राइवेट सेक्टर के बैंक लोन देने से मना कर देते है।

सहकारी बैंकों में डिपॉजिट करने पर ब्याज ज्यादा मिलता है तो वहीं लोन पर भी ज्यादा ब्याज देना पड़ता है। लेकिन कई बार ये बैंक अपनी ताकत का गलत प्रयोग कर बैठते हैं। इसके पीछे का कारण बताया जा रहा है सहकारी बैंक के बोर्ड में पेशेवर लोग शामिल नहीं हैं।

सहकारी बैंक में बोर्ड ऑफ डायरेक्टर बैंक के सदस्यों में से ही किसी को चुना जाता है जिसे किसी बड़े या ताक़तवर लोग ही हथिया लेते हैं ऐसे में सही निर्णय ले पाना संभव नहीं हो पाता है। इतना ही नहीं बैंक की रकम का भी गलत प्रयोग करते हैं इस बार भी कुछ ऐसा ही हुआ जैसे PMC के मामले में रियल स्टेट कंपनी HDCL को गलत तरीके से लोन दिया गया, इस काम में बैंक के चेयरमैन भी शामिल थें, जिसकी वजह से उन्हें जेल भी हो गया।

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RBI का कितना है दखल

अब बात करें RBI की तो सहकारी बैंकों के वित्तीय पक्ष पर बात कर सकता है, लेकिन वहीं उसके मैनेजमेंट पर केंद्र व राज्य सरकार ही बात कर सकती है।

सहकारी बैंकों के लिए क्या सही है और क्या गलत ये तो RBI बता सकता है लेकिन इसमें किसी तरह का बदलाव नहीं कर सकता है जब तक कोई आपात स्थिति न हो।

हालांकि इमरजेंसी के मामले में RBI सहकारी बैंक पर कई प्रतिबंध लगा सकती है जैसा कि अभी PMC बैंक पर लगाया गया है। फिलहाल PMC बैंक पर करीब 6 माह के लिए किसी भी तरह का लेन देन करने पर रोक लगा है, इसके अलावा ग्राहकों की निकासी की रकम महज 40 हजार रुपए की गई है।

सहकारी बैंक में कितना सुरक्षित है पैसा ?

अब ये सवाल आपके मन मे आ रहा होगा कि आखिर सहकारी बैंकों में पैसे जमा करें या न करें? तो सरकार की माने तो सहकारी बैंकों के नियमों में बदलाव लाने की सबसे ज्यादा आवश्यकता है। वैसे हर बैंक आने ग्राहकों को 1 लाख रुपये तक का बीमा कवर करती है चाहे वो सहकारी बैंक हो या कॉमर्शियल बैंक हो इसलिए आप चाहे तो इन बातों को ध्यान रखकर सहकारी बैंक में पैसे जमा कर सकते हैं।