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कोरोना वायरस के मरीजों को बचाने में वेंटिलेटर किस हद तक कर रहा है काम

वेंटिलेटर वह मशीन है जो किसी भी मरीज को सांस दे कर उसे जीवनदान देने में मददगार होती है, मगर ये कोरोना से संक्रमित लोगों के लिए कितना अहम है यह जानना भी महत्वपूर्ण है।

Puja Kumari

Puja Kumari

'मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है' इस बात को हम वर्षों से सुनते और पढ़ते आये हैं मगर पिछले कुछ समय से देश और दुनिया में जिस तरह की स्थिति बनी हुई है उसके अनुसार यदि मनुष्य जरा भी सामाजिक बनने का प्रयास करता है तो इसमें कोई दो राय नहीं है कि वह अपनी जान से हाथ धो बैठेगा।

असल में हम बात कर रहे कोरोना वायरस की जिसने पिछले तक़रीबन महीने भर से भी ज्यादा समय से देश-दुनिया के सभी मुद्दों के बीच अपनी ऐसी जगह बना ली है कि किसी के पास और कुछ बोलने और सुनने को है ही नहीं। इसके अलावा इस वायरस से संक्रमित तथा मरने वालों की संख्या में भी बहुत ही तेजी से इजाफा हो रहा है।

आधुनिक से आधुनिक देश इसके प्रति लाचार बना हुआ है, सिर्फ इलाज करते हुए कोरोना संक्रमित को बचा पाने का प्रयास करने के अलावा किसी के पास फिलहाल कोई भी विकल्प नहीं है।

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इस समय सभी देश अपने नागरिकों को कोरोना वायरस से बचाने के लिए कुछ निश्चित हेल्थकेयर फैसिलिटी का इस्तेमाल कर रहे हैं और वो है वेंटीलेटर। सभी अस्पताल वाले इसी कोशिश में लगे हुए हैं कि इससे पहले कि उनके अस्पताल मरीजों से भरे उनके पास पर्याप्त मात्रा में वेंटीलेटर उपलब्ध हो जाये।

अब आपके मन में सवाल आ रहा होगा की आखिर एक वेंटीलेटर इतनी खतरनाक बीमारी से बचाव में किस तरह काम कर रहा है और कैसे किसी मरीज की जान बचा रहा। निश्चित रूप से यह एक बड़ा सवाल है मगर इसका जवाब भी उतना ही रोचक भी है।

क्यों जरूरी है वेंटीलेटर

यह निश्चित रूप से एक बड़ा सवाल है आखिर कब तक इस जानलेवा कोरोना वायरस का इलाज मिलेगा। फिलहाल अभी तक इसका जवाब किसी भी देश के वैज्ञानिकों के पास नहीं है। मगर ऐसा भी नहीं है कि इलाज नहीं है तो मरीजों को मरने के लिए छोड़ दिया जाये, ऐसे में सभी देश वेंटीलेटर को इसके इलाज में सबसे ज्यादा महत्त्व दे रहे।

जैसा कि हम सभी जानते हैं कोरोना वायरस के लक्षण बहुत ही सामान्य है और इससे संक्रमित व्यक्ति को पहले थोड़ी खांसी फिर बुखार और खांसी के साथ-साथ सांस लेने में तकलीफ की समस्या आने लगती है। अब यहाँ पर आपको एक बात ये जान लेनी चाहिए कि साल 2019 में आया कोरोना वायरस का पूरा नाम "SARS CoV-2" है जिसकी पूरा नाम है सीवियर एक्यूट रेस्पिरेटरी सिंड्रोम कोरोना वायरस 2 ( severe acute respiratory syndrome coronavirus 2) सांस लेने में तकलीफ पैदा करने वाला वायरस, कोरोनावायरस।

कोरोना वायरस के मरीजों को वेंटीलेटर की जरुरत क्यों?

अब आप भी शायद समझ गए होंगे कि इससे प्रभावित मरीज के लिए वेंटीलेटर इतना जरूरी क्यों है क्योंकि कोरोना वायरस के मरीज को कुछ ही दिनों में सांस लेने में तकलीफ होने लगती है और उस दौरान उसे सबसे ज्यादा आवश्यकता होती है वेंटीलेटर की। ताकि उसकी मदद से उसके फेफड़ों में सांस पहुंचाई जा सके और वह जीवित रह पाए।

कोरोना वायरस नाक और मुंह के रास्ते हमारे शरीर में प्रवेश करते हैं और सांस नली से होते हुए ये वायरस पूरे फेफड़े को बहुत ही तेजी से अपने आगोश में लेने लगता है। इसकी वजह से फेफड़ों में पानी भरने लगता है और सांस लेने में तकलीफ होने लगती है और उस दौरान वेंटीलेटर ही वह हेल्थकेयर फैसिलिटी है जो शरीर को ऑक्सीजन पहुँचाने का काम करती है।

चूँकि अभी तक इस वायरस की कोई भी दवा नही बनायीं जा सकी है ऐसे में सभी अस्पतालों में वेंटीलेटर की डिमांड भी कई गुना ज्यादा बढ़ गयी है।

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कैसे इस्तेमाल किया जाता है वेंटीलेटर

इनट्यूबेशन के जरिये मरीज के मुंह के अन्दर गले से एक पाइप उतारी जाती है, यह प्रक्रिया मरीज को बेहोश करके की जाती है और यहाँ पर ध्यान दीजियेगा कि डॉक्टर और उनकी टीम को इन्फेक्शन का सबसे ज्यादा खतरा इसी वक़्त होता है।

खैर पाइप का एक सिरा जब अन्दर चला जाता तो उसके दूसरे सिरे को पंप मशीन से ऑक्सीजन देने के लिए जोड़ दिया जाता है। यहाँ पर आपको एक बात साफ़-साफ़ समझ लेनी चाहिए कि वेंटीलेटर के इस्तेमाल से मरीज ठीक हो जायेगा ऐसा कुछ भी नहीं है। हाँ इसके इस्तेमाल से अभी तक उसे जो सांस लेने में तकलीफ हो रही थी उससे काफी हद तक निजात मिल जाती है।

हालाँकि कोरोना वायरस से संक्रमित सभी मरीज को वेंटीलेटर की आवश्यकता हो यह जरूरी नहीं है, कई लोग ऐसे भी होते हैं जो शुरुआती लक्षणों के बाद ठीक भी हो जाते हैं। वेंटीलेटर की जरूरत उन्ही लोगों को पड़ती है जो पहले से ही किसी तरह की सांस लेने की बीमारी से पीड़ित हैं या उनकी उम्र काफी ज्यादा है और उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होती है।

खैर इसका फैसला डॉक्टर ही कर सकता है कि मरीज को वेंटीलेटर चाहिए या नहीं। वैसे भी हमारे देश में वेंटीलेटर की संख्या काफी ज्यादा कम है और ऐसे में सबसे ज्यादा जरूरी है सोशल डिस्टेंसिंग की जिसके लिए देश में लॉकडाउन लागू किया गया है।

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उदय बुलेटिन
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