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राज्यपाल सत्यपाल मलिक
राज्यपाल सत्यपाल मलिक|IANS
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जम्मू कश्मीर: राज्यपाल बोलें, “मुझे नहीं पता मेरा यहां से कब तबादला हो जाएगा”

जम्मू कश्मीर के राज्यपाल सत्यपाल मालिक के जम्मू कश्मीर विधानसभा भंग करने पर हुए विवाद के बाद, राज्यपाल को डर है कि उनका तबादला कभी भी हो सकता है। 

AKANKSHA MISHRA

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जम्मू | जम्मू कश्मीर विधानसभा को भंग करने के बाद विवादों में चल रहे राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने बुधवार को संकेत दिया कि उन्हें उनके बयान की वजह से जम्मू एवं कश्मीर से बाहर भेजा जा सकता है। उन्होंने कहा था कि नई दिल्ली (केंद्र सरकार) पीपुल्स कांफ्रेंस के नेता सज्जाद लोन को जम्मू एवं कश्मीर के मुख्यमंत्री के रूप में देखना चाहती थी। अगर मैं ऐसा करता तो इतिहास मुझे कभी माफ नहीं करता और मुझे एक बेईमान व्यक्ति के रूप में याद रखता।

वरिष्ठ कांग्रेस नेता गिरधारी लाल डोगरा की पुण्यतिथि के अवसर पर हुए एक कार्यक्रम में मलिक ने कहा, "जब तक मैं यहां हूं, मैं यहां हूं। यह मेरे हाथ में नहीं है। लेकिन, तबादले का डर बना हुआ है।"

दरअसल सज्जाद लोन पीपुल्स कॉन्फ्रेंस के नेता हैं और उन्हें भाजपा का समर्थन हासिल है, केंद्र सरकार चाहती थी की सज्जाद लोन को जम्मु कश्मीर का मुख्यमंत्री बनाया जाये। बता दें कि जब 21 नवंबर को पीडीपी की महबूबा मुफ़्ती ने कांग्रेस और नेशनल कॉन्फ्रेंस के समर्थन का पत्र राज्यपाल को भेजा था तभी पीपुल्स कॉन्फ्रेंस के नेता सज्जाद लोन ने भी बीजेपी के समर्थन से राज्यपाल को पत्र भेजा था। जिसके बाद राज्यपाल ने विधानसभा भंग कर दिया था।

मलिक ने 24 नवंबर को ग्वालियर में सार्वजनिक रूप से स्वीकार किया था कि अगर वह जम्मू एवं कश्मीर के राजनीतिक संकट के लिए दिल्ली के दिशा-निर्देशों की ओर देखते तो उन्हें भाजपा समर्थित सज्जाद लोन को मुख्यमंत्री बनाना पड़ता मलिक ने कहा, लेकिन वह ऐसा करना नहीं चाहते थे।

उनके बयान पर विवाद होने के बाद, राजभवन ने एक बयान जारी कर कहा था कि राज्य विधानसभा भंग करने के दौरान राज्यपाल ने निष्पक्ष निर्णय लिया।

उन्होंने कहा, "मुझे नहीं पता मेरा यहां से कब तबादला हो जाएगा। लेकिन जब तक मैं यहां हूं, मैं लोगों को आश्वस्त करता हूं कि जब भी आप मुझे बुलाएंगे, मैं आ जाऊंगा।"

हालांकि राज्यपाल के फैसले की तारीफ करते हुए पूर्व मुख्यमंत्री और पीडीपी नेता महबूबा मुफ़्ती ने कहा, ‘फैक्स मशीन विवाद को छोड़कर, यह देखने के लिए अच्छा है कि गवर्नर साहब ने दिल्ली से निर्देश लेने से इंकार कर दिया और विधानसभा को भंग करने का विकल्प चुना।

वहीं उमर अब्दुल्ला ने भी राज्यपाल के बयान की तारीफ़ करते हुए कहा, ‘गवर्नर मलिक को मेरी शुभकामना है कि उन्होंने दिल्ली से निर्देशों लेने से इंकार कर दिया। उन्होंने राज्यपाल की तारीफ करते हुए कहा कि 'हम कोई भी राजनीतिक रूप से नियुक्त ऐसे गवर्नर को नहीं जानते हैं जो केंद्र की इच्छाओं के खिलाफ गया हो। ’

आईएएनएस