कानपुर के बिकरू गांव में विकास दुबे के भूत का का खौफ।

बिकरू गांव के लोगों का कहना है कि गांव में विकास दुबे भूत बनकर बापस आ गया।
कानपुर के बिकरू गांव में विकास दुबे के भूत का का खौफ।
vikas dubey ghost in bikaruGoogle Image

जैसे ही सूरज अपनी गर्मी समाप्त कर अस्ताचल की ओर निकलता है बिकरू गांव में मौत की खामोशी सी दौड़ जाती है। अब लोग दूसरे गांवों की तरह चौपाले नहीं लगाते बल्कि एक अजीब से ख़ौफ़ का साया बिकरू गांव पर मंडरा रहा है। लोगों ने बताया कि बिकरू में विकास का नाम इतनी जल्दी खत्म नहीं होगा। वह मरने के बाद भी अपने होने का एहसास दिला रहा है।

लोगों ने विकाश का भूत देखे जाने की बात की:

वैसे तो विकास दुबे को मरे हुए एक लंबा वक्त बीत चुका है मृतक विकास दुबे के अंतिम संस्कार समेत धार्मिक क्रियाकर्म भी कराई जा चुकी है। जरायम की निशानी विकास दुबे का मकान अब खंडहर का रूप ले चुका है लेकिन फिर भी गांव में बुजुर्गों और युवाओं ने होने वाली अनहोनी घटनाओं का जिक्र करते हुए बताया कि विकास दुबे का किस्सा अभी खत्म नहीं हुआ। वो यहीं है और भविष्य में होने वाले किसी बड़े अनिष्ट की चेतावनी देते हुए नजर आता है। हालांकि बिकरू गांव के सभी लोगों ने जो भी बातें बतायी वह केवल इस शर्त पर की न उनका नाम उजागर किया जाए और न ही उनकी तश्वीर का किसी प्रकार से प्रयोग की जाए अन्यथा उन्हें पुलिस और अन्य अपराधियों की तरफ से खतरा हो सकता है।

गांव के बुजुर्गों ने बताया कि शाम ढलते ही यहां खंडहर (विकास दुबे का मकान) के आसपास फुसफुसाहट और हंसने की आवाजें एक अजीब सा माहौल खड़ा कर देती है। एक बुजुर्ग ने यह दावा किया कि उसने विकास दुबे को उसके टूटे हुए मकान पर बैठे हुए देखा। वह उसकी तरफ टकटकी लगाकर लगातार देखे जा रहा था मानो वह कुछ बताने की कोशिश कर रहा हो या ऐसा कुछ कहने की कोशिश कर रहा हो कि तुम लोग सुकून से नहीं रह पाओगे।

सुनाई देती है गोलियों की आवाजें:

ग्रामीणों ने इस बारे में यह जानाकरी भी दी कि रात के अंधेरे में उन्हें रायफलों के बोल्ट एक्शन, पिस्टल के कॉक होने और फायरिंग की आवाजें सुनाई देती है। पुलिसकर्मियों के गोली लगने के बाद आवाजें देना हर रोज का किस्सा है। ग्रामीणों के मुताबिक विज्ञान इन चीजों को भले ही न माने लेकिन हमारे द्वारा इसे रोज नर्क यातना की तरह महसूस किया जा रहा है। ग्रामीणों ने बताया कि विकास दुबे की चिरपरिचित अट्टहास बेहद आम है और यहाँ रोज सुनाई देता है।

पुलिस ने अपनी बात कही:

दरअसल स्थानीय लेवल पर लोगों मे शांति व्यवस्था बनाये रखने और कोई अचानक पैनिक न हो इसके लिए मौके पर महिला पुलिस के साथ अन्य पुलिस कांस्टेबलरी की तैनाती की गई है। लेकिन इस बारे में जानकारी करने पर किसी पुलिस कर्मी ने ऐसी घटना का साक्ष्य तो नहीं दिया लेकिन ग्रामीणों की बातों का खंडन भी नहीं किया।

ग्रामीणों के अनुसार अगर पुलिस इस बात को नही मानती तो बिकरू से जुड़े हुए थाने में नव आगंतुक पुलिसकर्मियों ने धार्मिक अनुष्ठान का आयोजन क्यों कराया गया था।

आज विज्ञान का युग है और विज्ञान भूत प्रेतादि की बातों में विश्वास नहीं करता लेकिन यह भी सच है कि ग्रामीणों की तकलीफ और उनके वाकये आपके जेहन में सिहरन पैदा कर देते है।

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